राजसमंद में निजी विद्यालयों का ऐलान: 15 जुलाई को रहेगा पूर्ण बंद, सरकार के खिलाफ फूटा गुस्सा
राजसमंद में निजी विद्यालयों ने सरकार की अव्यावहारिक नीतियों और 'राज शिक्षा संबलन' ऐप के विरोध में 15 जुलाई को स्कूल बंद रखने का निर्णय लिया है। अपनी मांगों को लेकर संचालक जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपेंगे। क्या सरकार मानेगी मांगें?

तस्वीर में राजसमंद स्थित गायत्री पब्लिक स्कूल में निजी विद्यालय संचालकों की एक महत्वपूर्ण बैठक के दौरान वक्ता अपनी बात रखते हुए और उपस्थित सदस्य दिखाई दे रहे हैं।
राजसमंद जिले के निजी विद्यालयों की स्वायत्तता पर सरकारी प्रहार और विभिन्न लंबित मांगों को लेकर संघर्ष तेज हो गया है। निजी विद्यालय संगठन, जिला राजसमंद की एक महत्वपूर्ण बैठक आज 13 जुलाई 2026 को धोइंदा (कांकरोली) स्थित गायत्री पब्लिक सीनियर सेकेंडरी स्कूल में संपन्न हुई। संरक्षक मंडल के सदस्य लाल सिंह झाला, हंसराज गिरी गोस्वामी और हरिवल्लभ पालीवाल की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में जिले भर के निजी विद्यालय संचालकों ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि राज्य सरकार की अव्यावहारिक नीतियों और शिक्षा विभाग द्वारा थोपे जा रहे अनावश्यक प्रशासनिक दबाव के विरोध में आगामी 15 जुलाई 2026 को जिले के सभी निजी विद्यालय एक दिवसीय सांकेतिक बंद रहेंगे।
बैठक में संचालकों ने 'राज शिक्षा संबलन' ऐप के माध्यम से थोपी गई 44 बिंदुओं वाली जांच प्रक्रिया को निजी शिक्षण संस्थानों की स्वायत्तता का हनन बताया। संचालकों ने टी.एम.ए. पाई फाउंडेशन बनाम कर्नाटक राज्य (2002) के सर्वोच्च न्यायालय के ऐतिहासिक निर्णय का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि शिक्षण संस्थाओं का प्रबंधन करना उनका संवैधानिक मौलिक अधिकार है, जिसे किसी भी सरकारी हस्तक्षेप से सीमित नहीं किया जा सकता। संगठन ने 'राज शिक्षा संबलन' ऐप आधारित जांच प्रक्रिया को तत्काल निरस्त करने की मांग की है।
विद्यालय संचालकों की प्रमुख मांगों में आगामी 8-10 वर्षों के लिए निजी विद्यालयों के संचालन हेतु सरल नीति का निर्माण, जिसमें संगठनों के प्रतिनिधियों को शामिल किया जाए, शामिल है। साथ ही आर.टी.ई. पुनर्भरण का लंबित भुगतान इसी वित्तीय वर्ष में करने, सत्र समाप्ति से पूर्व भुगतान सुनिश्चित करने और यूनिट कॉस्ट में प्रतिवर्ष वृद्धि करने की मांग रखी गई। संचालकों ने चेतावनी दी कि प्री-प्राइमरी कक्षाओं का लंबित भुगतान शीघ्र नहीं हुआ, तो वे इन कक्षाओं का अध्यापन कार्य करने में असमर्थ होंगे। इसके अलावा, अग्नि सुरक्षा के लिए 15 मीटर ऊंचाई का नियम लागू रखने, वर्ष 2012-13 के अनुरूप 'शीथलन' पुनः लागू करने, यू-डायस और आर.टी.ई. पोर्टल की तकनीकी विसंगतियों के कारण रुके भुगतान की प्रक्रिया सरल करने और पोर्टल का 1000 रुपये वार्षिक शुल्क समाप्त करने की मांग की गई। साथ ही, भौतिक सत्यापन वर्ष में अधिकतम एक या दो बार करने और आर.टी.ई. छात्रों से बोर्ड परीक्षा शुल्क न लेने का आग्रह किया गया।
जिला सचिव गिरीश पालीवाल ने जानकारी दी कि 15 जुलाई की सुबह सभी निजी विद्यालय संचालक जिला कलेक्टर कार्यालय के बगीचे में एकत्रित होंगे और प्रातः 10:00 बजे जिला कलेक्टर को अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपेंगे। बैठक में वरिष्ठ उपाध्यक्ष जवान सिंह देवड़ा, संगठन मंत्री शिव शंकर पुरबिया, भरत कुमावत, शिव प्रसाद सनाढ्य, भवर लाल कुमावत, देवेंद्र गर्ग, हरिकिशन, बाबू लाल कुमावत, सुरेश पूर्बिया, गिरीश श्रीमाली, यथार्थ पालीवाल, दिलीप जोशी सहित जिले के अनेक संचालक मौजूद रहे। वक्ताओं ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि सरकार ने इन मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार नहीं किया, तो भविष्य में उग्र आंदोलन किया जाएगा, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी राज्य सरकार और शिक्षा विभाग की होगी।

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