राजसमंद: निजी विद्यालय संगठन ने अपनी मांगों को लेकर जिला कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन
राजसमंद में निजी स्कूलों ने लंबित RTE भुगतान, प्री-प्राइमरी क्लेम और अव्यावहारिक विभागीय आदेशों के समाधान हेतु प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की है।

राजसमंद जिला कलेक्ट्री कार्यालय में अपनी विभिन्न लंबित मांगों और RTE भुगतान समस्याओं को लेकर ज्ञापन सौंपते निजी विद्यालय संगठन के पदाधिकारी और सदस्य।
राजसमंद | निजी विद्यालयों की विभिन्न समस्याओं को लेकर आज निजी विद्यालय संगठन, जिला राजसमंद की ओर से जिला कलेक्टर को एक ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन के माध्यम से संगठन ने राज्य में संचालित निजी विद्यालयों, अध्यनरत विद्यार्थियों एवं कार्यरत शिक्षकों से जुड़ी गंभीर समस्याओं की ओर प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया।
शिक्षा में योगदान और वर्तमान चुनौतियाँ
संगठन की ओर से बताया गया कि निजी विद्यालय स्वतंत्रता के बाद से ही समाज के प्रत्येक वर्ग तक शिक्षा पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते आए हैं। वर्तमान में विभागीय नीतियों और आदेशों के कारण निजी विद्यालयों को निम्नलिखित कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है:
- आर्थिक कठिनाइयाँ
- प्रशासनिक बाधाएं
- संरचनात्मक समस्याएँ
ज्ञापन के मुख्य बिंदु और समस्याएँ
संगठन ने ज्ञापन में कई गंभीर मुद्दों को उठाया है:
- RTE भुगतान में वर्षों से लंबित क्लेम और प्री-प्राइमरी RTE भुगतान का अटका होना।
- RTE यूनिट कॉस्ट का वास्तविक खर्च से बहुत कम होना।
- पारदर्शी व समयबद्ध भुगतान प्रणाली की कमी।
- बिना संवाद जारी किए जा रहे अव्यावहारिक आदेश।
- परीक्षा शुल्क एवं खेल गतिविधियों में असमानता।
- खेल प्रतिभाओं के साथ भेदभाव।
- निजी शिक्षकों की सेवा-सुरक्षा पर संकट।
प्रमुख माँगें
संगठन ने प्रशासन से निम्नलिखित माँगें रखी हैं:
- सभी लंबित RTE क्लेम बिलों का तत्काल भुगतान किया जाए।
- प्री-प्राइमरी RTE का भुगतान शीघ्र शुरू हो।
- यूनिट कॉस्ट को महंगाई दर व वास्तविक खर्च के अनुरूप बढ़ाया जाए।
- भविष्य में समयबद्ध और पारदर्शी भुगतान व्यवस्था लागू की जाए।
- अव्यावहारिक आदेशों की समीक्षा, परीक्षा विसंगतियों को दूर करने और नए आदेशों से पूर्व निजी विद्यालय संगठनों से संवाद स्थापित किया जाए।
नेतृत्व और संगठन का वक्तव्य
संगठन के जिलाध्यक्ष डॉ. लेवराज सिंह चौहान ने कहा कि:
“यह ज्ञापन किसी टकराव का नहीं, बल्कि संवाद, समाधान और न्याय की अपेक्षा का प्रतीक है। यदि निजी विद्यालयों की समस्याओं का समय पर समाधान नहीं किया गया तो इसका दुष्प्रभाव संपूर्ण शिक्षा व्यवस्था पर पड़ेगा।”
संगठन ने विश्वास जताया कि राज्य सरकार इन मांगों पर गंभीरतापूर्वक विचार कर शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेगी।

Pratahkal Bureau
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