राजसमंद: बाल संरक्षण को लेकर एसजेपीयू की बैठक, पुलिस अधिकारियों को मिले निर्देश
राजसमंद में आयोजित समीक्षा बैठक में बाल अपराधों की रोकथाम और किशोर न्याय अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन पर चर्चा की गई।

राजसमंद (प्रात:काल संवाददाता)। उदयपुर रेंज पुलिस द्वारा संचालित 'पुलिसिंग फॉर केयर ऑफ चिल्ड्रन' कार्यक्रम के अंतर्गत, राजसमंद जिले में किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम 2015 के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु विशेष किशोर पुलिस इकाई एवं थाना स्तर पर नियुक्त बाल कल्याण पुलिस अधिकारियों की त्रैमासिक समीक्षा बैठक का आयोजन जिला पुलिस अधीक्षक सभागार में किया गया। जिला पुलिस अधीक्षक हेमंत कलाल की अध्यक्षता में संपन्न इस महत्वपूर्ण बैठक का मुख्य उद्देश्य जिले में बाल अपराधों की रोकथाम, किशोर न्याय अधिनियम का अनुपालन और बच्चों के लिए एक सुरक्षित एवं सकारात्मक परिवेश सुनिश्चित करना था।
समीक्षा बैठक के दौरान पुलिस अधीक्षक हेमंत कलाल ने स्पष्ट किया कि प्रत्येक बच्चे की सुरक्षा राजसमंद पुलिस की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने सभी बाल कल्याण पुलिस अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे बच्चों एवं किशोरों से संबंधित मामलों में अत्यंत संवेदनशीलता का परिचय दें। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि पुलिस को विद्यालय स्तर पर जाकर 'वत्सल वार्ता' के माध्यम से बच्चों में जागरूकता बढ़ानी चाहिए, ताकि एक फ्रेंडली वातावरण का निर्माण हो सके। बैठक में वर्तमान दौर की चुनौतियों पर विशेष चर्चा करते हुए साइबर अपराधों से बच्चों को सुरक्षित रखने के लिए प्रभावी जागरूकता कार्यक्रमों के संचालन पर बल दिया गया।
बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष कोमल पालीवाल ने समिति की कार्यप्रणाली को विस्तार से समझाते हुए अधिकारियों को बच्चों से जुड़े मामलों में निर्धारित प्रपत्रों के सही उपयोग के निर्देश दिए। उन्होंने पॉक्सो अधिनियम से संबंधित मामलों की सूचना अनिवार्य रूप से 24 घंटे के भीतर समिति को प्रेषित करने का कड़ा आग्रह किया। इस अवसर पर बाल अधिकारिता विभाग के सहायक निदेशक दीपेन्द्र सिंह ने किशोर न्याय अधिनियम के प्रभावी कार्यान्वयन, बच्चों के कल्याणार्थ संचालित सरकारी योजनाओं और कार्यक्रमों पर प्रकाश डाला। बैठक में सहभागी बने बाल कल्याण पुलिस अधिकारियों ने अपने अनुभव साझा किए और कानूनी जटिलताओं पर आधारित प्रश्नों के माध्यम से अपनी जिज्ञासाओं का समाधान किया। यह बैठक बाल संरक्षण के प्रति पुलिस प्रशासन की प्रतिबद्धता और अंतर-विभागीय समन्वय को सुदृढ़ करने की दिशा में एक प्रभावी कदम साबित हुई।

