राजसमंद। तहसील एवं जिला राजसमंद के अंतर्गत गांव कनावदा, पंचायत मादड़ी देवस्थान में आयोजित डोल (गैर-नृत्य) कार्यक्रम के दौरान गांव की चौपाल पर उपस्थित किसानों और अन्य ग्रामीणों से प्रकृति-मानव हितकारी व्यवस्था बनाने के बारे में विस्तार से बातचीत की गई। इस महत्वपूर्ण सभा में वैश्विक संकटों पर चिंता व्यक्त करते हुए ग्लोबल वार्मिंग, जलवायु परिवर्तन और ईरान-अमेरिका युद्ध को तत्काल रोकने की पुरजोर अपील की गई।

रसायनिक खेती के दुष्प्रभाव और प्राकृतिक खेती का आह्वान

चौपाल पर जुटी जनसभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने रसायनिक खेती के दुष्प्रभाव और प्राकृतिक खेती को युद्ध स्तर पर लागू करने की आवश्यकता पर बल दिया। इस दौरान जंगल व अन्य प्राकृतिक संसाधनों को बचाने आदि के बारे में ग्रामीणों को जागरूक किया गया। बैठक में उपस्थित ग्रामीणों को "दुनिया के लोगों एक हो", "प्राकृतिक खेती को युद्ध स्तर पर लागू करने" तथा "पर्यावरण और मानवता बचाने" से संबंधित अपील तथा "क्या धरती पर जीवन बचेगा" वाले पर्चे वितरित किए गए।

समस्याओं के समाधान हेतु कमेटी बनाने का निर्णय

प्रकृति और मानवता के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए ग्रामीणों ने एकजुटता दिखाई। इस विमर्श के दौरान अगली मीटिंग में सिंचाई के साधनों की कमी व अन्य समस्याओं के समाधान पर कार्य करने के लिए एक कमेटी बनाने का निर्णय लिया गया। प्रकृति-मानव केंद्रित जन अभियान के सोहन लाल रेगर तथा विजयेंद्र प्रकाश, प्रकाश चंद्र बोहरा और देवकृष्ण ने अपने विचार रखे और प्रकृति-मानव हितकारी व्यवस्था बनाने पर जोर दिया।

प्रबुद्धजनों की गरिमामयी उपस्थिति

इस सामाजिक एवं पर्यावरण संरक्षण बैठक में खुमान सिंह राव, हिम्मत सिंह राठौड़, डालचंद मेघवाल, कलाजी रेबारी सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में सभी ने एक स्वर में कहा कि "प्राकृतिक खेती को युद्ध स्तर पर लागू करना और पर्यावरण व मानवता को बचाना आज के समय की सबसे बड़ी मांग है।"

Pratahkal Bureau

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