राजसमंद। राजसमंद जिले के रासबन क्षेत्र में नेशनल हाईवे पर दिन-रात सरपट दौड़ रहे ओवरलोड वाहन प्रशासन और परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवालिया निशान लगा रहे हैं। परिवहन विभाग भले ही समय-समय पर चालान काटने और सख्त कार्रवाई करने के बड़े-बड़े दावे पेश करता हो, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोलने के लिए पर्याप्त है। आलम यह है कि नियमों को ताक पर रखकर बेखौफ संचालित हो रहे ये वाहन अब आम जनता के लिए काल का पर्याय बनते जा रहे हैं।

प्राप्त जानकारी के मुताबिक, जैसे ही सूरज ढलता है और रात का अंधेरा छाता है, नेशनल हाईवे भारी-भरकम ट्रकों और डंपरों की अनियंत्रित रफ्तार का गवाह बन जाता है। इन वाहनों में निर्धारित क्षमता से कई गुना अधिक माल लदा होता है। यह ओवरलोडिंग न केवल करोड़ों की लागत से निर्मित सड़कों को समय से पहले क्षतिग्रस्त कर रही है, बल्कि हाईवे पर चलने वाले अन्य राहगीरों की जान को भी सीधे तौर पर खतरे में डाल रही है।

स्थानीय निवासियों का आक्रोश चरम पर है; उनका कहना है कि यह अवैध सिलसिला काफी लंबे समय से बदस्तूर जारी है। रात के समय इन खतरनाक वाहनों पर प्रभावी निगरानी रखने वाला कोई नहीं होता, जिससे संचालकों के हौसले बुलंद हैं। ग्रामीणों द्वारा बार-बार शिकायतें दर्ज कराने के बावजूद स्थिति में कोई सुधार नहीं आया है। यद्यपि विभाग समय-समय पर कार्रवाई की बात स्वीकारता है, किंतु हाईवे की वर्तमान स्थिति इन दावों को हवा-हवाई साबित कर रही है। अब जनमानस में सबसे बड़ा सवाल यही कौंध रहा है कि क्या जिम्मेदार विभाग किसी बड़े हादसे के इंतजार में हाथ पर हाथ धरे बैठा है या इन मौत के सौदागरों पर कभी नकेल कसी जाएगी।

Ruturaj Ravan

Ruturaj Ravan

यह प्रातःकाल मल्टीमीडिया में वेबसाइट मैनेजर और सोशल मीडिया एक्जीक्यूटिव के रूप में कार्यरत हैं, और पिछले तीन वर्षों से पत्रकारिता व डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इससे पूर्व उन्होंने दैनिक प्रहार में वेबसाइट प्रबंधन और सोशल मीडिया के लिए रचनात्मक कंटेंट निर्माण और रणनीतियों में अनुभव अर्जित किया। इन्होंने कोल्हापुर के छत्रपति शिवाजी महाराज विश्वविद्यालय से स्नातक और हैदराबाद के सत्या इंस्टीट्यूट से उच्च शिक्षा पूरी की। इन्हें SEO मैनेजमेंट, सोशल मीडिया और उससे संबंधित रणनीतियाँ तैयार करने में व्यापक अनुभव है।

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