राजसमंद: जिला कलक्टर आवास पर गूंजी मुनिश्री की ओजस्वी वाणी, शांति और संस्कारों का दिया संदेश
राजसमंद में जिला कलक्टर अरुण कुमार हसीजा के आवास पर जैन मुनि श्री संबोध कुमार का आध्यात्मिक प्रवचन आयोजित हुआ। मुनिश्री ने जिले में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए कलक्टर की कार्यशैली को सराहा और युवाओं को सोशल मीडिया उपवास व संस्कारों का संदेश दिया। इस अवसर पर सर्वाइकल कैंसर जांच शिविर के पोस्टर का विमोचन भी किया गया, जिसमें प्रशासनिक अधिकारियों और जैन समाज के प्रमुख लोगों ने भाग लिया।

राजसमंद। आध्यात्मिक ऊर्जा और प्रशासनिक संवेदनशीलता के संगम का एक अनूठा दृश्य रविवार सुबह जिला कलक्टर आवास पर देखने को मिला। जैन मुनि श्री संबोध कुमार जब जिला कलक्टर अरुण कुमार हसीजा के राजकीय निवास पहुंचे, तो वातावरण न केवल भक्तिमय हो गया, बल्कि वहां उपस्थित जनसमूह को जीवन मूल्यों की एक नई दिशा भी मिली। मुनिश्री ने अपनी ओजस्वी और मधुर वाणी से आत्मचिंतन का आह्वान करते हुए सेवा, सद्भाव और अहिंसा को आधुनिक जीवन का मूल आधार बताया। इस गरिमामय अवसर पर जिला कलक्टर अरुण कुमार हसीजा ने सपरिवार मुनिश्री का भव्य स्वागत किया, जिसमें विभिन्न विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी और जैन समाज के प्रबुद्ध नागरिक भी साक्षी बने।
आयोजन की शुरुआत में मुनि श्री संबोध कुमार ने जिले की कानून व्यवस्था और हालिया घटनाक्रमों के दौरान जिला कलक्टर अरुण कुमार हसीजा द्वारा दिखाई गई प्रशासनिक कुशलता की मुक्त कंठ से सराहना की। उन्होंने कहा कि विपरीत परिस्थितियों में भी संयम बनाए रखना और सबको साथ लेकर शांति स्थापित करना एक उत्कृष्ट कार्यशैली का परिचायक है, जिसे राजसमंद की जनता सदैव याद रखेगी। जैन दर्शन के सिद्धांतों पर प्रकाश डालते हुए मुनिश्री ने स्पष्ट किया कि अहिंसा केवल शारीरिक क्रिया नहीं है, बल्कि हमारे आचरण से किसी की भावनाओं को ठेस न पहुंचना ही वास्तविक अहिंसा है। उन्होंने कहा कि सफलता का पैमाना भौतिक उपलब्धियां नहीं, बल्कि हमारी संवेदनशीलता और सह-अस्तित्व की भावना होनी चाहिए।
प्रवचन के दौरान मुनिश्री ने नई पीढ़ी के भविष्य को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने अभिभावकों को चेताते हुए कहा कि संस्कारों का निर्माण परिवार की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। वर्तमान समय में सोशल मीडिया की गिरफ्त में फंसी युवा पीढ़ी को उन्होंने 'सोशल मीडिया उपवास' करने की अनूठी सलाह दी। उन्होंने बताया कि निरंतर स्क्रीन से चिपके रहने के कारण युवाओं में एकाग्रता और आत्मचिंतन की शक्ति कम हो रही है। तनाव मुक्ति का व्यावहारिक समाधान बताते हुए उन्होंने दिन में पांच बार साठ सेकंड तक श्वसन रोकने के अभ्यास का महत्व समझाया, जिससे मानसिक शांति प्राप्त की जा सकती है। मुनिश्री ने जोर देकर कहा कि जीवन का प्रत्येक कार्य जनहित की भावना से प्रेरित होना चाहिए और सेवा को केवल विशेष अवसरों तक सीमित न रखकर जीवन की निरंतर प्रक्रिया बनाना चाहिए।
कार्यक्रम के अंत में एक महत्वपूर्ण सामाजिक पहल का भी आगाज़ हुआ। अखिल भारतीय तेरापंथ महिला मण्डल के तत्वावधान में आगामी 4 फरवरी को आयोजित होने वाले सर्वाइकल कैंसर जांच शिविर के पोस्टर का विमोचन मुनिश्री के सानिध्य में जिला कलक्टर और उनकी धर्मपत्नी द्वारा किया गया। इस आध्यात्मिक सभा में जिला परिषद सीईओ बृजमोहन बैरवा, मेवाड़ तेरापंथ कॉन्फ्रेंस के कार्यवाहक अध्यक्ष भूपेन्द्र चोरडिया, तेरापंथ सभा कांकरोली अध्यक्ष लाभचन्द बोहरा, भिक्षु बोधि स्थान राजनगर अध्यक्ष हर्षलाल नवलखा, कार्यकारी अध्यक्ष शांतिलाल कोठारी, राजकुमार दक सहित कई गणमान्य जनों ने अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम का सफल संचालन राजकुमार दक ने किया। मुनिश्री के इन विचारों ने उपस्थित जनसमूह को सकारात्मक ऊर्जा से भर दिया, जिससे समाज में एक शांतिपूर्ण और संस्कारवान वातावरण के निर्माण की नई उम्मीद जगी है।

Pratahkal Bureau
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