राजसमंद जन विकास संस्थान का 23वां स्थापना दिवस: नारी अदालत के कार्यों पर चर्चा
कार्यक्रम में महिला हिंसा के खिलाफ नारी अदालत की भूमिका और दो दशकों के संघर्ष पर मंथन किया गया।

राजसमंद। राजसमंद जन विकास संस्थान का 23वां स्थापना दिवस मंगलवार को स्थानीय पंचायत सभागार, पुरानी कलेक्ट्रेट, राजनगर में अत्यंत हर्षोल्लास एवं सामाजिक प्रतिबद्धता के साथ संपन्न हुआ। इस वर्ष के आयोजन की मुख्य थीम 'महिला हिंसा के खिलाफ, न्याय के साथ-नारी अदालत' निर्धारित की गई थी, जिसके अंतर्गत महिला अधिकारों, न्याय प्रक्रिया एवं उनके सशक्तिकरण से जुड़े विभिन्न गंभीर विषयों पर विस्तृत संवाद किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में भारत भूषण ने शिरकत की, जिनकी उपस्थिति ने आयोजनों को वैचारिक गहराई प्रदान की।
इस गरिमापूर्ण अवसर पर अजमेर, अहमदाबाद, चित्तौड़गढ़, भीम एवं उदयपुर से पधारे विभिन्न सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों और प्रबुद्ध सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सक्रिय सहभागिता निभाई। सभी उपस्थितजनों ने राजसमंद जन विकास संस्थान के दो दशकों से अधिक के सफर की सराहना करते हुए महिला न्याय एवं उनके अधिकारों की रक्षा के लिए भविष्य में और अधिक सशक्त सामूहिक प्रयासों का संकल्प लिया। संस्थान की निदेशक शकुन्तला पामेचा ने संस्थान एवं राजसमंद महिला मंच की संघर्षपूर्ण एवं प्रेरणादायी यात्रा का विवरण प्रस्तुत करते हुए बताया कि पिछले 20 वर्षों से निरंतर संचालित नारी अदालत के माध्यम से संस्थान ने महिला हिंसा, घरेलू प्रताड़ना, बाल विवाह, सामाजिक भेदभाव एवं महिलाओं के मौलिक अधिकारों से जुड़े हजारों जटिल मामलों में प्रभावी हस्तक्षेप कर उन्हें न्याय दिलाने की दिशा में सार्थक प्रयास किए हैं।
मुख्य अतिथि भारत भूषण ने अपने संबोधन में कहा कि महिलाओं को न्याय सुलभ कराने में सामुदायिक संस्थाओं एवं नारी अदालत जैसी पहल की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है, जो समाज में बदलाव का आधार बनती हैं। कार्यक्रम के दौरान सामाजिक कार्यकर्ताओं और संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने महिला हिंसा के विरुद्ध सामूहिक संघर्ष, समुदाय आधारित न्याय प्रक्रिया और महिला नेतृत्व को मजबूती प्रदान करने की आवश्यकता पर अपने विचार साझा किए। कार्यक्रम के समापन पर संस्थान द्वारा सभी अतिथियों, सहयोगी संगठनों, प्रशासनिक अधिकारियों, मीडिया कर्मियों एवं स्थानीय समुदाय के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की गई। यह आयोजन न केवल संस्थान की उपलब्धियों का प्रतीक रहा, बल्कि महिला न्याय के क्षेत्र में एक नई दिशा और दृढ़ संकल्प का सूत्रपात भी बनकर उभरा।

