राजसमंद जिले के रेलमगरा क्षेत्र स्थित हिन्दुस्तान जिंक लिमिटेड के डीएससीसी लेड प्लांट, दरीबा में वर्षों तक कार्य कर चुके स्वैच्छिक सेवानिवृत्त मजदूरों ने अपने अधिकारों की बहाली को लेकर संघर्ष तेज कर दिया है। फिंगर ब्लॉक हटाने, स्वास्थ्य संबंधी मामलों की निष्पक्ष जांच कराने और रोजगार का अधिकार बहाल करने की मांग को लेकर श्रमिक पिछले दो दिनों से प्लांट के बाहर शांतिपूर्वक धरने पर बैठे हैं। तेज गर्मी के बावजूद मजदूर धरनास्थल पर डटे हुए हैं।

श्रमिकों ने सांसद सहित विभिन्न अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर अपनी समस्याओं से अवगत कराया। ज्ञापन में बताया गया कि वे करीब 12 वर्षों तक मोनोमार्क एवं बीएसएस कंपनी के माध्यम से डीएससीसी लेड प्लांट में कार्यरत रहे। इस दौरान प्लांट में काम करने वाले मजदूरों के शरीर पर लेड और अन्य जहरीली धातुओं का गंभीर दुष्प्रभाव पड़ा, जिससे कई श्रमिक शारीरिक और मानसिक परेशानियों का शिकार हो गए।

मजदूरों का आरोप है कि कंपनी द्वारा कराई गई मेडिकल रिपोर्ट में सही जानकारी नहीं दी गई, जबकि बाहरी जांच में लेड और कैडमियम जैसी जहरीली धातुओं की पुष्टि हुई। श्रमिकों ने आरोप लगाया कि जब उन्होंने मुआवजे की मांग उठाई तो उन पर दबाव बनाकर वीआरएस योजना में शामिल किया गया। वर्ष 2021 से 2022 के बीच करीब 350 मजदूरों को स्वैच्छिक सेवा निवृत्ति दे दी गई, लेकिन इसके बाद भी उनका “फिंगर ब्लॉक” बंद नहीं किया गया।

धरने पर बैठे श्रमिकों का कहना है कि फिंगर ऑन होने के कारण उन्हें अन्य कंपनियों में रोजगार नहीं मिल पा रहा है, जिससे उनके परिवार आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। मजदूरों ने यह भी आरोप लगाया कि कई श्रमिकों की हालत अत्यंत दयनीय हो चुकी है तथा कुछ साथियों की साइड इफेक्ट के कारण मौत भी हो चुकी है। उन्होंने कंपनी प्रबंधन और संबंधित अधिकारियों पर जांच दबाने तथा गलत तरीके से दस्तावेज तैयार करने के आरोप लगाए हैं।

धरनास्थल पर मौजूद श्रमिक उदय सिंह, पप्पू गाडरी, बंशीलाल रेगर सहित अन्य मजदूरों ने फिंगर ब्लॉक हटाने, स्वैच्छिक सेवा निवृत्ति प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच कराने, प्रभावित मजदूरों को मुआवजा दिलाने तथा प्रदूषण से प्रभावित भूमि के सुधार की मांग उठाई है।

श्रमिकों का आरोप है कि अब तक ना तो कोई प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचा है और ना ही जिंक प्रबंधन एवं यूनियन की ओर से कोई सकारात्मक पहल की गई है। ऐसे में डीएससीसी लेड प्लांट के बाहर जारी यह धरना अब श्रमिकों के स्वास्थ्य, रोजगार और न्याय की लड़ाई का बड़ा प्रतीक बनता जा रहा है।

Pratahkal Bureau

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