राजसमंद: फर्जी डॉक्टर के इलाज से बुजुर्ग की मौत, स्वास्थ्य विभाग पर उठे सवाल
केलवा में बिना डिग्री के इलाज करने वाले फार्मेसी छात्र के क्लिनिक पर बुजुर्ग ने दम तोड़ा, स्वास्थ्य विभाग की मॉनिटरिंग पर उठ रहे बड़े सवाल।

केलवा थाना क्षेत्र में सरकार मेडिकल क्लिनिक पर फर्जी इलाज के दौरान हुई कन्नाराम मीणा की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग ने जांच शुरू की है।
राजसमंद जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था एक बार फिर प्रशासनिक लापरवाही और फर्जी डॉक्टरों की मनमानी के कारण सवालों के घेरे में है। केलवा थाना क्षेत्र के ग्राम पंचायत पसुन्द में झोलाछाप चिकित्सक द्वारा किए गए उपचार के उपरांत 63 वर्षीय कन्नाराम मीणा की दुखद मृत्यु ने स्थानीय निवासियों में आक्रोश भर दिया है। यह घटना न केवल स्वास्थ्य विभाग की लचर मॉनिटरिंग को उजागर करती है, बल्कि जिला चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) कार्यालय की कार्यशैली पर भी गहरे प्रश्नचिह्न लगाती है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, कन्नाराम मीणा अस्थमा की समस्या से ग्रसित थे और इलाज के लिए ग्राम पंचायत पसुन्द स्थित "सरकार मेडिकल" नामक क्लिनिक पहुंचे थे। वहां अनिल सरकार नामक युवक ने उपचार करते हुए उन्हें सलाइन (बोतल) चढ़ाई। बोतल चढ़ने के कुछ ही समय बाद उनकी स्थिति गंभीर हो गई, जिसके बाद उन्हें आनन-फानन में केलवा सरकारी अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि उपचार करने वाला अनिल सरकार कोई पंजीकृत चिकित्सक नहीं है, बल्कि वह नाथद्वारा के एक कॉलेज में फार्मेसी का छात्र बताया जा रहा है। एक अप्रशिक्षित व्यक्ति द्वारा मरीजों के जीवन से किया जा रहा यह खिलवाड़ विभाग की निगरानी प्रणाली की विफलता को स्पष्ट करता है।
ग्रामीणों का आरोप है कि जिले में लंबे समय से बिना वैध डिग्री और अनुमति के कई क्लिनिक धड़ल्ले से संचालित हो रहे हैं, परंतु स्वास्थ्य विभाग कार्रवाई के नाम पर मात्र औपचारिकताएं पूरी करता है। नियमतः निजी चिकित्सालय एवं क्लीनिकल संस्थानों से जुड़े प्रावधानों के तहत ऐसे संस्थानों पर तत्काल सीलिंग, कानूनी मुकदमा और गिरफ्तारी की कार्रवाई अपेक्षित है, किंतु विभागीय चुप्पी ने व्यवस्था को संदेहास्पद बना दिया है। इस बीच, यह भी चर्चा है कि कुछ प्रभावशाली राजनीतिक लोगों ने मृतक के परिवार से संपर्क कर तीन लाख रुपये के मुआवजे का समझौता करने का प्रयास किया है, जिसने मामले की गंभीरता को और अधिक बढ़ा दिया है।
लगातार सामने आ रहे ऐसे मामले यह सोचने पर मजबूर करते हैं कि क्या जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था को प्रशासनिक सुधार और नए नेतृत्व की आवश्यकता है? क्या विभागीय अधिकारियों की ढिलाई और कथित राजनीतिक संरक्षण के कारण अनधिकृत क्लिनिक फल-फूल रहे हैं? अब जनमानस की दृष्टि प्रशासन के अगले कदम पर टिकी है कि क्या वे केवल जांच की घोषणा तक सीमित रहेंगे या जिलेभर में चल रहे अवैध क्लिनिकों के विरुद्ध कठोर दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करेंगे।

Rahul Acharya, Rajsamand
नाम: राहुल आचार्य
वर्तमान पद: संवाददाता
कार्यक्षेत्र: राजसमंद (राजस्थान)
बीट (मुख्य विषय): प्रशासन, शिक्षा, स्वास्थ्य, क्राइम (अपराध) और बेसिक जनरल खबरें
परिचय
राहुल आचार्य राजसमंद क्षेत्र के संवाददाता हैं। वह मुख्य रूप से स्थानीय प्रशासन, शिक्षा, स्वास्थ्य व्यवस्था, अस्पताल, पुलिस कार्रवाई, अपराध और क्षेत्र से जुड़ी सभी बुनियादी सामान्य खबरों (बेसिक जनरल न्यूज) की नियमित ग्राउंड रिपोर्टिंग करते हैं।
पत्रकारिता का अनुभव
राहुल आचार्य को मीडिया क्षेत्र का व्यावहारिक अनुभव है। वह इंडिया न्यूज़ (India News) चैनल के साथ 1 साल का कार्यकाल पूरा कर चुके हैं और वर्तमान में 'प्रातःकाल' के साथ जुड़कर राजसमंद क्षेत्र में सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं।
शैक्षणिक योग्यता (Education)
उन्होंने अपनी शिक्षा में स्नातक (Graduation) की डिग्री हासिल की है।
