पुरुषोत्तम मास के तीसरे दिन राजभोग और शयन दर्शन में प्रभु द्वारकाधीश के अलौकिक श्रृंगार और हाथी सवारी झांकी का भक्तों ने लाभ लिया।

राजसमंद। पुरुषोत्तम मास के पावन अवसर पर कांकरोली स्थित पुष्टिमार्गीय तृतीय पीठ प्रभु द्वारकाधीश के मंदिर में भक्ति का अद्भुत ज्वार देखने को मिला। पुरुषोत्तम मास के तीसरे दिन प्रभु के राजभोग दर्शन के दौरान मंदिर को कांच के बंगले की भव्य सजावट से अलंकृत किया गया, जिसकी छटा देखते ही बनती थी। वहीं, शयन दर्शन में प्रभु द्वारकाधीश को गणगौर सवारी के रूप में हाथी पर विराजमान कर भव्य झांकी सजाई गई, जिसने भक्तों को भाव-विभोर कर दिया।

प्रभु के अलौकिक श्रृंगार की छटा देखते ही बनती थी। श्रृंगार दर्शन के दौरान प्रभु को मस्तक पर चुंदड़ी की बाती पाग और तापे पर लुभ तुर्रा सुशोभित कराया गया। प्रभु ने चुंदड़ी का घेरदार वाघा धारण किया था। उनके श्रृंगार में वैसी ही सूजन और वैसे ही अंतरवास का पटका सम्मिलित था, साथ ही हरे कटि का पटका, हीरों से जड़ित आभरण, चार कर्ण, फूल, हरे ठाडे वस्त्र और माला फोंदा आदि के माध्यम से प्रभु का स्वरूप अत्यंत दिव्य और मनोहारी लग रहा था। रतन चौक में गणगौर सवारी के लिए विशेष सजावट की गई थी, जो श्रद्धालुओं के आकर्षण का मुख्य केंद्र रही। शयन की आरती गोस्वामी संजीव महाराज द्वारा संपन्न कराई गई, जिसमें बड़ी संख्या में उपस्थित वैष्णवजन प्रभु की भक्ति में सराबोर नजर आए। यह आयोजन परंपरा और आस्था के अनूठे मेल को दर्शाता है, जिसने पूरे मंदिर परिसर को एक आध्यात्मिक ऊर्जा से ओत-प्रोत कर दिया।

Pratahkal HQ

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