राजसमंद: तलाई में डिजिटल क्रॉप सर्वे का शंखनाद, अब किसान स्वयं मोबाइल से करेंगे अपनी फसलों की गिरदावरी
राजसमंद के पटवार मंडल तलाई में रबी फसल की डिजिटल क्रॉप सर्वे (DCS) गिरदावरी का कार्य युद्ध स्तर पर शुरू हो गया है। पटवारी राजेश कुमार रेगर ने किसानों को खेतों में जाकर मोबाइल से ऑनलाइन गिरदावरी करने का प्रशिक्षण दिया। MSP पर फसल बेचने और सरकारी योजनाओं का लाभ पाने के लिए 15 मार्च तक फसल पंजीकरण अनिवार्य है। जानिए डिजिटल गिरदावरी की पूरी प्रक्रिया और इसका महत्व।

राजसमंद। आधुनिक तकनीक और कृषि प्रबंधन के संगम से अब काश्तकारों की राह सुगम होने जा रही है। राजसमंद जिले के पटवार मंडल तलाई में रबी की फसल के लिए डिजिटल क्रॉप सर्वे (DCS) गिरदावरी का विधिवत आगाज़ हो गया है। तकनीक के इस नए युग में किसानों को सशक्त बनाने के उद्देश्य से पटवारी राजेश कुमार रेगर ने स्वयं खेतों की मेड़ पर उतरकर किसानों को इस डिजिटल प्रक्रिया का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया। यह पहल न केवल पारदर्शिता लाएगी, बल्कि भविष्य में सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए आधार स्तंभ साबित होगी।
पटवार मंडल तलाई, जो अपनी 4097 खसरा नंबरों की विस्तृत कृषि भूमि के लिए जाना जाता है, वहां सिंचाई का मुख्य स्रोत खातेदारी कुएं हैं। इन कुओं के माध्यम से सिंचित होने वाली फसलों की हर सूक्ष्म जानकारी अब सीधे ऑनलाइन पोर्टल पर दर्ज की जा रही है। प्रशिक्षण के दौरान पटवारी राजेश कुमार रेगर ने किसानों को बताया कि डिजिटल गिरदावरी की प्रक्रिया अत्यंत सटीक है। इसमें सबसे पहले संबंधित खेत पर पहुंचकर मोबाइल के माध्यम से लाइव लोकेशन (GPS) ली जाती है। इसके पश्चात बोई गई फसल का नाम और उसका रकबा हेक्टेयर में दर्ज करना अनिवार्य है। प्रक्रिया को पुख्ता करने के लिए फसल की लाइव फोटो अपलोड की जाती है और सिंचाई के साधनों का विवरण भरा जाता है। इन सभी चरणों के पूर्ण होने पर ही उस खेत का पंजीकरण सफल माना जाता है।
इस मुहिम का सबसे महत्वपूर्ण कानूनी और आर्थिक पहलू यह है कि यदि किसान की फसल गिरदावरी में दर्ज नहीं है, तो वह अपनी उपज को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर सरकारी मंडियों में नहीं बेच पाएगा। पटवारी रेगर ने जोर देते हुए कहा कि फसल खराबे की स्थिति में मिलने वाला मुआवजा हो या अन्य कृषि कल्याणकारी योजनाएं, इन सभी का लाभ केवल उन्हीं किसानों को मिलेगा जिनकी गिरदावरी ऑनलाइन अपडेट होगी। वर्तमान में तलाई क्षेत्र के अधिकांश खेतों में गेहूं और जौ की फसल लहलहा रही है, जिन्हें डिजिटल रिकॉर्ड में दर्ज किया जा रहा है। राज्य सरकार के निर्देशानुसार, इस रबी सीजन की डिजिटल गिरदावरी की समय सीमा 1 जनवरी से 15 मार्च तक निर्धारित की गई है। किसानों में इस नई व्यवस्था को लेकर भारी उत्साह देखा जा रहा है क्योंकि अब उनके पास अपनी मेहनत का डिजिटल प्रमाण स्वयं के हाथों में होगा।

Pratahkal Bureau
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