राजसमंद। जिले की संपूर्ण शिक्षा व्यवस्था की निगरानी और संचालन का केंद्र माना जाने वाला सबसे महत्वपूर्ण सरकारी दफ्तर, जिला शिक्षा अधिकारी (माध्यमिक व प्राथमिक) का मुख्य कार्यालय, वर्तमान में स्वयं अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने का जिम्मा उठाने वाली यह महत्वपूर्ण इकाई आज जर्जर भवन के कारण किसी बड़े हादसे को खुला निमंत्रण दे रही है, किंतु विभागीय जिम्मेदार इस गंभीर स्थिति से पूरी तरह आंखें मूंदे बैठे हैं।

करीब 20 से 25 साल पुरानी इस बिल्डिंग की स्थिति इतनी भयावह हो चुकी है कि दीवारों का प्लास्टर जगह-जगह से झड़ रहा है और छतों की संरचना पूरी तरह कमजोर होकर ढहने के कगार पर पहुंच गई है। कार्यालय में कार्यरत कर्मचारी प्रतिदिन डर के साए में अपनी सेवाएं देने को मजबूर हैं। विडंबना यह है कि मामला "अपने ही विभाग" का होने के कारण कोई भी कर्मचारी खुलकर विरोध दर्ज कराने का साहस नहीं जुटा पा रहा है।

प्रशासनिक लापरवाही का यह आलम तब है जब यही विभाग जिले भर के विद्यालयों की सुरक्षा, आधारभूत ढांचे और हजारों बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करने का दावा करता है। सूत्रों की मानें तो अंदरूनी स्तर पर कई बार भवन की इस जर्जर अवस्था को लेकर गंभीर चिंताएं व्यक्त की गई हैं, लेकिन उच्चाधिकारियों द्वारा हर बार इन चेतावनियों को या तो अनसुना कर दिया गया या फिर फाइलों में दबा दिया गया। कैमरे के समक्ष किसी भी अधिकारी की बोलने की हिम्मत न होना स्पष्ट करता है कि विभाग अपनी विफलता को छिपाने का प्रयास कर रहा है।

यदि समय रहते इस भवन की सुध नहीं ली गई या वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित नहीं की गई, तो भविष्य में होने वाले किसी भी जानलेवा हादसे की जवाबदेही तय करना मुश्किल होगा। वर्तमान परिदृश्य प्रशासन की कार्यप्रणाली पर यह यक्ष प्रश्न खड़ा करता है कि क्या सरकार किसी बड़ी जनहानि का इंतजार कर रही है या फिर वक्त रहते इस चरमराती व्यवस्था में सुधार किया जाएगा।

Pratahkal HQ

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