राजसमंद। महिला आरक्षण के मुद्दे को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है, जहाँ कांग्रेस ने भारतीय जनता पार्टी पर झूठ और भ्रम फैलाने का गंभीर आरोप जड़ते हुए चौतरफा हमला बोला है। राजसमंद जिले के कांकरोली में आयोजित एक महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कांग्रेस जिलाध्यक्ष आदित्य प्रताप सिंह और बूंदी जिला प्रमुख चंद्रावती कुंवर ने स्पष्ट किया कि भाजपा इस संवेदनशील विषय पर केवल राजनीति कर रही है, जबकि महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में कांग्रेस का इतिहास सदैव गौरवशाली और निर्णायक रहा है।

कांग्रेस नेताओं ने ऐतिहासिक तथ्यों को रेखांकित करते हुए याद दिलाया कि वर्ष 1992 में पंचायती राज और नगरीय निकायों में 33% आरक्षण की क्रांतिकारी व्यवस्था कांग्रेस सरकार ने ही लागू की थी। इसके उपरांत, वर्ष 2010 में महिला आरक्षण बिल को राज्यसभा से पारित करवाकर कांग्रेस ने अपनी प्रतिबद्धता सिद्ध की थी। वर्तमान केंद्र सरकार की कार्यप्रणाली पर तीखे प्रहार करते हुए पार्टी ने कहा कि वर्ष 2023 में पारित 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' को तत्काल प्रभावी बनाने के स्थान पर भाजपा ने इसे जनगणना और परिसीमन की जटिल शर्तों के साथ जोड़कर ठंडे बस्ते में डाल दिया है। कांग्रेस ने कड़ा सवाल खड़ा किया कि आखिर तीन साल के लंबे अंतराल के बाद 2026 में इसका नोटिफिकेशन क्यों जारी किया गया।

प्रेस वार्ता के दौरान कांग्रेस ने पुरजोर मांग रखी कि महिला आरक्षण को बिना किसी शर्त के अविलंब लागू किया जाना चाहिए और इसे वर्तमान लोकसभा सीटों के आधार पर ही प्रभावी बनाया जाए। भाजपा पर दोहरे मापदंड का आरोप लगाते हुए जिलाध्यक्ष आदित्य प्रताप सिंह और जिला प्रमुख चंद्रावती कुंवर ने कहा कि संगठन स्तर और टिकट वितरण में भी महिलाओं को उचित प्रतिनिधित्व नहीं मिल रहा है। कांग्रेस ने संकल्प दोहराया कि महिला आरक्षण महिलाओं का संवैधानिक अधिकार है और इसे धरातल पर उतारने के लिए पार्टी सड़क से लेकर संसद तक अपना संघर्ष निरंतर जारी रखेगी।

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Pratahkal Newsroom

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