राजसमंद/जयपुर: प्रशासनिक दक्षता जब दूरदर्शी नेतृत्व और मानवीय संवेदनाओं के साथ मिलती है, तो वह केवल फाइलों तक सीमित न रहकर एक ऐतिहासिक दस्तावेज बन जाती है। राजसमंद जिला कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी श्री अरुण कुमार हसीजा ने अपनी अनूठी कार्यशैली से कुछ ऐसा ही कर दिखाया है। एसआईआर-2026 (विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण) की जटिल प्रक्रिया को न केवल समयबद्ध रूप से पूरा किया, बल्कि इसे सुशासन का एक ऐसा उदाहरण बना दिया जिसकी गूंज अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुनाई दे रही है। इस ऐतिहासिक सफलता के लिए 16वें राष्ट्रीय मतदाता दिवस के अवसर पर जयपुर स्थित राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित भव्य राज्य स्तरीय समारोह में महामहिम राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागडे ने कलेक्टर श्री हसीजा को सम्मानित किया। यह सम्मान महज एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि राजसमंद की प्रशासनिक प्रतिबद्धता और लोकतंत्र की मजबूती का प्रमाण है।

इस गरिमामयी समारोह में मुख्य सचिव श्री वी. श्रीनिवास और मुख्य निर्वाचन अधिकारी श्री नवीन महाजन सहित निर्वाचन विभाग के कई शीर्ष अधिकारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान यह रेखांकित किया गया कि कैसे कलेक्टर हसीजा ने एसआईआर-2026 के दौरान आने वाली अभूतपूर्व चुनौतियों को अपनी रणनीतिक सोच से अवसरों में बदल दिया। एसआईआर-2026 अभियान के समक्ष सीमित समय, अत्याधुनिक आईटी एप्लिकेशन का उपयोग और सबसे महत्वपूर्ण, वर्ष 2002 की 23 वर्ष पुरानी मतदाता सूची की वर्तमान डेटा के साथ मैपिंग जैसी कठिन चुनौतियां थीं। सामान्य परिस्थितियों में यह कार्य असंभव सा प्रतीत होता था, लेकिन कलेक्टर हसीजा की सूक्ष्म योजना और 'माइक्रो-मैनेजमेंट' ने इसे सुगम बना दिया। उनकी प्रशासनिक कुशलता का अनुमान इसी बात से लगाया जा सकता है कि एसआईआर की आधिकारिक शुरुआत से पूर्व ही उनके नेतृत्व में जिले ने लगभग 60 प्रतिशत मैपिंग कार्य पूरा कर लिया था।

सफलता की इस इमारत की नींव में कड़ी निगरानी और अनुशासन की अहम भूमिका रही। कलेक्टर हसीजा ने "वर्क नॉट रिव्यूड मीन्स नॉट डन" (समीक्षा नहीं की गई, मतलब कार्य नहीं हुआ) के सिद्धांत को मूलमंत्र बनाया। उन्होंने दिन में तीन बार जिला रैंकिंग जारी करने और प्रतिदिन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए समीक्षा करने की एक सख्त प्रणाली विकसित की, जिसके फलस्वरूप राजसमंद जिला पूरे अभियान के दौरान निरंतर उत्कृष्ट प्रदर्शन करता रहा। हालांकि, यह अभियान केवल आंकड़ों और तकनीक तक सीमित नहीं था। कलेक्टर हसीजा ने इसे जन-भावनाओं से जोड़कर लोकतंत्र के प्रति एक नई अलख जगाई। जब बीएलओ द्वारा मतदाताओं को वर्ष 2002 की पुरानी सूचियों में उनके परिजनों के नाम और तस्वीरें दिखाई गईं, तो कई लोगों की आंखें भर आईं। विशेषकर नवविवाहित महिलाओं और बुजुर्गों के लिए यह अतीत के झरोखे में झांकने जैसा भावुक अनुभव था, जिसने प्रशासन और जनता के बीच की दूरी को मिटा दिया।

इस मॉडल की सफलता अब राजसमंद या राजस्थान तक सीमित नहीं रही है, बल्कि इसने वैश्विक पटल पर भी अपनी पहचान बनाई है। हाल ही में नई दिल्ली में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में एसआईआर-2026 की इस प्रक्रिया को "ग्लोबल बेस्ट प्रैक्टिस" के रूप में मान्यता दी गई, जहाँ लगभग 70 देशों के प्रतिनिधियों ने राजसमंद प्रशासन की इस कार्यप्रणाली की सराहना की। सम्मान प्राप्त करने के उपरांत अपनी प्रतिक्रिया में कलेक्टर श्री अरुण कुमार हसीजा ने विनम्रतापूर्वक इस उपलब्धि का श्रेय अपनी पूरी निर्वाचन टीम को दिया। उन्होंने कहा कि बीएलओ, पर्यवेक्षक, मास्टर ट्रेनर्स, और तकनीकी कार्मिकों के समन्वय और टीम भावना के बिना यह कीर्तिमान स्थापित करना संभव नहीं था। राजसमंद जिला अब पारदर्शिता, नवाचार और जनहितकारी प्रशासन का एक सशक्त प्रतीक बनकर उभरा है, जो निस्संदेह अन्य जिलों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा।

Ruturaj Ravan

Ruturaj Ravan

यह प्रातःकाल मल्टीमीडिया में वेबसाइट मैनेजर और सोशल मीडिया एक्जीक्यूटिव के रूप में कार्यरत हैं, और पिछले तीन वर्षों से पत्रकारिता व डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इससे पूर्व उन्होंने दैनिक प्रहार में वेबसाइट प्रबंधन और सोशल मीडिया के लिए रचनात्मक कंटेंट निर्माण और रणनीतियों में अनुभव अर्जित किया। इन्होंने कोल्हापुर के छत्रपति शिवाजी महाराज विश्वविद्यालय से स्नातक और हैदराबाद के सत्या इंस्टीट्यूट से उच्च शिक्षा पूरी की। इन्हें SEO मैनेजमेंट, सोशल मीडिया और उससे संबंधित रणनीतियाँ तैयार करने में व्यापक अनुभव है।

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