राजसमंद: एंजल विंग्स हॉस्पिटल पर जनआधार के नाम पर अवैध वसूली का आरोप, बिना रसीद ₹5000 लेने का दावा
राजसमंद के एंजल विंग्स हॉस्पिटल पर जनआधार योजना के बावजूद मरीज मांगीलाल गुर्जर से ₹5000 की अवैध वसूली का आरोप लगा है। बिना रसीद नकदी लेने के इस मामले ने सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जानें क्या है पूरा मामला और अस्पताल प्रबंधन की इस पर सफाई।

राजसमंद। राजस्थान सरकार की महत्वाकांक्षी स्वास्थ्य योजनाओं के जरिए गरीबों को निःशुल्क उपचार उपलब्ध कराने के दावों के बीच राजसमंद से एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है। यहाँ के एक निजी अस्पताल, 'एंजल विंग्स हॉस्पिटल' पर सरकारी योजना के लाभ के बावजूद मरीज के परिजनों से अवैध रूप से नकदी वसूलने के गंभीर आरोप लगे हैं। यह मामला न केवल एक अस्पताल की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाता है, बल्कि स्वास्थ्य विभाग की निगरानी तंत्र की प्रभावशीलता को भी कटघरे में खड़ा करता है।
घटनाक्रम के अनुसार, कुंवारिया गाँव के निवासी मांगीलाल गुर्जर ने बताया कि उनके पिता के दाएं पैर में फ्रैक्चर होने के कारण उन्हें उपचार के लिए एंजल विंग्स हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। चूंकि परिवार के पास जनआधार कार्ड (पूर्व में भामाशाह) उपलब्ध था, जिसके तहत नियमानुसार इलाज पूरी तरह निःशुल्क होना चाहिए था, लेकिन आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन ने नियमों को ताक पर रखकर मांगीलाल से ₹5000 की नकद राशि जमा करवा ली। पीड़ित का कहना है कि अस्पताल द्वारा इतनी बड़ी राशि लेने के बावजूद उन्हें किसी भी प्रकार की आधिकारिक रसीद प्रदान नहीं की गई, जो सीधे तौर पर वित्तीय अनियमितता की ओर इशारा करता है।
मांगीलाल गुर्जर और उनके परिजनों का आरोप है कि प्रवेश के समय उन्हें सरकारी योजना के अंतर्गत पूर्ण लाभ देने का आश्वासन दिया गया था, किंतु उपचार की प्रक्रिया के दौरान उन पर अतिरिक्त भुगतान के लिए अनुचित दबाव बनाया गया। बिना रसीद के नकद वसूली ने पूरे मामले को संदिग्ध बना दिया है। स्थानीय निवासियों के बीच भी इस घटना को लेकर गहरा रोष है; उनका मानना है कि यदि ये आरोप सत्य हैं, तो यह सीधे तौर पर सरकारी योजनाओं का दुरुपयोग और असहाय मरीजों के साथ की गई धोखाधड़ी है।
इस पूरे प्रकरण पर जब एंजल विंग्स हॉस्पिटल प्रबंधन से पक्ष माँगा गया, तो उन्होंने इन तमाम आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि उनके द्वारा मरीज से किसी भी प्रकार की अतिरिक्त राशि नहीं ली गई है और लगाए गए सभी आरोप पूरी तरह निराधार एवं तथ्यहीन हैं।
फिलहाल, स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन की भूमिका अब जांच के दायरे में है। पीड़ित परिवार ने जिला कलेक्टर और संबंधित विभाग से मांग की है कि इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष एवं उच्च स्तरीय जांच की जाए ताकि दोषियों के विरुद्ध कठोर वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित हो सके। यह मामला इस बात की ओर भी संकेत करता है कि क्या निजी अस्पतालों में सरकारी योजनाओं के कार्यान्वयन की नियमित ऑडिटिंग हो रही है या गरीब मरीज इसी तरह शोषण का शिकार होते रहेंगे।

Pratahkal Bureau
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