राजसमंद। भक्ति, शक्ति और सेवा के संगम स्थल राजसमंद के संनवाड़ स्थित गौ रक्षक गौशाला संस्थान में इन दिनों श्रद्धा की अविरल गंगा बह रही है। संस्थान के तत्वावधान में आयोजित 'नानी बाई का मायरा' कथा के तीसरे दिन भक्ति का ऐसा अनूठा स्वरूप देखने को मिला, जहाँ श्रद्धालुओं ने न केवल कथा के मर्म को आत्मसात किया, बल्कि गौसेवा के संकल्प को तुलादान के माध्यम से साकार भी किया। कथावाचक भगवती कृष्ण महाराज की ओजस्वी वाणी ने नरसी मेहता के जीवन प्रसंगों को जीवंत कर पूरे परिसर को कृष्णमय बना दिया।

कथा के केंद्र में रहे भक्त शिरोमणि नरसी मेहता के प्रसंग को सुनाते हुए भगवती कृष्ण महाराज ने कहा कि जब भक्त पूरी तरह से भगवान पर आश्रित हो जाता है, तो स्वयं नारायण को उसकी लाज रखने के लिए धरती पर आना पड़ता है। उन्होंने भावपूर्ण व्याख्या करते हुए समझाया कि सच्ची भक्ति केवल मंदिर तक सीमित नहीं है, बल्कि मानव सेवा और विशेषकर गौसेवा ही धर्म का वास्तविक आधार है। महाराज के भजनों पर श्रद्धालु मंत्रमुग्ध होकर झूम उठे, जिससे गौशाला का पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर हो गया।

आयोजन का मुख्य आकर्षण विशेष 'तुलादान' रहा, जिसमें क्षेत्र के दानदाताओं और श्रद्धालुओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। इस तुलादान के माध्यम से एकत्रित हुई समस्त सामग्री और धन राशि को पूर्णतः गोवंश की सेवा में समर्पित कर दिया गया। गौशाला प्रबंधन ने इस पुनीत कार्य की सराहना करते हुए स्पष्ट किया कि इस दान का उपयोग निराश्रित गौवंश के लिए उत्तम चारा, चिकित्सा सुविधा और उनके संरक्षण के बुनियादी ढाँचे को सुदृढ़ करने में किया जाएगा। यह कदम न केवल धार्मिक महत्ता रखता है, बल्कि समाज में गौ-संरक्षण के प्रति एक सशक्त संदेश भी प्रसारित करता है।

संस्थान के अध्यक्ष शंभू लाल कुमावत एवं पुरुषोत्तम आमेटा ने कार्यक्रम की रूपरेखा स्पष्ट करते हुए बताया कि इन आयोजनों का मूल उद्देश्य जन-जागरूकता फैलाना और अपनी गौरवशाली संस्कृति को जीवंत रखना है। उन्होंने आगामी कार्यक्रमों की जानकारी देते हुए बताया कि कल यहाँ 'सुरभि महायज्ञ' का भव्य आयोजन होगा। इसके साथ ही, डीएमएफटी मद (DMFT Fund) से नवनिर्मित 'गौ आधारित प्रसाद गृह' का लोकार्पण भी किया जाएगा, जो क्षेत्र में गौ-उत्पादों को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा।

इस धार्मिक अनुष्ठान में नगर परिषद सभापति अशोक टांक सहित पार्षद प्रमोद, हेमंत रजक, मदन रजक और पोपट माली जैसे जन प्रतिनिधियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। साथ ही तारा बाई, मीरा बाई और सीमा सहित बड़ी संख्या में मातृशक्ति और गौ भक्तों ने कथा श्रवण कर पुण्य लाभ अर्जित किया। संनवाड़ की यह पावन धरा वर्तमान में न केवल कथा के माध्यम से ज्ञान का प्रसार कर रही है, बल्कि गौसेवा के माध्यम से सेवा का एक नया अध्याय लिख रही है, जिसका प्रभाव संपूर्ण राजसमंद जिले में महसूस किया जा रहा है।

Pratahkal Bureau

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