राजसमंद: बामन टुकड़ा की 16 बीघा बेशकीमती जमीन पर महाभारत; माफियाओं की नजर, आमने-सामने आए चार दावेदार
राजसमंद के बामन टुकड़ा में 16 बीघा सरकारी जमीन को लेकर भारी तनाव। लक्ष्मी नारायण गौशाला, मार्बल मंडी और भू-माफियाओं के बीच फंसे खसरा संख्या 1685 के विवाद ने लिया हिंसक रूप। मंत्री जोराराम कुमावत के हस्तक्षेप के बाद प्रशासन सख्त, जानें क्या है पूरा मामला और सरपंच पर क्यों लग रहे हैं गंभीर आरोप।

राजसमंद। राजस्थान के राजसमंद जिले की ग्राम पंचायत बामन टुकड़ा इन दिनों सुलगते हुए विवाद का केंद्र बन गई है। यहां स्थित 'बिला नाम' भूमि खसरा संख्या 1685, जो करीब 16 बीघा से अधिक के विशाल भूखंड में फैली है, अब सत्ता-संरक्षित दलालों और भूमि माफियाओं के खेल का अखाड़ा बन चुकी है। करोड़ों रुपये की इस बेशकीमती जमीन को लेकर छिड़ी जंग ने पूरे गांव को दो धड़ों में बांट दिया है, जिससे क्षेत्र में जबरदस्त तनाव और टकराव की स्थिति पैदा हो गई है।
इस विवाद की गहराई का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एक ही जमीन के लिए चार अलग-अलग दावेदार आमने-सामने खड़े हैं। जहां एक पक्ष इस भूमि को 'लक्ष्मी नारायण गौशाला' के लिए आवंटित कराने की जिद पर अड़ा है, वहीं दूसरा पक्ष इसे ट्रांसपोर्ट नगर या मार्बल मंडी में तब्दील करने की पैरवी कर रहा है। विवाद यहीं नहीं थमता; तीसरा पक्ष स्वयं को इस जमीन का वैधानिक मालिक बता रहा है, जबकि चौथा पक्ष लंबे समय से चले आ रहे अपने कब्जे का दावा ठोक रहा है। ग्रामीणों का स्पष्ट आरोप है कि इस जमीन के नीचे छिपे बहुमूल्य मिनरल्स ने इसे माफिया सिंडिकेट के लिए 'सोने की खान' बना दिया है, जिसके चलते इसे हथियाने की साजिशें रची जा रही हैं।
विवाद की आग तब और भड़की जब ग्रामीणों ने प्रशासन के सामने गंभीर आरोप लगाए कि जमीन पर लगे बेशकीमती पेड़-पौधों को गुपचुप तरीके से काटकर बेच दिया गया और स्थानीय प्रशासन को इसकी भनक तक नहीं लगने दी गई। वर्तमान सरपंच की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। ग्रामीणों का दावा है कि सरपंच ने इस भूमि को खुर्द-बुर्द करने की नीयत से गौशाला के नाम पर 'न्यायिक वाद' का एक बनावटी बहाना खड़ा किया है। ग्रामीणों का तर्क है कि यदि गौशाला के आवंटन में न्यायिक अड़चनें हैं, तो वही जमीन मार्बल मंडी के लिए आरक्षित करने की बात किस आधार पर की जा रही है? सरपंच की यह दोहरी नीति और संदिग्ध कार्यप्रणाली गांव में चर्चा का विषय बनी हुई है।
तनावपूर्ण माहौल को देखते हुए हाल ही में आयोजित ग्राम सभा को भारी पुलिस बल के साये में संपन्न कराना पड़ा। प्रशासन को अंदेशा था कि यह विवाद किसी भी क्षण हिंसक रूप अख्तियार कर सकता है। ग्राम सभा के दौरान गांव की करीब एक चौथाई आबादी ने सरपंच के फैसलों के खिलाफ मुखर होकर विरोध प्रदर्शन किया। दूसरी ओर, गौसेवकों ने अपना रुख स्पष्ट करते हुए ऐलान किया है कि वे लक्ष्मी नारायण गौशाला के लिए भूमि आवंटन करवाकर ही दम लेंगे, चाहे इसके लिए उन्हें कलेक्ट्री पर धरना देना पड़े या बड़ा आंदोलन छेड़ना पड़े।
मामले की गंभीरता को देखते हुए अब शासन और प्रशासन दोनों हरकत में आए हैं। गोपालन मंत्री जोराराम कुमावत ने स्वयं राजसमंद जिला कलेक्टर से फोन पर वार्ता कर इस पूरे प्रकरण का त्वरित निस्तारण करने के सख्त निर्देश दिए हैं। जिला कलेक्टर ने भी लक्ष्मी नारायण गौशाला सेवा समिति के भूमि आवंटन मामले में ग्राम पंचायत के ढुलमुल रवैये पर नाराजगी जताते हुए कड़ा रुख अपनाया है। हालांकि, इस महत्वपूर्ण बैठक और पूरी प्रक्रिया से स्थानीय राजस्व अधिकारियों की दूरी ने कई संदेहों को जन्म दिया है। यदि समय रहते इस जटिल भूमि विवाद का ठोस समाधान नहीं निकाला गया, तो यह मामला प्रदेश के सबसे बड़े भूमि घोटालों में से एक बन सकता है।

Pratahkal Bureau
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