आमेट। राजस्थान असंगठित एवं निर्माण मजदूर संघ INTAK ने राष्ट्रपति महोदया के नाम एक ज्ञापन एसडीएम को सौंपा, जिसमें उन्होंने मनरेगा योजना का नाम यथावत रखने और वी.बी.जी. रामजी योजना को निरस्त करने की सख्त मांग की है। यह ज्ञापन संघ के जिलाध्यक्ष कैलाश चन्द्र शर्मा, मीरा, सुखी देवी, मोहनी बाई, जेठी अणछी, रेखा, कैलाशी देवी, सजना, सोहनी बाई, पुष्पा बाई, भंवरी देवी, शांति बाई और रामी देवी द्वारा दिया गया।

ज्ञापन में बताया गया कि मनरेगा आज ग्रामीण जीवन का महत्वपूर्ण आधार बन चुकी है, जिससे गाँव के गरीब परिवारों को नियमित मजदूरी और आर्थिक सुरक्षा मिलती है। वहीं, वी.बी.जी. रामजी योजना ग्रामीण मजदूरों के हित के विपरीत है और उनके रोजगार के अवसरों को खतरे में डाल सकती है। संघ ने कहा कि केन्द्र सरकार द्वारा मनरेगा के तहत 100 दिन के काम में 90 प्रतिशत राशि देने के बावजूद, औसत मजदूरों को केवल 60 से 70 दिन ही रोजगार मिल पाता है और भुगतान भी समय पर नहीं होता। यदि राज्य सरकारों पर 40 प्रतिशत का भुगतान भार और डाल दिया गया तो रोजगार के अवसर और घट सकते हैं और मजदूरी की भुगतान प्रक्रिया और जटिल हो जाएगी।

ज्ञापन में यह भी स्पष्ट किया गया कि मनरेगा योजना महात्मा गांधी की ग्राम स्वराज की अवधारणा को धरातल पर उतारने वाली संसद द्वारा पारित योजना है। इसमें ग्राम सभा की भूमिका केंद्रीय है और ग्रामवासियों की वास्तविक जरूरतों के अनुसार जल संग्रहण, कच्ची सड़क निर्माण, वृक्षारोपण और नर्सरी विकास जैसे कार्य किए जाते हैं। यदि इसे वी.बी.जी. रामजी योजना में बदल दिया गया तो ग्राम सभा और महात्मा गांधी की ग्राम स्वराज की अवधारणा का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा।

कैलाश चन्द्र शर्मा और संघ के अन्य पदाधिकारियों ने कोविड-19 महामारी के दौरान मनरेगा की महत्वपूर्ण भूमिका भी रेखांकित की। उन्होंने बताया कि महामारी के दौरान प्रवासी मजदूरों को मनरेगा के माध्यम से आर्थिक संबल मिला और पिछले तीन वर्षों में भी मजदूरों को अपेक्षित रोजगार के 100 दिन ही प्राप्त हुए। संघ का मानना है कि केन्द्र सरकार का विधेयक उचित मंशा पर आधारित नहीं है और विपक्ष को पर्याप्त बहस और संवाद का अवसर नहीं दिया गया। इसलिए मनरेगा को यथावत रखना और वी.बी.जी. रामजी योजना को निरस्त करना ही देश और मजदूरों के हित में उचित कदम होगा।

राजस्थान असंगठित एवं निर्माण मजदूर संघ INTAK के इस कदम से यह संदेश स्पष्ट होता है कि ग्रामीण रोजगार योजनाओं के संरक्षण और मजदूर हितों की सुरक्षा में संघ की सक्रिय भूमिका बनी हुई है।

Pratahkal Bureau

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