ड्रोन सर्वे नियमों से खनन पट्टों में विवाद, नई तकनीक बनी माइनिंग क्षेत्र की चुनौती
राजस्थान के केलवा में पुराने मैन्युअल सर्वे और नए डिजिटल ड्रोन सर्वे के आंकड़ों में अंतर आने से खनन पट्टाधारकों और प्रशासन के बीच टकराव की स्थिति पैदा हो गई है।

राजस्थान के खनन क्षेत्रों में डिजिटल मैपिंग के लिए उपयोग किए जा रहे ड्रोन की सांकेतिक तस्वीर। इमेज का निर्माण एआई द्वारा केवल उदाहरण के उद्देश्य से किया गया है। Image generated by AI for illustrative purposes.
प्रस्तावना: खनन क्षेत्र में नई तकनीक का आगाज
केलवा राज्य सरकार द्वारा खनन क्षेत्र में पारदर्शिता, राजस्व वृद्धि और अवैध खनन पर नियंत्रण के उद्देश्य से राजस्थान माइनर मिनरल कंसेशन रूल्स (RMMCR) के तहत ड्रोन सर्वे के नियम लागू किए जा रहे हैं। सरकार का मानना है कि आधुनिक तकनीक के उपयोग से खनन पट्टों की सटीक माप संभव होगी और लंबे समय से चली आ रही अनियमितताओं पर अंकुश लगाया जा सकेगा।
विवाद का मुख्य कारण: मैन्युअल बनाम डिजिटल मैपिंग
माइनिंग क्षेत्रों में यह नई व्यवस्था अब विवाद का कारण बनती जा रही है। जानकारी के अनुसार, प्रदेश में अधिकांश खनन पट्टे वर्षों पूर्व कम्पास और फीते से की गई मैन्युअल माप के आधार पर आवंटित किए गए थे। उस समय सीमांकन की प्रक्रिया पूरी तरह तकनीकी नहीं थी, जिसके चलते कई स्थानों पर सीमाओं में मामूली त्रुटियाँ रह गईं। वर्षों तक इन्हीं सीमाओं के आधार पर खनन कार्य संचालित होता रहा और पट्टाधारकों ने नियमों के तहत निवेश भी किया।
ओवरलैपिंग और आपसी टकराव की बढ़ती आशंका
अब ड्रोन सर्वे के माध्यम से जब खनन क्षेत्रों की डिजिटल मैपिंग की जा रही है, तो कई पट्टों की सीमाएँ एक-दूसरे में ओवरलैप होती हुई सामने आ रही हैं। इससे:
- न केवल पट्टाधारकों के बीच सीमाविवाद उत्पन्न हो रहे हैं।
- आपसी टकराव और कानूनी झगड़ों की आशंका भी बढ़ती जा रही है।
- केलवा क्षेत्र के माइंस इलाकों में इसको लेकर विशेष रूप से असंतोष देखा जा रहा है।
पट्टाधारकों की चिंता और दलीलें
खनन व्यवसाय से जुड़े लोगों का कहना है कि "ड्रोन सर्वे से प्राप्त नए डाटा के आधार पर वर्षों से वैध रूप से संचालित पट्टों को अवैध ठहराए जाने की स्थिति बन सकती है। इससे पट्टाधारकों को नोटिस, पेनल्टी और मुकदमेबाज़ी का सामना करना पड़ेगा।" उनका तर्क है कि यदि प्रारंभिक आवंटन ही मैन्युअल सर्वे पर आधारित था, तो आज केवल तकनीकी अंतर के कारण उन्हें दोषी ठहराना न्यायसंगत नहीं है।
विशेषज्ञों की राय और समाधान की राह
विशेषज्ञों का मानना है कि ड्रोन सर्वे अपने आप में एक सकारात्मक और आवश्यक कदम है, लेकिन इसे लागू करने से पहले पुरानी और नई माप पद्धतियों के बीच सामंजस्य स्थापित करना बेहद जरूरी है। बिना ग्राउंड वेरिफिकेशन और सुधारात्मक प्रक्रिया के सीधे कार्रवाई करने से विवाद और गहराएंगे।
विशेषज्ञों के अनुसार:
- सरकार को एक स्पष्ट ‘रिकंसीलिएशन पॉलिसी’ बनानी चाहिए।
- इसमें मैन्युअल सर्वे और ड्रोन सर्वे के आंकड़ों का तुलनात्मक अध्ययन कर त्रुटियों को सुधारने का अवसर दिया जाए।
भविष्य की मांग: सुधारात्मक दृष्टिकोण की आवश्यकता
पट्टाधारकों ने सरकार से मांग की है कि "ड्रोन सर्वे को दंडात्मक नहीं, बल्कि सुधारात्मक दृष्टिकोण से लागू किया जाए।" साथ ही पुराने खनन पट्टों के लिए अलग से विशेष गाइडलाइन जारी की जाए, ताकि दशकों पुराने पट्टों पर अचानक सवाल खड़े न हों और अनावश्यक कानूनी व प्रशासनिक विवाद से बचा जा सके। यदि समय रहते इस दिशा में संतुलित निर्णय नहीं लिया गया, तो खनन क्षेत्र में असंतोष और अस्थिरता बढ़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

Pratahkal Bureau
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