राजसमंद में श्रमिक की संदिग्ध मौत, नदी में नहाते समय हादसा
भीम थाना क्षेत्र में 17 वर्षीय श्रमिक की मौत पर परिजनों ने हत्या की आशंका जताई, 36 घंटे बाद मेडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम कराया गया

उदयपुर। संभाग के राजसमंद जिले के भीम थाना क्षेत्र में टेंट बांधने का काम करने वाले 17 वर्षीय श्रमिक गुडविन पुत्र ककुआराम पारगी की नदी में नहाते समय संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। घटना ने उस समय गंभीर मोड़ ले लिया जब परिजनों ने इसे हादसा मानने से इनकार करते हुए हत्या की आशंका जताई, जिसके चलते शव 36 घंटे तक पोस्टमार्टम की कार्यवाही के अभाव में मुर्दाघर में पड़ा रहा।
थानाधिकारी मुकेश कुमार के अनुसार बरोलिया बाघपुरा निवासी गुडविन शनिवार दोपहर को देवगढ़ की ओर कृष्णा टेन्ट हाउस का टेंट बांधने के लिए ठेकेदार के साथ टेम्पो में सामान लेकर जा रहा था। रास्ते में सालियाखेड़ा पितानपुरा स्थित नदी पर भीषण गर्मी के चलते श्रमिकों ने नहाने के लिए पानी में डुबकी लगाई। गुडविन के साथ एक अन्य श्रमिक भी पानी में उतरा था। जैसे ही गुडविन ने पानी में छलांग लगाई, वह वापस ऊपर नहीं आया। कुछ ही क्षणों बाद उसे देखा गया तो उसके सिर से खून बह रहा था। तत्काल उसे बाहर निकालकर स्थानीय चिकित्सालय ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उसे एमबी चिकित्सालय रेफर किया गया। सोमवार सुबह उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई।
मृतक का शव एमबी चिकित्सालय के मुर्दाघर में रखवाया गया। दोपहर बाद पोस्टमार्टम की कार्यवाही के लिए हेड कांस्टेबल बंशीलाल पहुंचे, लेकिन परिजनों ने रिपोर्ट देने से इनकार कर दिया और मौत को लेकर संदेह जताया। समझाइश के प्रयास विफल रहे। मामले के बढ़ने पर देवगढ़ थाने के सब इंस्पेक्टर मुर्दाघर पहुंचे और परिजनों से बातचीत की, लेकिन परिजन टेंट व्यवसायी सुनिल रावल और ठेकेदार जम्बुलाल को बुलाने की मांग पर अड़ गए। उनका कहना था कि टेंट मालिक और ठेकेदार सभी बाघपुरावासियों को टेंट बांधने के लिए ले गए थे, इसलिए गुडविन की मौत के लिए वही जिम्मेदार हैं।
स्थिति तनावपूर्ण होते देख भीम थानाधिकारी मुकेश कुमार स्वयं एमबी चिकित्सालय के मुर्दाघर पहुंचे और परिजनों से बातचीत की। मौके के वीडियो के आधार पर उन्होंने बताया कि गुडविन के पानी में कूदने के बाद वह ऊपर नहीं आया, फिर भी परिजनों की शंका को दूर करने के लिए जिला पुलिस अधीक्षक उदयपुर के आदेश पर मेडिकल बोर्ड का गठन कर पोस्टमार्टम कराया गया। मेडिकल बोर्ड द्वारा पोस्टमार्टम की कार्यवाही पूरी करने के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया।
यह घटना श्रमिकों की सुरक्षा, कार्यस्थल की जिम्मेदारी और संदिग्ध मौतों की निष्पक्ष जांच को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है, जिससे स्थानीय प्रशासन और पुलिस की कार्यप्रणाली भी जांच के दायरे में आ गई है।

