राजसमंद: नाथद्वारा में पुलिस पर महिला से मारपीट और अवैध वसूली का आरोप
ओडन में ट्रैफिक जाम के दौरान 300 रुपये मांगने और विरोध करने पर थप्पड़ मारने का मामला; पुलिस ने आरोपों को नकारा।

नाथद्वारा (राजसमंद)। राजसमंद जिले के नाथद्वारा क्षेत्र से पुलिस की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा करने वाली एक अत्यंत गंभीर घटना सामने आई है, जहां पुलिसकर्मियों पर एक परिवार के साथ अभद्रता, मारपीट और धन उगाही के संगीन आरोप लगे हैं। ओडन क्षेत्र में घटित इस वारदात ने खाकी की छवि पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। कोठारिया निवासी पायल खटीक ने न्याय की गुहार लगाते हुए बताया कि यह विवाद उस समय शुरू हुआ जब वह अपने परिवार के साथ निजी वाहन से गुजरात जा रही थीं।
प्रार्थीया के अनुसार, ओडन क्षेत्र में लगे जाम के दौरान पुलिसकर्मियों ने उनकी गाड़ियों को जांच के लिए रोका। आरोप है कि तैनात पुलिसकर्मियों ने कागजात जांचने के नाम पर उनसे 300 रुपये की अवैध मांग की और पैसे देने पर ही जाम से बाहर निकलने देने का दबाव बनाया। जब परिवार ने इस अनुचित मांग को ठुकरा दिया, तो एक पुलिसकर्मी कथित रूप से आगबबूला हो गया। आक्रोशित होकर उसने न केवल पायल खटीक के साथ बदसलूकी की, बल्कि उन्हें थप्पड़ भी जड़ दिया। इस दौरान हमले की उग्रता इतनी अधिक थी कि गाड़ी का कांच भी तोड़ दिया गया।
घटनाक्रम तब और अधिक गंभीर हो गया जब बीच-बचाव करने आई पायल की माता कैलाशी देवी के साथ भी पुलिसकर्मियों ने अभद्रता की और कथित तौर पर उनका गला दबाने का प्रयास किया। पीड़िता ने आरोप लगाया कि उसके भाई विशाल को भी पुलिस ने गाड़ी से घसीटकर बाहर निकाला और उसके साथ मारपीट की कोशिश की गई। विरोध करने पर पुलिसकर्मियों ने सत्ता और वर्दी का धौंस दिखाते हुए पूरे परिवार को झूठे मुकदमे में फंसाने और जेल भेजने की खुली धमकी दी। पीड़ित पक्ष का दावा है कि उनके पास इस पूरी बर्बरता का वीडियो साक्ष्य के रूप में मौजूद है।
दूसरी ओर, पुलिस प्रशासन ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए अपना पक्ष रखा है। पुलिस का कहना है कि जवान केवल ट्रैफिक सुचारू करने का कार्य कर रहे थे, तभी महिला और उसके परिजनों ने पुलिसकर्मी के साथ हाथापाई की और उनका मोबाइल तोड़ दिया। वर्तमान में, पीड़ित परिवार ने दोषी पुलिसकर्मियों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है। यह मामला समूचे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है, जो भविष्य में पुलिस और जनता के बीच बढ़ते अविश्वास की खाई को और गहरा कर सकता है।

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