राजसमन्द नाथद्वारा। श्रीनाथजी की पावन नगरी नाथद्वारा के लालबाग स्थित राजकीय चिकित्सालय में व्याप्त घोर अव्यवस्थाओं, बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं और सत्ताधारी दल के नेताओं की कथित अनैतिक दखलअंदाजी को लेकर सोमवार को महिला कांग्रेस ने उग्र मोर्चा खोल दिया। महिला कांग्रेस की जिलाध्यक्ष मनोरमा डाबी एवं ब्लॉक अध्यक्ष गौरी चौधरी के नेतृत्व में बड़ी संख्या में महिला पदाधिकारी अचानक चिकित्सालय परिसर पहुंचीं, जहां उन्होंने संपूर्ण व्यवस्थाओं का सघन निरीक्षण कर भर्ती मरीजों और उनके परिजनों की गंभीर समस्याएं व शिकायतें सुनीं। इसके पश्चात आक्रोशित प्रतिनिधिमंडल ने सीधे प्रमुख चिकित्सा अधिकारी (पीएमओ) डॉ. अनिल शाह से मुलाकात कर इन ज्वलंत और गंभीर मुद्दों पर तत्काल दंडात्मक कार्रवाई की मांग उठाई।

महिला कांग्रेस ने अस्पताल प्रशासन पर घोर लापरवाही बरतने का सीधा आरोप लगाते हुए कहा कि लंबे समय से इस चिकित्सालय में आने वाले मरीजों को मूलभूत स्वास्थ्य सुविधाएं तक मयस्सर नहीं हो पा रही हैं। ब्लॉक अध्यक्ष गौरी चौधरी ने आधिकारिक तौर पर बताया कि संगठन की ओर से मुख्य रूप से तीन अति गंभीर मुद्दों को अस्पताल प्रशासन के समक्ष प्रमुखता से रखा गया है, जिनमें चिकित्सकों की घोर लापरवाही, आवश्यक जांच सुविधाओं का पूर्ण अभाव और प्रशासनिक कार्यों में अनुचित राजनीतिक हस्तक्षेप शामिल हैं।

इस विरोध प्रदर्शन के दौरान महिला कांग्रेस ने चिकित्सालय में कार्यरत चिकित्सक डॉ. प्रशांत गिरी पर बेहद संगीन आरोप लगाते हुए सनसनीखेज दावा किया कि उन्हें ड्यूटी समय के दौरान पूरी तरह से नशे की हालत में मरीजों का उपचार करते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया। आरोप है कि यह गंभीर मामला जैसे ही उजागर हुआ, संबंधित चिकित्सक लोकलाज और कार्रवाई के डर से अपना मोबाइल फोन स्विच ऑफ कर अस्पताल परिसर से अचानक गायब हो गए। महिला कांग्रेस की नेताओं ने अस्पताल प्रबंधन पर तीखे सवाल दागते हुए पूछा कि यदि कोई जिम्मेदार डॉक्टर स्वयं नशे की हालत में बेबस मरीजों का उपचार करेगा, तो वैसी स्थिति में मरीजों की जान और उनके स्वास्थ्य की जिम्मेदारी आखिर कौन लेगा।

सरकारी दावों की पोल खोलते हुए महिला कांग्रेस ने वर्तमान सरकार की महत्वाकांक्षी स्वास्थ्य योजनाओं को महज एक "दिखावा" करार दिया और कहा कि अस्पताल में कई अत्यंत जरूरी जांचें पूरी तरह से ठप पड़ी हैं। महिला नेताओं के अनुसार, यूरिन, थायराइड सहित 10 से अधिक महत्वपूर्ण जांचें डॉक्टरों द्वारा पर्चे पर मरीजों को लिखी तो जा रही हैं, लेकिन चिकित्सालय के भीतर ये जांचें बिल्कुल नहीं हो पा रही हैं। ऐसी लाचारी में गरीब मरीजों को या तो बेहद महंगी निजी लैब का सहारा लेना पड़ रहा है या फिर बिना जांच कराए ही बैरंग वापस लौटना पड़ रहा है। इतना ही नहीं, जो जांचें हो भी रही हैं, उनकी रिपोर्ट समय पर नहीं मिलने के कारण मरीजों के इलाज में गंभीर देरी हो रही है, जिससे मरीजों की जान पर बन आई है।

इसके साथ ही, महिला कांग्रेस ने सरकारी अस्पताल परिसर के भीतर सत्ताधारी भाजपा नेताओं की कथित मनमानी और दखलअंदाजी पर भी कड़े तेवर दिखाए। गौरी चौधरी ने सीधे तौर पर आरोप लगाया कि अस्पताल की जिस मुख्य जांच लैब में आम जनता के लिए 'प्रवेश निषेध' का बोर्ड टंगा है, वहां भाजपा के युवा नेता बिना किसी रोकटोक और अनुमति के धड़ल्ले से घूमते नजर आ रहे हैं, जबकि दूसरी ओर अपनी बारी का इंतजार कर रहे आम मरीजों और उनके असहाय परिजनों को वहां पैर तक रखने की इजाजत नहीं दी जाती। उन्होंने इस पूरी स्थिति को चिकित्सालय की प्रशासनिक ढिलाई और सत्ता के राजनीतिक दबाव का प्रत्यक्ष परिणाम बताया।

मामले की गंभीरता को देखते हुए महिला कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल ने पीएमओ डॉ. अनिल शाह को इस कथित लापरवाही, नशे में उपचार करने और राजनीतिक हस्तक्षेप से जुड़े पुख्ता प्रमाण व सबूत भी सौंपे। इस दौरान पीएमओ डॉ. अनिल शाह ने पूरे प्रकरण को अत्यंत गंभीरता से लेते हुए मामले की निष्पक्ष व उचित जांच करवाकर दोषियों के खिलाफ तत्काल सख्त कानूनी कार्रवाई करने का भरोसा दिलाया। वहीं दूसरी ओर, महिला कांग्रेस ने प्रशासन को दो टूक शब्दों में अंतिम चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही चिकित्सालय की चरमराई व्यवस्थाओं में सुधारात्मक बदलाव नहीं हुआ, तो संगठन भविष्य में उग्र जन-आंदोलन की राह पकड़ने को मजबूर होगा।

Pratahkal Newsroom

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