राजसमंद सांसद श्रीमती महिमा कुमारी मेवाड़ ने “नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023” को देश में महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक और परिवर्तनकारी कदम बताया है। उन्होंने कहा कि यह अधिनियम लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण प्रदान कर उनकी भागीदारी को सशक्त करेगा और भारतीय लोकतंत्र को और अधिक समावेशी बनाएगा।

नीति निर्माण में समान भागीदारी और राजनीतिक क्रांति

सांसद मेवाड़ ने कहा कि "यह कानून केवल एक विधायी बदलाव नहीं, बल्कि महिलाओं को निर्णय प्रक्रिया में समान भागीदारी देने की दिशा में एक सामाजिक और राजनीतिक क्रांति है।" इससे देश की आधी आबादी को नीति निर्माण में उचित प्रतिनिधित्व मिलेगा और महिलाओं से जुड़े मुद्दों को अधिक प्रभावी ढंग से उठाया जा सकेगा। उन्होंने बताया कि यह अधिनियम परिसीमन प्रक्रिया के बाद लागू होगा, जिससे संसद और विधानसभाओं में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। साथ ही, केंद्र सरकार द्वारा इसे शीघ्र लागू करने के लिए आवश्यक प्रक्रियाओं को आगे बढ़ाया जा रहा है, जिससे आने वाले समय में महिलाओं की राजनीतिक भूमिका और अधिक मजबूत होगी।

तीन दशकों का लंबा इंतजार और ऐतिहासिक उपलब्धि

सांसद मेवाड़ ने इस अधिनियम के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि "महिला आरक्षण का यह प्रयास लगभग तीन दशकों के लंबे इंतजार के बाद साकार हुआ है।" वर्ष 1996 से लेकर कई बार इस विधेयक को प्रस्तुत किया गया, लेकिन अब जाकर इसे संसद की मंजूरी मिली है, जो देश के लोकतांत्रिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में यह ऐतिहासिक निर्णय संभव हो पाया है, जो महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा और सशक्तिकरण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

सशक्त नारी से सशक्त भारत का संकल्प

अंत में सांसद श्रीमती महिमा कुमारी मेवाड़ ने कहा कि "नारी शक्ति वंदन अधिनियम आने वाले वर्षों में देश की राजनीति में महिलाओं की भागीदारी को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा और 'सशक्त नारी, सशक्त भारत' के संकल्प को साकार करने में मील का पत्थर साबित होगा।"

Pratahkal Bureau

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