केलवा के पड़ासली में श्री नाकोड़ा धाम महातीर्थ प्रतिष्ठा महोत्सव संपन्न
आचार्य पद्मभूषणरत्नसूरीश्वर महाराज के सानिध्य में पार्श्वनाथ और नाकोड़ा जी की नवीन प्रतिमाओं की प्रतिष्ठा की गई।

पड़ासली स्थित श्री नाकोड़ा धाम में आयोजित प्रतिष्ठा महोत्सव के दौरान धार्मिक विधि-विधान संपन्न करते श्रद्धालु और उपस्थित जैन संत।
केलवा क्षेत्र समीपवर्ती पड़ासली पंचायत स्थित अरावली की सुरम्य वादियों में स्थापित भव्य श्री नाकोड़ा धाम महातीर्थ में आयोजित प्रतिष्ठा महोत्सव श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ सम्पन्न हुआ। परम पूज्य आचार्य पद्मभूषणरत्नसूरीश्वर महाराज आदि ठाणा की पावन निश्रा एवं पंन्यास ऋषभरत्नविजय सहित साधु-साध्वीवृंद की मंगलमयी उपस्थिति में आयोजित इस महोत्सव में हजारों श्रद्धालुओं की भागीदारी से पूरा धाम परिसर भक्तिमय हो उठा।
महोत्सव के अंतर्गत भगवान पार्श्वनाथ एवं श्री नाकोड़ा जी की नवीन प्रतिमा की विधिवत प्रतिष्ठा वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक विधि-विधान के साथ सम्पन्न कराई गई। श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव से पूजन-अर्चना कर पुण्य लाभ अर्जित किया। विशेष रूप से दिव्य आरती के दौरान श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा और पूरा वातावरण जय-जयकार के नारों से गूंज उठा। सैकड़ों दीपों की रोशनी, शंखनाद और घंटों की ध्वनि के बीच सामूहिक आरती का दृश्य अत्यंत मनोहारी और आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण रहा।
कार्यक्रम के दौरान आध्यात्मिक प्रसंगों की भावपूर्ण प्रस्तुतियों ने सभी को भावविभोर कर दिया। हाथी, बैल, सिंह, लक्ष्मी, पुष्पमाला, चंद्रमा, सूर्य, ध्वजा, कलश, कमल सरोवर, समुद्र, रत्नजटित सिंहासन, दिव्य विमान और अग्नि जैसे प्रतीकों की आकर्षक झांकियां प्रस्तुत की गईं, जिन्हें देखकर श्रद्धालु मंत्रमुग्ध हो उठे।
प्रातःकाल भव्य शोभायात्रा निकाली गई, जिसमें सुसज्जित रथ, बैंड-बाजे और पारंपरिक वेशभूषा में सजे श्रद्धालु नाचते-गाते हुए शामिल हुए। नगर के विभिन्न स्थानों पर पुष्पवर्षा कर शोभायात्रा का स्वागत किया गया। महोत्सव के तहत विशाल पांडाल में भजन-कीर्तन, प्रवचन एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।
आचार्य श्री ने अपने प्रवचनों में धर्म, संयम और सेवा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए समाज को एकजुट रहने का संदेश दिया। नाकोड़ा धाम सेवा संस्थान के अध्यक्ष निरंजन जैन एवं सचिव मनोज जैन ने बताया कि प्रतिष्ठा महोत्सव के दौरान विभिन्न धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित हुए, जिनमें क्षेत्र सहित दूर-दराज से बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। आयोजन समिति द्वारा श्रद्धालुओं के लिए भोजन, पेयजल, चिकित्सा एवं आवास की उत्कृष्ट व्यवस्थाएं की गईं, जबकि स्वयंसेवकों ने सेवा भाव से कार्य करते हुए आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
महोत्सव के समापन पर आयोजकों ने सभी श्रद्धालुओं, संत-महात्माओं और सहयोगियों का आभार व्यक्त किया। यह आयोजन श्रद्धा, आध्यात्मिक ऊर्जा और सामाजिक एकजुटता का सशक्त उदाहरण बनकर उभरा, जिसे श्रद्धालुओं ने अपने जीवन का अविस्मरणीय अनुभव बताया।

Pratahkal Bureau
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