केलवा। क्षेत्र के समीपवर्ती श्री नाकोड़ा धाम पड़ासली में आयोजित भव्य प्रतिष्ठा महोत्सव के अंतर्गत जैन संतों का मंगल प्रवेश पूर्ण श्रद्धा, अटूट विश्वास और भक्तिमय उत्साह के वातावरण में संपन्न हुआ। इस पावन अवसर पर आचार्य भगवंत श्रीमद्विजय पद्मभूषणरत्नसूरीश्वरजी महाराज, आचार्य भगवंत श्रीमद्विजय निपुणरत्नसूरीश्वरजी महाराज एवं साध्वी भगवंत कीर्तिरेखा श्रीजी के पावन सान्निध्य में संतों का भव्य एवं ऐतिहासिक स्वागत किया गया। मंगल प्रवेश के दौरान श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा, जिन्होंने गगनभेदी जयकारों और गहरी आत्मीयता के साथ संतों का अभिनंदन कर संपूर्ण परिसर को धर्ममय कर दिया।

इस महोत्सव में सर्वाधिक आकर्षण का केंद्र 35 फीट ऊंची भगवान नाकोड़ा जी की भव्य प्रतिमा रही। संतों ने इस विशाल प्रतिमा के दर्शन कर इसे एक ऐतिहासिक एवं दुर्लभ स्थल की संज्ञा देते हुए इसकी अद्वितीय भव्यता की मुक्तकंठ से सराहना की। संतों ने अपने संदेश में प्रतिपादित किया कि इस प्रकार के दिव्य धार्मिक स्थल समाज में आस्था, पवित्रता और गौरवशाली संस्कृति के वास्तविक संवाहक होते हैं। कार्यक्रम समिति के संयोजक मनोज जैन ने विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि प्रतिष्ठा महोत्सव के प्रथम दिवस पर भगवान श्री पार्श्वनाथ के जीवन दर्शन से संबंधित सुंदर चित्रों के माध्यम से भक्ति और कला का अद्भुत संगम प्रस्तुत किया गया। इसके अंतर्गत एक भव्यातिभव्य चित्रकला स्पर्धा का आयोजन हुआ, जिसमें बच्चों और युवाओं ने बढ़-चढ़कर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। प्रतिभागियों ने अपनी तूलिका के रंगों से भगवान पार्श्वनाथ के प्रेरक जीवन प्रसंगों और उनकी कालजयी शिक्षाओं को जीवंत रूप में उकेर दिया।

धार्मिक सभा को संबोधित करते हुए संतों ने अपने ओजस्वी प्रवचनों में धर्म, संयम और निःस्वार्थ सेवा के महत्व पर विशेष प्रकाश डाला। उन्होंने रेखांकित किया कि वर्तमान भौतिकवादी युग में ऐसे गरिमामयी आयोजनों से युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों, संस्कृति और धर्म से जुड़ने का मूल्यवान अवसर प्राप्त होता है, जिससे समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। आयोजन स्थल पर समूचे परिसर को अत्यंत मनमोहक और आकर्षक सज्जा से अलंकृत किया गया है, जिसने वातावरण को पूर्णतः आध्यात्मिक बना दिया है। श्रद्धालुओं की सुविधा हेतु आयोजकों द्वारा चाक-चौबंद व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं। आगामी दिनों में भी इस प्रतिष्ठा महोत्सव के तहत विभिन्न धार्मिक एवं सांस्कृतिक अनुष्ठानों की श्रृंखला जारी रहेगी, जिसमें भारी संख्या में श्रद्धालुओं के सम्मिलित होने की संभावना है। आयोजकों ने धर्मानुरागी जनता से अधिक से अधिक संख्या में पधारकर इस अलौकिक धर्म लाभ को प्राप्त करने का आह्वान किया है।

Pratahkal Newsroom

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