केलवा के फूली देवी स्कूल में मुनिश्री का मंगल उद्घोष: "शिक्षा सुधार है तो संस्कार गलती न करने का संकल्प"
केलवा के फूली देवी अंशुल बोहरा स्कूल में मुनि प्रकाश कुमार एवं मुनि सिद्ध प्रज्ञ जी के सान्निध्य में जीवन विज्ञान एवं प्रेक्षाध्यान शिविर का आयोजन हुआ। मुनिश्री ने विद्यार्थियों को शिक्षा, संस्कार और अनुशासन के जरिए सर्वांगीण विकास का मार्ग दिखाया। तेरापंथ समाज के विभिन्न संगठनों के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में बच्चों ने योग और जीवन जीने की कला सीखी।

केलवा। विद्यार्थियों के भीतर छिपी अनंत ऊर्जा को सही दिशा देने और उनके सर्वांगीण विकास की नींव को मजबूत करने के उद्देश्य से राजसमंद के केलवा स्थित श्रीमती फूली देवी अंशुल बोहरा विद्यालय में एक भव्य आध्यात्मिक एवं शैक्षणिक समागम का आयोजन किया गया। तेरापंथ धर्मसंघ के अधिशास्ता आचार्य श्री महाश्रमण जी के विद्वान शिष्य मुनि प्रकाश कुमार जी एवं मुनि सिद्ध प्रज्ञ जी के सान्निध्य में आयोजित इस कार्यक्रम ने विद्यार्थियों को जीवन जीने की कला और अनुशासन का नया पाठ पढ़ाया। कार्यक्रम की गूँज पूरे क्षेत्र में रही, जहाँ मुनिश्री ने स्पष्ट किया कि अनुशासन केवल नियमों का पालन नहीं, बल्कि मन की स्थिरता और जागरूकता का वह संगम है, जो एक साधारण छात्र को असाधारण व्यक्तित्व में बदल देता है।
मुनि प्रकाश कुमार जी ने विद्यालय के प्राकृतिक सौंदर्य और यहाँ के परोपकारी वातावरण की सराहना करते हुए कहा कि जहाँ प्रकृति और अनुशासन का मेल होता है, वहाँ बच्चों का सहज विकास सुनिश्चित है। उन्होंने विद्यालय प्रबंधन की व्यवस्थाओं को अनुकरणीय बताते हुए विद्यार्थियों के उज्जवल भविष्य की मंगल कामना की। इसी क्रम में, 22 देशों में भारतीय संस्कृति और ध्यान योग का परचम फहराने वाले मुनि सिद्ध प्रज्ञ जी ने शिक्षा और संस्कार की एक नई परिभाषा गढ़ी। उन्होंने प्रेरक उद्बोधन देते हुए कहा कि अपनी गलती में सुधार कर लेना शिक्षा है, लेकिन जीवन में ऐसी शुद्धि लाना कि गलती दोहराई ही न जाए, वही वास्तविक संस्कार है। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि जीवन का लक्ष्य सदैव बड़ा होना चाहिए, क्योंकि अधूरा जीना और अधूरा मरना ही सबसे बड़ा संकट है। पूर्णता के साथ जीना ही जीवन की वास्तविक सफलता है।
विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास की दिशा में ठोस कदम बढ़ाते हुए मुनिश्री ने जीवन विज्ञान, प्रेक्षाध्यान और अणुव्रत के व्यावहारिक प्रयोग करवाए। योग और ध्यान की इन गहराइयों से छात्रों को मानसिक शांति और एकाग्रता का अनुभव हुआ। इस विशेष सत्र का आयोजन तेरापंथ युवक परिषद्, भिक्षु नगर केलवा द्वारा किया गया। विद्यालय के प्राचार्य श्री मांगीलाल जी तेली ने दोनों मुनिवरों का भावभीना स्वागत किया और शिक्षा के साथ संस्कारों के सामंजस्य पर अपने विचार व्यक्त किए। शिक्षकों ने भी इस बात पर जोर दिया कि वर्तमान समय में शिक्षा और संस्कार के बीच बढ़ती दूरी को केवल जीवन विज्ञान और अणुव्रत के माध्यम से ही पाटा जा सकता है।
इस गरिमामयी आयोजन को सफल बनाने में तेरापंथ सभा, तेरापंथ युवक परिषद और तेरापंथ महिला मंडल की महत्वपूर्ण भूमिका रही। कार्यक्रम का अत्यंत प्रभावी और सफल संचालन महिला मंडल की अध्यक्षा श्रीमती रत्ना कोठारी द्वारा किया गया। आयोजन से जुड़ी विस्तृत जानकारी तेयुप मंत्री निखिल कोठारी ने साझा की। यह आयोजन न केवल एक विद्यालयी कार्यक्रम बनकर रहा, बल्कि इसने केलवा के शैक्षणिक वातावरण में संस्कार और अध्यात्म की एक नई चेतना का संचार किया है, जिसका प्रभाव आने वाली पीढ़ियों पर स्पष्ट रूप से दिखाई देगा।

Pratahkal Bureau
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