विवादों में मेवाड़ स्पोर्ट्स क्लब, क्लब भंग करने की उठी मांगें
राजसमंद में मेवाड़ स्पोर्ट्स क्लब विवादों में, क्लब पर खेल गतिविधियों की बजाय मनोरंजन करने और आपराधिक मामलों में शामिल सदस्यों की भागीदारी के आरोप। समाजसेवी और अधिवक्ताओं ने क्लब भंग कर जमीन को सरकारी उपयोग के लिए वापस लेने की मांग उठाई।

राजसमंद। जिले के खेलों के विकास और युवा प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से स्थापित मेवाड़ स्पोर्ट्स क्लब अब अपने उद्देश्यों से भटककर विवादों के केंद्र में आ गया है। आरके हॉस्पिटल के पास स्थित खेल परिषद की जमीन पर सहकारिता विभाग के सोसाइटी एक्ट के तहत गठित यह क्लब अब कथित तौर पर केवल कुछ लोगों के मनोरंजन का माध्यम बनकर रह गया है।
कुछ समाजसेवी और अधिवक्ताओं ने क्लब को भंग कर इस जमीन को मेडिकल कॉलेज और अन्य सरकारी सुविधाओं के लिए वापस लेने की मांग उठाई है। अधिवक्ता जितेंद्र कुमार खटीक ने इस संबंध में सिविल कोर्ट में भी वाद दायर किया है।
आरटीआई से मिली जानकारी के अनुसार, वर्ष 2012 में राजसमंद जिले में खेलों को बढ़ावा देने और युवा प्रतिभाओं को विकसित करने के उद्देश्य से मेवाड़ स्पोर्ट्स कॉम्पलेक्स सोसाइटी का गठन किया गया था। इसके तहत वार्षिक प्रतियोगिताओं का आयोजन, छात्रवृत्तियों का प्रावधान, ग्रीष्मकालीन खेल शिविर और सामुदायिक मनोरंजन गतिविधियों का संचालन सुनिश्चित किया गया था। लेकिन पिछले 13 वर्षों में क्लब अपने निर्धारित उद्देश्यों को पूरा नहीं कर पाया।
सामाजिक कार्यकर्ता और आरटीआई एक्टिविस्ट छगनलाल चंदेल ने बताया कि कलेक्टर के आदेश पर उपलब्ध दस्तावेजों में खुलासा हुआ कि वित्त वर्ष 2013 में क्लब के 380 सदस्यों का पुलिस चरित्र सत्यापन कराया गया था, जिसमें 40 से अधिक सदस्य गंभीर आपराधिक धाराओं में संलिप्त पाए गए। यह सवाल उठता है कि ऐसे सदस्यों के होने के बावजूद क्लब में किस प्रकार खेल गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा रहा है।
इसके अलावा, क्लब के संविधान के अनुसार सदस्य स्थानीय क्षेत्र के व्यक्ति ही हो सकते हैं। फिर भी आरोप हैं कि कई बाहरी व्यक्तियों को सदस्य बनाया गया, जो अपने क्लब कार्ड का अन्य प्रतिष्ठित क्लबों में प्रवेश हेतु लाभ उठा रहे हैं। मेवाड़ क्लब का उदयपुर, जोधपुर और अन्य शहरों के क्लबों के साथ टाइअप है, जिससे बाहरी सदस्य अनुचित लाभ उठा रहे हैं।
हालांकि 2023 में तत्कालीन कलेक्टर ने क्लब की कार्यकारिणी भंग कर प्रशासनिक कमेटी का गठन किया था, फिर भी वर्तमान समय में जिम्मेदार अधिकारी कार्रवाई में संकोच कर रहे हैं। इस मामले पर आरटीआई एक्टिविस्ट छगनलाल चंदेल और अधिवक्ता जितेंद्र खटीक ने जोर देकर कहा कि क्लब को भंग कर जमीन को नियमों के अनुसार वापस लेने की आवश्यकता है।
जिला खेल अधिकारी धर्मदेव सिंह का कहना है कि खेल परिषद की जमीन मेवाड़ क्लब को एमओयू के तहत दी गई थी, लेकिन वर्ष 2024 में क्या स्थिति रही, इसकी उन्हें जानकारी नहीं है। वहीं जिला कलेक्टर अरुण कुमार हसीजा का कहना है कि मिली शिकायत और दायर वाद पर नियमानुसार कानूनी कार्यवाही की जाएगी। क्लब के अध्यक्ष सुनील तापड़िया का कहना है कि क्लब नियमों के अनुसार संचालित हो रहा है और सभी दस्तावेज पेश किए जा रहे हैं।
राजसमंद में यह विवाद न केवल खेल गतिविधियों की साख पर सवाल खड़ा कर रहा है, बल्कि यह भी उजागर कर रहा है कि सरकारी जमीन और संसाधनों के प्रबंधन में पारदर्शिता और जवाबदेही कितनी जरूरी है।
- मेवाड़ स्पोर्ट्स क्लबRajsamand Sports Clubमेवाड़ क्लब विवादRajsamand Sports Club controversyमेवाड़ क्लब भंगMevada Club dissolutionRajsamand खेल परिषदRajsamand खेल अधिकारीजितेंद्र खटीकछगनलाल चंदेलसुनील तापड़ियाअरुण कुमार हसीजाराजसमंद खेलRajsamand Club legal caseखेल प्रतिभाओं का विकासMevada Sports Society

Pratahkal Bureau
प्रातःकाल ब्यूरो, प्रातःकाल न्यूज़ की वह समर्पित संपादकीय टीम है, जो सटीक, सामयिक और निष्पक्ष समाचार पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा ब्यूरो राजनीति, समाज, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय मामलों में सत्यापित रिपोर्टिंग, गहन विश्लेषण और जिम्मेदार पत्रकारिता पर अपना ध्यान केंद्रित करता है।
