मेवाड़ अंचल ज्ञानशाला सार-संभाल यात्रा का शुभारंभ, बच्चों को संस्कार, अनुशासन और अध्ययन का संदेश
आमेट से शुरू हुई मेवाड़ अंचल ज्ञानशाला की सार-संभाल यात्रा के प्रथम चरण में उदयपुर, नाथद्वारा, राजनगर और कांकरोली की ज्ञानशालाओं का भ्रमण किया गया। बच्चों को संस्कार, अनुशासन, अध्ययन और व्यक्तित्व विकास का संदेश देते हुए गतिविधियों एवं संचालन की विस्तृत समीक्षा भी की गई।

तस्वीर में मेवाड़ अंचल ज्ञानशाला सार-संभाल यात्रा के दौरान पदाधिकारी, प्रशिक्षक और बच्चे रंग-बिरंगे योग मैट के साथ नजर आ रहे हैं।
आमेट। मेवाड़ अंचल ज्ञानशाला की सार-संभाल यात्रा का शुभारंभ मेवाड़ आंचलिक संयोजक सुनील मुणोत (भीम) तथा सह संयोजक भूपेश खमेसरा के नेतृत्व में किया गया। इस अवसर पर उदयपुर क्षेत्रीय प्रभारी साजन मांडोत, पवन कच्छारा (आमेट), महावीर मुणोत (भीम), विजय रांका (आसिन्द) एवं सुश्री प्राची कोठारी (आमेट) भी उपस्थित रहे। यात्रा के प्रथम चरण में उदयपुर, नाथद्वारा, राजनगर एवं कांकरोली की ज्ञानशालाओं का भ्रमण कर वहां संचालित गतिविधियों का अवलोकन किया गया।
इस अवसर पर ज्ञानशाला प्रकोष्ठ कार्य समिति सदस्य डॉ. डिंपी जी जैन ने मेवाड़ अंचल टीम का परिचय कराते हुए सभी का स्वागत एवं अभिनंदन किया। यात्रा के दौरान सुनील मुणोत ने ज्ञानशाला के बच्चों, प्रशिक्षिकाओं एवं स्थानीय पदाधिकारियों से आत्मीय संवाद किया। उन्होंने बच्चों को नियमित अध्ययन, संस्कार, अनुशासन एवं व्यक्तित्व विकास के लिए प्रेरित करते हुए ज्ञानशाला की गतिविधियों में उत्साहपूर्वक सहभागिता का संदेश दिया। साथ ही प्रशिक्षकों के साथ ज्ञानशाला संचालन, शिक्षण पद्धति, उपस्थिति, नवाचार तथा आगामी कार्यक्रमों की विस्तृत समीक्षा भी की।
अपने उद्बोधन में सुनील मुणोत ने कहा कि सार-संभाल यात्रा का उद्देश्य प्रत्येक ज्ञानशाला से प्रत्यक्ष संपर्क स्थापित कर उसकी कार्यप्रणाली को और अधिक सशक्त एवं प्रभावी बनाना है। उन्होंने कहा कि ज्ञानशाला केवल शिक्षा का माध्यम नहीं, बल्कि संस्कार निर्माण की सशक्त पाठशाला है, जहां प्रशिक्षक सेवा-भाव से बच्चों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
सह संयोजक भूपेश खमेसरा ने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा, “ज्ञानशाला में प्राप्त संस्कार जीवन की सबसे बड़ी पूंजी हैं। नियमित अध्ययन, समय का सदुपयोग, गुरुजनों का सम्मान एवं सदाचार को अपनाकर आप अपने परिवार, समाज और राष्ट्र का गौरव बन सकते हैं।”
क्षेत्रीय प्रभारी सुश्री प्राची कोठारी ने बच्चों को नियमित त्याग एवं दैनिक साधना के महत्व से अवगत कराया तथा निरंतर अभ्यास के लिए प्रेरित किया। वहीं साजन मांडोत ने ज्ञानशाला में संचालित विविध गतिविधियों एवं सेवा कार्यों की सराहना करते हुए प्रशिक्षकों का उत्साहवर्धन किया। पवन कच्छारा ने गुरु इंगित प्रत्येक शनिवारी अधिक से अधिक सामायिक कर धर्म आराधना करने का संदेश दिया। महावीर मुणोत एवं विजय रांका ने बच्चों को निरंतर अध्ययन, संस्कार एवं विभिन्न प्रतियोगिताओं में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया।
यात्रा के दौरान आयोजित योग रील प्रतियोगिता में भाग लेने वाले सभी प्रतिभागियों को सांत्वना पुरस्कार प्रदान किए गए, जबकि श्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को विशेष पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर सभी क्षेत्रों की तेरापंथ सभा, महिला मंडल एवं तेरापंथ युवक परिषद के पदाधिकारी, मुख्य प्रशिक्षिकाएं, प्रशिक्षिकाएं, ज्ञानशाला के बच्चे तथा अभिभावक उपस्थित रहे। सभी ज्ञानशालाओं में सार-संभाल यात्रा को लेकर उत्साह, प्रेरणा एवं सकारात्मक ऊर्जा का वातावरण देखने को मिला। एक दिवसीय सफल यात्रा में सभी सभाओं का सहयोग सराहनीय एवं उत्साहवर्धक रहा।

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