लावासरदारगढ़। पुलवामा आतंकी हमले में शहीद हुए मेवाड़ के एकमात्र सीआरपीएफ जवान नारायणलाल गुर्जर के पैतृक गांव बिनोल तक जाने वाली सड़क की हालात बेहद चिंताजनक हो गई है। पांच वर्ष पहले यानी 2 फरवरी 2021 को सार्वजनिक लोक निर्माण विभाग द्वारा एक निजी एजेंसी के माध्यम से साकरोदा चौराहा से बिनोल गांव तक लगभग 3 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण पूरा किया गया था। उस समय इस सड़क पर करीब 37 लाख 50 हजार रुपए की लागत आई थी और विभाग ने ठेकेदार से पांच वर्ष की गारंटी अवधि का एग्रीमेंट किया था।

हालांकि, महज पांच वर्षों में ही यह डबल डामर सड़क गड्डों और कंकरी में तब्दील हो चुकी है। स्थानीय ग्रामीण और वाहन चालक इसके चलते लगातार कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं। सड़क की बिगड़ी स्थिति के कारण अनेक दुपहिया और चार पहिया वाहन असंतुलित होकर हादसों के शिकार हो रहे हैं।

जानकारी के अनुसार, सड़क पर करीब दो साल पहले सैकड़ों स्थानों पर पेंच वर्क कराया गया था, लेकिन इसके बावजूद स्थिति और खराब होती चली गई। बड़े गड्डों और उखड़ी हुई डामरीकरण के कारण ग्रामीणों को आवागमन में गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। यह वही सड़क है जो शहीद नारायणलाल गुर्जर के पैतृक गांव बिनोल को मुख्य साकरोदा चौराहा से जोड़ती है, और इसकी वर्तमान स्थिति न केवल ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर रही है बल्कि आमजन की भावनाओं को भी आहत कर रही है।

स्थानीय लोग विभाग से सड़क की मरम्मत और ठेकेदार पर कानूनी कार्रवाई की अपेक्षा कर रहे हैं। पांच साल से भी कम समय में सड़क की इस तरह से बदतर स्थिति में पहुंचने से यह मामला प्रशासनिक स्तर पर गंभीर चिंता का विषय बन गया है।

Pratahkal Bureau

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