केलवा। केलवा क्षेत्र में राष्ट्र-संत महोपाध्याय ललितप्रभ सागर महाराज ने कहा कि जिस घर में सुबह की शुरुआत प्रणाम से होती है वहाँ कभी कलह का वातावरण निर्मित नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि अगर आपके घर में छोटों में प्रणाम करने की आदत नहीं है तो आप बड़प्पन दिखाकर उन्हें प्रणाम करना शुरू कर दीजिए तो वे भी प्रणाम करना सीख जाएँगे। उन्होंने कहा कि प्रणाम करने से परिवार का वातावरण आनंदमय हो जाता है। पहले के जमाने में बेटा पचास साल तक भी बाप से अलग नहीं होता था क्योंकि घरों में प्रणाम करने की आदत थी लेकिन आज प्रणाम न करने की आदत होने से बेटा शादी करते ही अलग हो जाता है। जब से प्रणाम करने की आदत कम हुई है तब से परिवारों के टूटने और तलाक बढ़ने की बाढ़-सी आ गई है। राष्ट्र-संत गुरुवार को डीसी अंकल के आवास पर आयोजित "जीने की कला" प्रवचन में श्रद्धालुओं को संबोधित कर रहे थे।

प्रार्थना और सकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव

संतप्रवर ने कहा कि अगर घर के सभी लोग सुबह उठकर प्रार्थना करेंगे तो पूरे घर का आभामण्डल ठीक रहेगा। अगर हमारे जीवन या घर पर ग्रह-गोचरों का नकारात्मक प्रभाव है तो वह भी प्रार्थना करने से दूर हो जाएगा। उन्होंने उद्योगपतियों से कहा कि वे फेक्ट्री में भी सुबह-सुबह प्रार्थना करवाएँ; एक माह बाद चमत्कार होगा, उत्पादन दुगुना हो जाएगा और फेक्ट्री का वातावरण मधुर बन जाएगा। उन्होंने कहा कि "प्रायःकर विद्यार्थी को परीक्षा में, अमीर को बीमारी में, व्यापारी को घाटे में, गरीब को भूख लगने पर, चोर को पकड़े जाने पर और नेता को चुनाव आने पर भगवान की याद आती है।" जब हम उसे केवल संकट में याद करते हैं तब भी वह हमारे संकट हर लेता है, काश, हम भगवान को हमेशा याद करना शुरू कर दें तो हमारे जीवन में संकट आने ही बंद हो जाए।

सेवा और परोपकार ही असली धर्म

प्रार्थना को संकट की वेला का शस्त्र बताते हुए संतप्रवर ने कहा कि अगर हमारा कोई परिजन संकटग्रस्त हो जाए तो दुखी या बेचेन होने की बजाय उसके लिए प्रभु से दुआ मांगे। सारी दवाएं भले ही निष्फल्ल हो जाए, पर परमार्थ भाव से की गई दुआ अवश्य सफल हो जाती है। संतप्रवर ने कहा कि जिस ईश्वर ने हमें चौबीस घंटे दिए हैं उन्हें हम चौबीस मिनट अवश्य समर्पित करें। याद रखें, पति को पत्नी का आसरा है और पत्नी को पति का, पर अंत में दोनों को अगर किसी का आसरा है तो प्रभु का ही आसरा है। वह सुख में हमारे साथ रहता है, पर दुख में हमें अपनी गोदी में उठा लेता है। परोपकार की प्रेरणा देते हुए संतश्री ने कहा कि जो औरों को देता है वही देवता कहलाता है। जो गरीब और जरूरतमंद लोगों के काम आता है, उनकी सेवा करता है भगवान उसकी झौली सदा भरता है।

दान और सेवा का महत्व

उन्होंने कहा कि भगवान से प्रार्थना में धन-दौलत नहीं, वरन् औरों के काम आने की सेवा मांगना क्योंकि सेवा से मेवा अपने आप बरसने लग जाते हैं। जिसके भीतर औरों का भला करने की भावना है उससे अगर सौ गलतियाँ भी हो जाए तो भगवान उसे माफ कर देता है। अन्नदान करने की प्रेरणा देते हुए कहा कि जो अन्नदान करता है उसका अन्नभंडार सदा भरा रहता है। व्यक्ति आतिथ्य सत्कार के लिए सदा तैयार रहें। महिलाएं चार मुठ्ठी आटा ज्यादा भिगोए। चार रोटियों से आपके तो कोई फर्क नहीं पड़ेगा, पर जिसके पेट में अन्न जाएगा उसका बहुत भला हो जाएगा। घर में अनुपयोगी अथवा पुराने कपड़ों को देने में संकोच न खाएं। कोई गरीब बीमार हो जाए तो उसे औषधि दिलाने का पुण्य कमाएं। घर के बाहर मटकी भर के रख दें, छत पर कुंडी भर के रख दें ताकि औरों की प्यास बुझाने का सौभाग्य मिल सके।

प्रेम ही जीवन का आधार

इससे पूर्व डॉ मुनि शांतिप्रिय सागर महाराज ने कहा कि प्रेम परिवार और समाज तो क्या, यह पूरी दुनिया को वश में करने की ताकत रखता है। यही वह मंत्र है जिससे अपने तो अपने रहते ही हैं, पराये भी अपने हो जाते हैं। हो सकता है बिना चीनी की चाय किसी को अच्छी लग सकती है, पर बिना प्रेम का जीवन तो खुद जिंदगी को ही नीरस बना देता है। आज घर में यश और दौलत से भी ज्यादा प्रेम की जरूरत है। अगर घर में प्रेम का अभाव और तकरार है तो आपके लाख रोकने पर भी लक्ष्मी घर से चली जाएगी, पर अगर घर में प्रेम और रिश्तों में मिठास है तो आपके घर से गई लक्ष्मी भी वापस लौट आएगी। उन्होंने कहा कि "जिओ और जीने दो प्रेम का ही विस्तार है।" प्रेम इंसानियत का यह पाठ पढ़ाता है कि आप खुद भी प्रेमपूर्वक जिओ और सबको भी प्रेम से जीने का अधिकार दो। किसी का जीवन छीनने का पाप कभी मत करो।

रिश्तों में मिठास और भविष्य का कार्यक्रम

मुनि श्री ने कहा कि नफरत और दूरियों की बातें करने वाले लोग आतंक को बढ़ावा देते हैं, वहीं प्रेम का पैगाम देने वाले लोग अहिंसा और विश्व-शांति को जीवित करते हैं। प्रेम की महिमा अनंत है। इसी प्रेम के वश होकर राम ने शबरी के बेर खाए थे, कृष्ण ने विदुराइन के केले की छिलके ग्रहण किए थे और महावीर ने चंदनबाला के उड़द के बाकुले स्वीकार किये थे। उन्होंने कहा कि प्रेम ही हमारी प्रार्थना हो, प्रेम ही हमारा पंथ हो, जिसके जीवन में प्रेम भरा हो वही हमारा संत हो, वही हमारा ग्रन्थ हो, प्रेम ही हमारे जीवन का मंत्र हो। प्रेम को जीने के लिए बच्चों का लाड करें, बराबर वालों के साथ सहकारिता निभाएँ, बड़ों की सेवा का खयाल रखें, गरीब की मदद करें, जीव-जन्तु और पेड़ों को संरक्षण दें - प्रेम-धर्म की हमें यही प्रेरणा है। इंसानों से प्यार कीजिए और चीजों का इस्तेमाल; बात तब बिगड़ती है जब हम इंसानों का इस्तेमाल करने लगते हैं और चीजों से प्यार। इस दौरान सभी श्रद्धालुओं को 'नई सोच नई उड़ान' पुस्तक की प्रभावना जैन परिवार द्वारा दी गई। इस अवसर पर स्वागत सुनील कोठारी ने शब्द सुमन द्वारा एवं आभार मुकेश कोठारी ने किया। कार्यक्रम में भिक्षु नगर, केलवा श्रावक समाज की उपस्थिति रही। राष्ट्र संत शुक्रवार को हिमाचल धाम पहुंचेंगे, वे दो और तीन मार्च को पाली होते हुए 8 मार्च रविवार को जोधपुर में मंगल प्रवेश करेंगे जिसमें राजसमंद और केलवा से अनेक श्रद्धालु भाग लेंगे।

Pratahkal Bureau

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