कुंभलगढ़ में गूंजा 'नरेगा बचाओ संग्राम': योगेंद्र सिंह परमार ने सरकार को ललकारा, कहा- मजदूरों का हक छीना तो होगा बड़ा आंदोलन
कुंभलगढ़ में PCC सचिव योगेंद्र सिंह परमार के नेतृत्व में 'नरेगा बचाओ संग्राम' का शंखनाद हुआ। सैकड़ों मजदूरों और युवाओं ने एकजुट होकर नरेगा में बजट कटौती और भुगतान में देरी के खिलाफ हुंकार भरी। परमार ने सरकार पर योजना को खत्म करने की साजिश का आरोप लगाते हुए इसे गरीबों के हक की लड़ाई बताया।

कुंभलगढ़/आमेट। ग्रामीण भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानी जाने वाली मनरेगा योजना पर मंडराते संकट और श्रमिकों की अनदेखी के खिलाफ आज कुंभलगढ़ की धरा पर जन-आक्रोश का सैलाब उमड़ पड़ा। राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सचिव योगेंद्र सिंह परमार के नेतृत्व में आयोजित "नरेगा बचाओ संग्राम" ने न केवल सरकार की नीतियों को कटघरे में खड़ा किया, बल्कि गरीब और वंचित वर्ग के अधिकारों की रक्षा के लिए एक नए संघर्ष का बिगुल भी फूंक दिया है। कुंभलगढ़ क्षेत्र की विभिन्न पंचायतों से आए सैकड़ों ग्रामीणों, महिलाओं और युवाओं की गूंज ने यह साफ कर दिया कि अपने पसीने की कमाई और कानूनी अधिकार के लिए मजदूर अब चुप बैठने वाला नहीं है।
विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए पीसीसी सचिव योगेंद्र सिंह परमार ने सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने बेहद भावुक और कड़े शब्दों में कहा कि नरेगा कोई मामूली योजना या सरकारी खैरात नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण भारत के उन करोड़ों परिवारों के लिए जीवनरेखा है जो अपनी मेहनत से देश का निर्माण करते हैं। परमार ने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार बजट में कटौती और जटिल तकनीकी अड़चनों का जाल बुनकर इस ऐतिहासिक योजना को धीरे-धीरे खत्म करने की साजिश रच रही है। उन्होंने दोटूक शब्दों में चेतावनी दी कि मजदूरों के हितों से किया जा रहा यह खिलवाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और कांग्रेस पार्टी सड़क से सदन तक इस लड़ाई को लड़ेगी।
मजदूरों की समस्याओं पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए योगेंद्र सिंह परमार ने कहा कि जब भीषण गर्मी और विपरीत परिस्थितियों में ग्रामीण माताएं, बहनें और युवा तगारी-फावड़ा उठाकर काम करते हैं, तब जाकर गांवों का विकास सुनिश्चित होता है। उन्होंने सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि मजदूरों को उनके पसीने की कमाई समय पर न मिलना भाजपा सरकार की सबसे बड़ी प्रशासनिक और नैतिक विफलता है। "नाम बदलने की राजनीति" पर प्रहार करते हुए परमार ने कहा कि सरकार ने केवल योजनाओं के नाम बदलकर वाहवाही लूटने का काम किया है, जबकि जमीनी हकीकत यह है कि मजदूरों के मुंह से निवाला छीना जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल नाम बदलने से गरीबों का पेट नहीं भरता, इसके लिए समय पर काम और काम का उचित दाम मिलना अनिवार्य है।
पंचायत स्तरीय इस विरोध प्रदर्शन में जिस तरह से भारी संख्या में जनसमूह उमड़ा, उसने प्रशासन और सत्ता पक्ष की नींद उड़ा दी है। प्रदर्शनकारियों ने एक स्वर में मांग की कि नरेगा में व्याप्त विसंगतियों को तत्काल दूर किया जाए और भुगतान की प्रक्रिया को पारदर्शी व त्वरित बनाया जाए। इस "नरेगा बचाओ संग्राम" ने कुंभलगढ़ में एक बड़े जन-आंदोलन की नींव रख दी है, जो आने वाले समय में सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है। कार्यक्रम के अंत में परमार ने संकल्प दोहराया कि जब तक अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति को उसका अधिकार नहीं मिल जाता, यह संग्राम थमेगा नहीं।

Pratahkal Bureau
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