कुंभलगढ़ में गूंजा 'नरेगा बचाओ संग्राम': पीसीसी सचिव योगेन्द्र सिंह परमार ने संभाला मोर्चा, भ्रष्टाचार के खिलाफ मजदूरों का भारी सैलाब
राजसमंद के कुंभलगढ़ में पीसीसी सचिव योगेन्द्र सिंह परमार के नेतृत्व में 'नरेगा बचाओ संग्राम' का आगाज हुआ। तलादरी, काकरवा और कुंचोली सहित कई पंचायतों में उमड़े मजदूरों के सैलाब ने भ्रष्ट सिस्टम को खुली चुनौती दी है। परमार ने सरकार पर नरेगा को खत्म करने का आरोप लगाते हुए श्रमिकों के हक की लड़ाई तेज करने का संकल्प लिया है।

कुंभलगढ़ (राजसमंद): राजस्थान के राजसमंद जिले में स्थित कुंभलगढ़ की धरा पर इन दिनों सियासत की नहीं, बल्कि मजदूरों के हक की हुंकार सुनाई दे रही है। 'नरेगा बचाओ संग्राम' के तहत पंचायतों में उमड़ रहा श्रमिकों का भारी सैलाब इस बात का गवाह है कि ग्रामीण अंचलों में व्यवस्था के खिलाफ आक्रोश चरम पर है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) के सचिव योगेन्द्र सिंह परमार की इस बड़ी पहल ने न केवल प्रशासनिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है, बल्कि इसे भ्रष्ट सिस्टम के खिलाफ एक खुली चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।
परमार ने जब तलादरी, काकरवा, ओडा, कनुजा, कुंचोली, बनोकड़ा, पीपला और उसर जैसी पंचायतों का सघन दौरा शुरू किया, तो नजारा किसी चुनावी रैली जैसा नहीं, बल्कि एक जन-आंदोलन जैसा प्रतीत हुआ। उनके चेहरे पर सियासत की चमक के बजाय हर वर्ग के लोगों की पारिवारिक और आर्थिक स्थिति को मजबूत करने का दृढ़ संकल्प साफ दिखाई दिया। चौपालों पर आयोजित इन बैठकों में योगेन्द्र सिंह परमार ने केवल भाषणबाजी तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि एक संवेदनशील जननायक की तरह लोगों के बीच बैठकर उनके अभावों और समस्याओं को अपनी डायरी में दर्ज किया। उनका उद्देश्य स्पष्ट है कि इन मजलूमों की आवाज को सत्ता के ऊंचे गलियारों तक पहुंचाया जाए और उन्हें उनका वाजिब हक दिलाया जाए।
दौरे के दौरान श्रमिकों ने अपनी व्यथा सुनाते हुए बताया कि किस तरह नरेगा जैसी महत्वपूर्ण योजना अब प्रशासनिक शिथिलता की भेंट चढ़ती जा रही है। पीसीसी सचिव ने भाजपा सरकार पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि मनरेगा जैसी ग्रामीण जीवन रेखा को महज एक कागजी योजना बनाकर खत्म करने की साजिश रची जा रही है। पंचायतों में उमड़े इस जन-सैलाब ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यदि मजदूरों के अधिकारों के साथ खिलवाड़ किया गया, तो यह संग्राम आने वाले समय में एक बड़े विद्रोह का रूप ले सकता है। योगेन्द्र सिंह परमार की यह पहल अब कुंभलगढ़ के प्रत्येक गांव और ढाणी में चर्चा का विषय बनी हुई है, जो सीधे तौर पर सत्तासीन व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगाती है।

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