आमेट: कोठेश्वर महादेव मंदिर में फाल्गुनी शुक्ला ग्यारस पर मेला आयोजित
खाखरमाला के टीकर गांव स्थित कोठारी नदी तट पर उमड़ा श्रद्धालुओं का जनसैलाब, भजन-सत्संग के साथ चंग की थाप पर फागण गीतों की रही धूम।

आमेट के खाखरमाला स्थित कोठेश्वर महादेव मंदिर में फाल्गुनी शुक्ला ग्यारस मेले के दौरान दर्शन के लिए उमड़ी श्रद्धालुओं की भारी भीड़।
आमेट। उपखंड क्षेत्र के खाखरमाला ग्राम पंचायत के टीकर गांव स्थित कोठारी नदी तट पर विराजित श्री कोठेश्वर महादेव मंदिर परिसर में फाल्गुनी शुक्ला ग्यारस के अवसर पर एक दिवसीय मेले का भव्य आयोजन हुआ। प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी मेले में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी और पूरा क्षेत्र भोलेनाथ के जयकारों से गूंज उठा। धार्मिक आस्था, लोक परंपरा और ग्रामीण संस्कृति का संगम बने इस मेले ने क्षेत्र में उल्लास और उत्साह का वातावरण बना दिया।
भजन-सत्संग से भक्तिमय हुआ वातावरण
मंदिर के पुजारियों ने बताया कि "हर वर्ष फाल्गुनी शुक्ला ग्यारस को यहां पारंपरिक रूप से मेले का आयोजन किया जाता है।" मेले से पूर्व रात्रि में मंदिर परिसर में भगवान भोलेनाथ के भजन-सत्संग का आयोजन हुआ, जिसमें ग्रामीणों एवं श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। भक्ति रस में डूबे श्रद्धालुओं ने देर रात तक भजन-कीर्तन कर वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
विशेष श्रृंगार और महाआरती का आयोजन
इस अवसर पर प्रातःकाल पुजारी द्वारा भगवान भोलेनाथ एवं माता पार्वती का विशेष श्रृंगार किया गया तथा मंदिर परिसर को आकर्षक सजावट से सजाया गया। सुबह और सायंकाल महाआरती का आयोजन हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। महाआरती के पश्चात दर्शनार्थियों की लंबी कतारें लग गईं और दिनभर मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। श्रद्धालुओं ने श्रद्धाभाव से भगवान के दर्शन कर सुख-समृद्धि की कामना की।
विभिन्न क्षेत्रों से उमड़ा जनसैलाब और व्यापारिक गतिविधियां
मेले में आसपास के गांव—कमेरी, टीकर, खाखरमाला, बियाना, कुआथल, दोलाजी का खेड़ा, मानसिंहजी का खेड़ा, धुकलखेड़ा, राण, सेलागुड़ा, ढेलाणा, आसन, नारुजी का गुड़ा, डेगाणा एवं आमेट सहित दूर-दराज क्षेत्रों से बड़ी संख्या में ग्रामीण पहुंचे। मेले में विभिन्न प्रकार की स्टॉलें आकर्षण का केंद्र रहीं। महिलाओं के लिए मनिहारी एवं श्रृंगार सामग्री, बच्चों के खिलौने, मिट्टी के बर्तन तथा घरेलू उपयोग की वस्तुओं की दुकानों पर दिनभर चहल-पहल रही। ग्रामीणों ने खरीदारी के साथ मेले का लुफ़्त उठाया।
चंग की थाप पर फागण और प्रशासनिक व्यवस्थाएं
वहीं आसपास के गांवों से युवा एवं बुजुर्ग टोलियां चंग की थाप पर भगवान भोलेनाथ के फागुण गीत गाते और नृत्य करते हुए मंदिर पहुंचे। मंदिर प्रांगण में पुष्प एवं गुलाल उड़ाकर श्रद्धालुओं ने भोलेनाथ के साथ फागण खेला और परंपरा का निर्वहन किया। आयोजन के दौरान प्रशासनिक स्तर पर भी व्यवस्थाएं संतोषजनक रहीं, जिससे श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा नहीं हुई।

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