दुर्घटनाग्रस्त गौमाताओं के उपचार हेतु 'द खंडा क्रेजी ट्रक यूनियन' ने बढ़ाई मदद के हाथ, दिए 2.01 लाख
केलवा की 'द खंडा क्रेजी ट्रक यूनियन' ने गौसेवा की मिसाल पेश करते हुए दुर्घटनाग्रस्त गौमाताओं के लिए 2.01 लाख रुपये का सहयोग दिया है। सियाणा स्थित गौशाला में आए इस बड़े बदलाव की पूरी कहानी और सेवा के इस महायज्ञ की विशेष रिपोर्ट यहाँ पढ़ें।

सियाणा में श्री धेनु गोपाल गौशाला के प्रतिनिधि को सहायता राशि का चेक सौंपते 'द खंडा क्रेजी ट्रक यूनियन' के सदस्य और पदाधिकारी।
गौसेवा और मानवीय संवेदनाओं का अनूठा संगम उस समय देखने को मिला जब सड़क हादसों में घायल और निराश्रित गौमाताओं की रक्षा के लिए समाज का एक बड़ा वर्ग एकजुट हुआ। केलवा स्थित 'द खंडा क्रेजी ट्रक यूनियन' ने अपनी सामाजिक जिम्मेदारी का परिचय देते हुए श्री धेनु गोपाल गौशाला, सियाणा के लिए 2 लाख 1 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की है। यह सहयोग राशि न केवल गौशाला के संचालन को गति प्रदान करेगी, बल्कि दुर्घटनाग्रस्त गौवंश के उपचार और उनके पुनर्वास के लिए एक नई उम्मीद बनकर सामने आई है।
मुख्य कार्यक्रम के दौरान, यूनियन के अध्यक्ष लक्ष्मण गुर्जर गोमती ने औपचारिक रूप से गौशाला प्रतिनिधि धरमू गुर्जर को 2.01 लाख रुपये का चेक सौंपा। इस दौरान लक्ष्मण गुर्जर ने कहा कि भारतीय संस्कृति में गौसेवा का स्थान सर्वोपरि है और सड़क दुर्घटनाओं में असहाय होकर दम तोड़ते गौवंश को बचाना हम सभी का नैतिक दायित्व है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ट्रक यूनियन सदैव समाजोपयोगी और धार्मिक कार्यों के प्रति समर्पित रही है और यह आर्थिक सहयोग उसी सेवा भावना का एक छोटा सा हिस्सा है।
गौशाला प्रबंधन ने इस उदार योगदान के लिए यूनियन का आभार प्रकट करते हुए बताया कि वर्तमान में गौशाला में घायल और निराश्रित गौवंश की एक बड़ी संख्या मौजूद है। प्राप्त धनराशि का पूर्ण उपयोग घायल गौमाताओं के लिए आवश्यक दवाइयों, विशेषज्ञों द्वारा उपचार, उनके लिए पौष्टिक चारे की व्यवस्था और बुनियादी सुविधाओं को सुदृढ़ करने के लिए किया जाएगा। प्रबंधन ने कहा कि निराश्रित पशुओं की सेवा के लिए निरंतर समाज के सक्रिय सहयोग की आवश्यकता बनी रहती है, और इस प्रकार की सहायता से संस्था को बड़ी राहत मिली है।
कार्यक्रम में यूनियन के कोषाध्यक्ष धरमू गुर्जर के साथ शौकीन भाई, हमेर सिंह, बंशी भाई, दीपक कुमार, राधेश्याम, नारायण, बाबूलाल, कालू बा, मणीराम और मुकेश कुमार सहित कार्यकारिणी के कई सदस्य उपस्थित थे। वक्ताओं ने अपने संबोधन में कहा कि गौशालाएं केवल गौवंश के संरक्षण का स्थान नहीं हैं, बल्कि ये मानवीय संवेदनाओं और परोपकार को पोषित करने वाले केंद्र हैं। समाज के विभिन्न वर्गों का ऐसा सहयोगात्मक दृष्टिकोण आने वाले समय में अन्य लोगों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनेगा। समारोह का समापन गौसेवा के संकल्प के साथ हुआ, जिसमें यूनियन के सदस्यों ने भविष्य में भी निरंतर सहयोग का भरोसा दिलाया, ताकि किसी भी गौवंश को बेसहारा या उपचार से वंचित न रहना पड़े।

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