खमनौर: डाबुन भैरुनाथ मंदिर मेले में जीवंत हुई भीली संस्कृति
ज्येष्ठ पूर्णिमा पर आयोजित इस मेले में भील समाज के लोगों ने थाली-मादल की थाप पर पारंपरिक गायन और पौराणिक 'खूंदना' नृत्य की प्रस्तुति देकर सुख-समृद्धि की कामना की।

खमनौर के डाबुन स्थित भैरुनाथ मंदिर परिसर में ज्येष्ठ पूर्णिमा मेले के अवसर पर पूजा-अर्चना और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की तैयारी के लिए बैठक करते भील समाज डावुन चौखला के पदाधिकारी और सर्व समाज के ग्रामीण।
खमनौर के समीपवर्ती डाबुन स्थित सुप्रसिद्ध भैरुनाथ मंदिर के वार्षिक मेले में आदिवासियों की पौराणिक भीली संस्कृति का वैभव आज भी पूरी जीवंतता के साथ दृष्टिगोचर हुआ। ज्येष्ठ माह की पूर्णिमा के पावन अवसर पर आयोजित इस ऐतिहासिक मेले में श्रद्धा और परंपरा का अनूठा संगम देखने को मिला, जहाँ डाबून गांव के सर्व समाज के लोगों ने एकत्रित होकर भैरु जी की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। राजस्थान भील समाज विकास समिति के प्रदेश मीडिया प्रभारी गुलाबचंद भील ने कार्यक्रम की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि सदियों से चली आ रही परंपरा के अनुसार, डाबून के इस भैरुनाथ स्थानक पर आयोजित वार्षिक पूर्णिमा मेले में सर्व समाज के भोपाओं द्वारा श्रद्धापूर्वक ध्वजा चढ़ाई गई।
यह मेला भील समाज की प्राचीन सांस्कृतिक विरासत का जीवंत साक्षी बना, जहाँ आदिवासी भील समाज के कलाकारों ने थाली-मादल की थाप और ढाक-ढपली की गूँज के बीच माता जी की लावणी, भेरूजी का नामा तथा 'भारत बोलना' जैसे पारंपरिक गायन से समूचे वातावरण को भक्तिमय कर दिया। भील समाज डावुन चौखला के अध्यक्ष मेघराज भील ने मेले के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि ज्येष्ठ पूर्णिमा पर लगने वाले इस वृहद मेले में जनजीवन की रोजमर्रा की वस्तुओं सहित विभिन्न उपयोगी सामग्रियों का बाजार सजता है, वहीं बच्चों के मनोरंजन हेतु डोलर, झूला और चकरी मुख्य आकर्षण का केंद्र रहते हैं, जिनका आनंद स्त्री, पुरुष और बच्चों द्वारा समान रूप से लिया जाता है।
आस्था के इस केंद्र पर न केवल आसपास के क्षेत्र का सर्व समाज, बल्कि दूर-दराज के आदिवासी गांवों का हुजूम उमड़ पड़ता है। परंपरा के अनुसार, हर घर की बहन-बेटियाँ नारियल और अगरबत्ती लेकर यहाँ मत्था टेकने और अपने परिवार की सुख-शांति की कामना करने अनिवार्य रूप से पहुँचती हैं। मेले का मुख्य आकर्षण पौराणिक काल से प्रचलित भील समाज का पसंदीदा 'खूंदना' नृत्य रहा, जिसे महिला और पुरुष समूहों ने अपनी पारंपरिक शैली में प्रस्तुत किया। अंत में, मंदिर मंडल कमेटी द्वारा सभी दर्शनार्थियों को प्रसाद वितरित किया गया, जो क्षेत्र की सर्वधर्म समभाव की भावना और सांस्कृतिक एकता को सुदृढ़ करता है।

Vinod Paliwal, Rajsamand
नाम: विनोद पालीवाल
वर्तमान पद: संवाददाता (खमनोर, नाथद्वारा), अध्यक्ष (हल्दीघाटी प्रेस क्लब)
कार्यक्षेत्र: खमनोर , हल्दीघाटी, तहसील खमनोर, जिला राजसमंद (राजस्थान)
बीट : राजनीति, स्वास्थ्य, और प्रशासन
विशेष कवरेज: जन समस्याएं, सरकारी योजनाएं, और भ्रष्टाचार से जुड़ी प्रशासनिक जांच
परिचय
विनोद पालीवाल राजस्थान के राजसमंद जिले के अंतर्गत आने वाले खमनोर और नाथद्वारा क्षेत्र के एक वरिष्ठ पत्रकार हैं। वर्तमान में वह 'प्रातःकाल' के संवाददाता के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं, साथ ही वह हल्दीघाटी प्रेस क्लब के अध्यक्ष पद का दायित्व भी संभाल रहे हैं। विनोद पालीवाल मुख्य रूप से क्षेत्र की राजनीति, स्वास्थ्य व्यवस्था और प्रशासनिक गतिविधियों को कवर करते हैं। स्थानीय जन समस्याओं को उठाना, सरकारी योजनाओं की जमीनी हकीकत दिखाना और प्रशासनिक स्तर पर भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों की रिपोर्टिंग करना उनकी कार्यशैली का मुख्य हिस्सा है।
पत्रकारिता का अनुभव
विनोद पालीवाल को पत्रकारिता के क्षेत्र में 26 वर्षों का एक लंबा और व्यापक अनुभव है। वह सन 2000 से लगातार नियमित रूप से 'प्रातःकाल' समाचार पत्र के साथ जुड़कर क्षेत्र में रिपोर्टिंग कर रहे हैं।
शैक्षणिक योग्यता (Education)
- कला स्नातक (B.A.)
- कला स्नातकोत्तर - लोक प्रशासन (M.A. in Public Administration / लोक प्रशासन)
