खमनोर में पुरातत्व विभाग के नियमों के विरुद्ध 6 मंजिला अवैध निर्माण
रक्ततलाई के पास नियमों को ताक पर रखकर प्रधान और सरपंच द्वारा बहुमंजिला भवन निर्माण पर विधायक ने विधानसभा में कार्रवाई की मांग की।

खमनोर की ऐतिहासिक रणभूमि रक्ततलाई के प्रतिबंधित क्षेत्र में बने अवैध छह मंजिला भवन का दृश्य, जिसके विरुद्ध स्थानीय ग्रामीणों और विधायक ने मोर्चा खोला है।
सरपंच की दोहरी कार्यप्रणाली और अवैध निर्माण
- सरपंच दूसरों को तो इस दायरे में भवन निर्माण की स्वीकृति नहीं दे रही, पर खुद बना रही है।
- ऐतिहासिक रणभूमि के ठीक पास भवन निर्माण के लिए सड़क पर गिट्टी, रेती, पत्थर, और ईंटें पड़ी रहती हैं।
- आधी सड़क भी गिट्टी डालकर अपने लिए उपयोग में ली जा रही है।
नियमों की अवहेलना और पट्टों का खेल
कई बार ग्रामीणों ने पुरातत्व विभाग को पत्र देने के बावजूद इसी दायरे में सरपंच के परिवार की पुश्तैनी जमीन को भी प्लॉट को भी पुराना बता के पट्टे भी जारी कर रही है, ताकि उसकी कोई शिकायत नहीं करे। इसी दायरे में कई पट्टे भी जारी कर दिए गए हैं।
"भारतीय पुरातत्व विभाग के नियमों की धज्जियां उड़ा बनाया रणभूमि रक्ततलाई के पास बनाया निर्माण।"
प्रशासनिक और न्यायिक आदेशों की अनदेखी
वर्तमान में उच्च न्यायालय के आदेश की पालना जिला कलेक्टर अरुण कुमार हसीजा और पुरातत्व विभाग सहित कई विभाग कर रहे हैं। उच्च न्यायालय के आदेश की पालना में वही निवर्तमान प्रधान भेरूलाल खटीक, और सरपंच प्रशासक ममता वीरवाल ने अपने कार्यकाल में 5 मंजिला बिल्डिंग बना कर भारतीय पुरातत्व विभाग के आदेश क्षेत्र में निर्माण नहीं करने के निर्देशों की अवहेलना की है।
जेडजी प्रधान और बहू एक ही परिवार ने खुलेआम निर्देशों की अवहेलना करना चर्चा के साथ प्रशासन की अवहेलना जारी है। चर्चा में यह भी है कि प्रधान और सरपंच कांग्रेस के पदाधिकारी होकर भी भाजपा के डबल इंजन सरकार को भी नजरअंदाज कर रहे हैं।
हटाए गए अतिक्रमण, पर प्रधान-सरपंच को मिली छूट?
- रणभूमि रक्त तलाई तक पहुंचने मार्ग पर बने वर्षों पुराने मकानों के आगे से सीढ़ियां और टीन शेड हटाया गया।
- पर सरपंच और प्रधान को छोड़ने की चर्चा चरम पर है।
- कई बार प्रशासन को भी अवगत कराने के बावजूद भी प्रशासन उच्च न्यायालय के आदेश की अवहेलना में है।
विधानसभा में गूंजा मुद्दा
भाजपा में संतोष भी जताया कि उक्त मनमर्जी से बने भवन के मुद्दे को विधानसभा में विधायक महाराणा विश्वराज सिंह मेवाड़ ने भी कार्यवाही का आव्हान किया। क्षेत्रीय रणभूमि विकास समिति ने भी भारतीय पुरातत्व विभाग को पत्र भेजा है।

Pratahkal Bureau
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