खमनोर। हल्दीघाटी की पावन धरा पर महाराणा प्रताप के शौर्य को पुनर्जीवित करने वाले और मेवाड़ की गाथा को वैश्विक पटल पर अंकित करने वाले डॉ. मोहनलाल श्रीमाली की प्रथम पुण्यतिथि पर आज खमनोर का कोना-कोना श्रद्धावनत नजर आया। हल्दीघाटी-बलीचा स्थित महाराणा प्रताप संग्रहालय परिसर में आयोजित इस गरिमामयी श्रद्धांजलि सभा में न केवल मेवाड़, बल्कि प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से आए लोगों ने नम आंखों से उस व्यक्तित्व को याद किया, जिसने अपना संपूर्ण जीवन राष्ट्रभक्ति और इतिहास संरक्षण के लिए समर्पित कर दिया।

हल्दीघाटी के कण-कण में वीरता का संचार करने वाले डॉ. श्रीमाली को याद करते हुए वक्ताओं ने उन्हें मेवाड़ का सच्चा सपूत बताया। सभा में उपस्थित शिक्षाविदों, साहित्यकारों और जनप्रतिनिधियों ने एक स्वर में कहा कि यदि आज नई पीढ़ी महाराणा प्रताप और उनके सहयोगियों के बलिदान से परिचित है, तो उसमें डॉ. श्रीमाली के द्वारा स्थापित संग्रहालय और उनके अनथक प्रयासों का अविस्मरणीय योगदान है। यह केवल एक पुण्यतिथि का आयोजन नहीं था, बल्कि सेवा और समर्पण के उस महायज्ञ की याद थी, जिसे डॉ. श्रीमाली ने ताउम्र प्रज्वलित रखा।

इस पावन अवसर पर मानवता की सेवा का संकल्प भी दोहराया गया। जहाँ एक ओर अतिथियों और पर्यटकों ने डॉ. श्रीमाली की तस्वीर पर पुष्पांजलि अर्पित की, वहीं दूसरी ओर उनकी स्मृति में स्वैच्छिक रक्तदान शिविर का आयोजन हुआ, जिसमें दर्जनों युवाओं ने बढ़-चढ़कर रक्त की आहुति दी। इसके साथ ही, डॉ. श्रीमाली के शिक्षा के प्रति प्रेम को जीवंत रखते हुए स्कूली बच्चों को शिक्षण सामग्री का वितरण किया गया, ताकि भविष्य की पौध भी ज्ञान के प्रकाश से सुसज्जित हो सके।

कार्यक्रम के दौरान मेवाड़ की प्रमुख हस्तियों की उपस्थिति ने इस आयोजन को और अधिक गरिमामय बना दिया। इस अवसर पर भाजपा जिलाध्यक्ष जगदीश पालीवाल, विमला श्रीमाली, प्रबंध निदेशक डॉ. भूपेंद्र श्रीमाली, खमनोर पंचायत समिति के विकास अधिकारी हनुवीरसिंह, उदयपुर नगर निगम के पूर्व प्रतिपक्ष नेता दिनेश श्रीमाली, डॉ. महेंद्र श्रीमाली, एडवोकेट योगेश श्रीमाली, भाजपा जिला मंत्री प्रदीप काबरा, संदीप श्रीमाली, खमनोर मंडल अध्यक्ष मदनसिंह, पूर्व अध्यक्ष कैलाश श्रीमाली, देलवाड़ा मंडल अध्यक्ष जितेंद्र सिंह, महाराणा प्रताप एकीकृत व्यापार मंडल अध्यक्ष रामचंद्र पालीवाल, जय हल्दीघाटी नवयुवक मंडल अध्यक्ष गोपेश माली, पूर्व अध्यक्ष चेतन पंवार, रणभूमि विकास समिति अध्यक्ष नवनीत पालीवाल, विनोद पालीवाल और शरद बाग़ोरा सहित विभिन्न सामाजिक एवं राजनीतिक संगठनों के पदाधिकारी मौजूद रहे।

डॉ. मोहनलाल श्रीमाली का जाना मेवाड़ के सांस्कृतिक इतिहास के एक स्वर्णिम अध्याय का अंत था, लेकिन उनकी प्रथम पुण्यतिथि पर उमड़ा यह जनसैलाब इस बात का प्रमाण है कि उनके द्वारा बोए गए राष्ट्रभक्ति और गौरव के बीज आज एक विशाल वटवृक्ष का रूप ले चुके हैं। उनकी विरासत केवल पत्थरों के संग्रहालय में नहीं, बल्कि मेवाड़ के जन-मानस के हृदय में सदैव सुरक्षित रहेगी।

Pratahkal Newsroom

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