खमनोर चारभुजानाथ मंदिर में 24 श्रेणी पालीवाल समाज का समागम और नवध्वजारोहण
खमनोर ब्रह्मपुरी स्थित प्राचीन मंदिर में सामाजिक एकता, मंदिर विकास और समाजोत्थान के संकल्प के साथ विधि-विधान से चारों मंदिरों पर नई ध्वजाएं चढ़ाई गईं।

राजसमंद जिले के खमनोर स्थित ब्रह्मपुरी में आयोजित 24 श्रेणी पालीवाल ब्राह्मण समाज के समागम के दौरान मंदिर विकास और सामाजिक एकता प्रस्तावों के पत्रक दिखाते समाज के वरिष्ठ पदाधिकारी और सदस्य।
श्रेणी पालीवाल ब्राह्मण समाज के आराध्य प्रभु भगवान श्रीचारभुजानाथ के खमनोर ब्रह्मपुरी स्थित अतिप्राचीन मंदिर में मंगलवार को परंपरागत नवध्वजारोहण एवं 24 खेड़ा समागम का भव्य आयोजन संपन्न हुआ। इस धार्मिक एवं सामाजिक उत्सव में ठाकुरजी की महाआरती के पश्चात समाजजनों ने एकत्रित होकर मंदिर विकास, सामाजिक एकता और समाजोत्थान के विभिन्न बिंदुओं पर गहन वैचारिक विमर्श किया, जिसमें समाज के कल्याण और प्रगति के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय भी सर्वसम्मति से लिए गए।
इस पावन अवसर पर मंदिर के सेवक सतीश पालीवाल एवं मुकेश पुरोहित ने भगवान चारभुजानाथ का विशेष वस्त्राभूषणों एवं सुगंधित पुष्पों से अलौकिक व मनोहारी श्रृंगार किया। प्रातः 8 बजे इस भव्य आयोजन के लाभार्थी एवं गांवगुड़ा मूल के निवासी तथा 24 श्रेणी पालीवाल समाज इंदौर के अध्यक्ष राकेश जोशी, खमनोर के फतेहलाल पालीवाल, उमेश पालीवाल और चैतन्यप्रकाश पालीवाल ने ठाकुरजी के विग्रह स्वरूप को पूर्ण श्रद्धा के साथ सिर पर धारण किया तथा ध्वजाओं को थाल में सजाकर शोभायात्रा का शुभारंभ किया।
इस भव्य शोभायात्रा में स्थानीय निवासियों सहित सुदूर क्षेत्रों से आए आगंतुक महिला, पुरुष एवं बच्चों सहित संपूर्ण समाजजन ढोल-नगाड़े की गगनभेदी धुन पर उत्साहपूर्वक झूमते हुए चल रहे थे। यह शोभायात्रा नगर के प्रमुख मार्गों यथा सदर बाजार, बड़ा चौराहा, मालियों का नोहरा और रक्ततलाई के सामने से होते हुए अत्यंत हर्षोल्लास के साथ मंदिर प्रांगण में पहुंची। मंदिर परिसर में पहुंचते ही उपस्थित विद्वानों द्वारा संपूर्ण विधि-विधान और मंत्रोच्चार के साथ ध्वजाजी की पूजा-अर्चना की गई तथा ठाकुरजी की दिव्य महाआरती उतारी गई।
इसी पावन क्रम में चारभुजानाथ मंदिर के गर्भगृह के मुख्य गुंबद पर लाभार्थी परिवार द्वारा मुख्य ध्वजा का सफल आरोहण किया गया। इसके साथ ही मंदिर परिसर में ही स्थापित शिव मंदिर, गजानन मंदिर और हनुमान मंदिर की पुरानी ध्वजाएं भी उपस्थित लाभार्थी परिवारों की गरिमामयी उपस्थिति में बदली गईं और पूर्ण धार्मिक मर्यादा के साथ वहां नवध्वजाएं आरोहित की गईं। इस अलौकिक क्षण के दौरान संपूर्ण मंदिर परिसर चारभुजानाथ की जय, छोगाला छैल की जय, गिरिराज धरण की जय, मोर मुकुट बंशी वाले की जय और लाड़ले लाल की जय के गगनभेदी जयकारों से गुंजायमान हो उठा। उपस्थित अनगिनत भक्तों ने प्रभु चारभुजानाथ के अलौकिक दर्शन कर क्षेत्र की सुख, समृद्धि और खुशहाली की मंगल कामना की। इसके बाद पालीवाल समाज के इस महासमागम की अग्रिम कड़ियाँ संपन्न हुईं, जो समाज की सुदृढ़ परंपरा और अटूट आस्था को रेखांकित करती हैं।

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