केलवा: राजसमंद–भीलवाड़ा हाईवे की सर्विस रोड बनी 'खूनी राह', कंटीली झाड़ियों के जाल से हादसों का साया
राजसमंद-भीलवाड़ा हाईवे की सर्विस रोड पर प्रशासन की अनदेखी से उपजी कंटीली झाड़ियां राहगीरों के लिए काल बन रही हैं। केलवा में बदहाल सर्विस रोड के कारण आए दिन हो रहे हादसों और स्थानीय ग्रामीणों के आक्रोश पर आधारित एक विशेष रिपोर्ट। जानिए कैसे झाड़ियों के जाल ने खतरे में डाली है हजारों की जान।

केलवा (राजसमंद)। राजसमंद से भीलवाड़ा को जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग पर प्रशासनिक उदासीनता और विभागीय अनदेखी की एक भयावह तस्वीर उभर कर सामने आ रही है। हाईवे की सर्विस रोड, जिसे राहगीरों और स्थानीय निवासियों की सुगमता के लिए बनाया गया था, आज वह खुद अपनी बदहाली पर आंसू बहा रही है। लंबे समय से रखरखाव के अभाव में इस मार्ग के दोनों ओर उगी कंटीली झाड़ियों और घनी जंगली घास ने पूरे रास्ते को अपने आगोश में ले लिया है, जिससे यह मार्ग राहगीरों के लिए किसी डरावने सपने से कम नहीं रह गया है।
मार्ग की स्थिति इतनी विकट हो चुकी है कि पैदल चलना तो दूर, दुपहिया वाहन चालकों के लिए भी यहां से सुरक्षित गुजरना एक बड़ी चुनौती बन गया है। झाड़ियों का विस्तार सड़क के मुख्य हिस्से तक हो चुका है, जिसके कारण मार्ग संकरा हो गया है। स्थानीय निवासी शांतिलाल, नरेश कुमार और दिनेश कुमार ने रोष व्यक्त करते हुए बताया कि ये कंटीली झाड़ियां न केवल राहगीरों के कपड़ों को फाड़ देती हैं, बल्कि अक्सर हाथ-पैरों में गहरी चोट का कारण भी बनती हैं। कई बार झाड़ियों से बचने के प्रयास में दुपहिया वाहन चालकों का संतुलन बिगड़ जाता है, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो जाते हैं। महिला निवासी कमलाबाई और ताराबाई ने भी अपनी पीड़ा साझा करते हुए कहा कि प्रशासन की कुंभकर्णी नींद के कारण आए दिन लोग चोटिल हो रहे हैं, लेकिन बार-बार की शिकायतों के बावजूद स्थिति जस की तस बनी हुई है।
इस संकट का एक अन्य गंभीर पहलू यह है कि सर्विस रोड संकरी होने के कारण लोग अपनी जान जोखिम में डालकर मुख्य हाईवे की ओर रुख करने को मजबूर हैं। तेज़ रफ्तार वाहनों के बीच पैदल यात्रियों और छोटे वाहनों का मुख्य मार्ग पर आना किसी बड़ी अनहोनी को खुला निमंत्रण दे रहा है। रात के अंधेरे में यह खतरा दोगुना हो जाता है, जब दृश्यता कम होने के कारण वाहन चालक अचानक इन झाड़ियों की चपेट में आ जाते हैं। अचानक ब्रेक लगाने या झाड़ियों से बचने के चक्कर में पीछे से आने वाले वाहनों के टकराने की आशंका सदैव बनी रहती है।
ग्रामीणों का आरोप है कि भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और संबंधित विभागों को कई बार इस समस्या से अवगत कराया गया है, लेकिन धरातल पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। स्थानीय लोगों ने अब दो टूक शब्दों में मांग की है कि सर्विस रोड पर तत्काल झाड़ियों की कटाई सुनिश्चित की जाए और नियमित सफाई व्यवस्था लागू की जाए। यदि समय रहते जिम्मेदार विभाग नहीं जागे, तो भविष्य में होने वाली किसी भी बड़ी दुर्घटना की नैतिक और कानूनी जिम्मेदारी सीधे तौर पर संबंधित अधिकारियों की होगी। फिलहाल, केलवा क्षेत्र के ग्रामीण भय और असुरक्षा के साये में जीने को मजबूर हैं, और उन्हें प्रतीक्षा है कि कब प्रशासन की नींद टूटेगी और उन्हें इस 'कांटों भरे सफर' से मुक्ति मिलेगी।

Pratahkal Bureau
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