रामनाम से गति व मति की प्राप्ति: संत निर्मल राम महाराज के प्रवचन
केलवा के शांतिनगर में श्रीमद् भागवत कथा के समापन पर संत निर्मल राम महाराज ने नाम-सिमरन की महिमा बताई और विराट हिंदू परिषद सम्मेलन के पोस्टर का विमोचन किया।

केलवा क्षेत्र के शांतिनगर में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के समापन अवसर पर प्रवचन देते संत निर्मल राम महाराज और उपस्थित श्रद्धालुगण।
केलवा क्षेत्र के शांतिनगर में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के अंतिम दिन श्रद्धा और भक्ति का भावपूर्ण वातावरण देखने को मिला। कथा वाचक संत निर्मल राम महाराज ने प्रवचन करते हुए कहा कि “रामनाम का स्मरण करने से मनुष्य को गति और मति दोनों की प्राप्ति होती है।”
सत्संग और नाम-सिमरन की महिमा
महाराज ने कहा कि सत्संग वह स्थान है जहां व्यक्ति बुराइयों का त्याग कर भक्ति मार्ग पर आगे बढ़ता है और जीवन की अनेक बाधाएँ स्वतः दूर हो जाती हैं। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि “कलयुग में केवल नाम ही आधार है। नाम-सिमरन से ही मनुष्य इस भवसागर को पार कर सकता है।” उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि “राजा परीक्षित ने तक्षक नाग के दंश से पूर्व ही नाम-स्मरण और कथा श्रवण के माध्यम से मोक्ष प्राप्त कर लिया था। यही नाम की महिमा है।” उन्होंने कहा कि संसार मकड़ी के जाल के समान है, जिसमें व्यक्ति फँसा रहता है, लेकिन भक्ति रूपी ज्ञान से इससे मुक्ति संभव है।
भक्ति मार्ग और भजन-कीर्तन
प्रवचन के दौरान महाराज ने भजन पंक्तियों में “आवेला भगवान मारे घर आवेला, हरि नाम प्यारा है परम धन हमारा, राम नाम के हीरे मोती” के भजनों की प्रस्तुति दी गई। उन्होंने संदेश दिया कि “त्यागमय जीवन बना लो।” उन्होंने कहा कि दूसरों से तुलना करने से दुःख बढ़ता है, इसलिए एकांत में रहकर भजन-कीर्तन करना ही परम धन है। जिस प्रकार भंवरा फूल से रस लेता है, उसी प्रकार भक्त की लगन भी भक्ति में परिवर्तित हो जाती है।
श्रीकृष्ण-उद्धव संवाद एवं यादव वंश कथा
सत्संग की महिमा बताते हुए महाराज ने श्रीकृष्ण-उद्धव संवाद का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि “भगवान श्रीकृष्ण ने उद्धव को सत्संग का महत्व समझाया, जिसके पश्चात उद्धव बद्रीनाथ धाम चले गए।” आगे उन्होंने यादव वंश के अंत की कथा सुनाते हुए बताया कि भगवान की माया से ही यादवों का संहार हुआ और अंततः भगवान श्रीकृष्ण ने भी बहेलिए द्वारा किए गए तीर प्रहार के माध्यम से लीला का समापन कर अपने धाम को प्रस्थान किया।
पोस्टर विमोचन एवं उपस्थित जनसमूह
कथा के अंतिम दिन श्रद्धालुओं की भारी उपस्थिति रही। कथा समापन पर सभी ने भक्ति भाव से हरिनाम संकीर्तन किया। वही बामन टुकड़ा विराट हिंदू परिषद सम्मेलन को लेकर महाराज श्री के हाथों पोस्टर का विमोचन किया गया।
उपस्थित श्रद्धालु एवं अतिथि:
- संयोजक: मोती राम तेली, माना राम तेली, रामलाल तेली, रतन लाल तेली
- पुरुष श्रद्धालु: राकेश तेली, नाथूलाल, प्रेमा राम, परसराम तेली, भरत, मुकेश, प्रिंस, हर्षित, दिनेश, विष्णु, बाबूलाल कोठारी, जगदीश दवे, मांगीलाल तेली, बंसीलाल तेली
- महिला श्रद्धालु: पनी बाई, रतनी बाई, पारसी बाई, प्रेमी बाई एवं अनेक श्रद्धालु

Mubarik Ajnabi, Rajsamand
नाम: मुबारिक-अजनबी
वर्तमान पद: प्रतिनिधि (प्रातःकाल, आमेट)
कार्यक्षेत्र: आमेट, जिला राजसमन्द (राजस्थान)
अनुभव: 25 वर्षों से पत्रकारिता का अनुभव
परिचय एवं कार्यक्षेत्र
मुबारिक-अजनबी राजस्थान के राजसमन्द जिले के आमेट तहसील क्षेत्र के अनुभवी पत्रकार हैं। वर्तमान में वह 'प्रातःकाल' के प्रतिनिधि के रूप में कार्यरत हैं। वह आमेट तहसील और उसके आसपास के ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों से नियमित रूप से रिपोर्टिंग करते हैं।
बीट (मुख्य विषय)
- विशेष कवरेज: आमेट तहसील क्षेत्र से क्राइम (अपराध) और सांस्कृतिक खबरों की विशेष रिपोर्टिंग।
- नियमित कवरेज: स्थानीय राजनीति, प्रशासन, कानून-व्यवस्था, सरकारी विभागों की कार्यप्रणाली और जनहित से जुड़े अन्य मुद्दे।
शैक्षणिक योग्यता (Education)
एम.ए. (M.A.) - कला स्नातकोत्तर की डिग्री।
