केलवा। क्षेत्र में निजी बस संचालकों की हड़ताल का सीधा असर ग्रामीण जनजीवन पर देखने को मिल रहा है। हड़ताल के चलते जहां बस सेवाएं प्रभावित हुई हैं, वहीं गांवों में आवागमन की समस्या गंभीर होती जा रही है। खासकर बुजुर्गों, दिव्यांगजनों और महिलाओं को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

परिवहन व्यवस्था ठप और ग्रामीणों की मुश्किलें

केलवा क्षेत्र में रोडवेज बसों की आवाजाही हाइवे तक ही सीमित है और बसें गांव के भीतर नहीं आ रही हैं। पूर्व में निजी बस संचालक यात्रियों को पुराने बस स्टैंड तक छोड़ देते थे, जिससे ग्रामीणों को सुविधा रहती थी। लेकिन वर्तमान हड़ताल के कारण यह व्यवस्था भी ठप हो गई है। ऐसे में यात्रियों को मुख्य सड़क से गांव तक पैदल या अन्य निजी साधनों से आना-जाना पड़ रहा है।

दैनिक जीवन पर पड़ता प्रतिकूल प्रभाव

ग्रामीणों का कहना है कि "अचानक परिवहन व्यवस्था प्रभावित होने से दैनिक मजदूरी करने वाले श्रमिकों, विद्यार्थियों और नौकरीपेशा लोगों को समय पर गंतव्य तक पहुंचने में कठिनाई हो रही है।" वहीं चिकित्सा संबंधी आवश्यक कार्यों के लिए बाहर जाने वाले मरीजों को भी परेशानी उठानी पड़ रही है।

टेंपो चालकों द्वारा आर्थिक शोषण के आरोप

स्थिति का लाभ उठाते हुए कुछ टेंपो चालकों द्वारा मनमाने तरीके से किराया वसूला जा रहा है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि "सामान्य दिनों की तुलना में किराया दोगुना तक लिया जा रहा है।" मजबूरी में यात्रियों को अधिक किराया देकर सफर करना पड़ रहा है। इससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।

प्रशासन से वैकल्पिक व्यवस्था की मांग

ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि "हड़ताल की स्थिति में वैकल्पिक परिवहन व्यवस्था सुनिश्चित की जाए तथा टेंपो चालकों की मनमानी पर अंकुश लगाया जाए।" साथ ही रोडवेज बसों को गांव के भीतर तक संचालित करने की भी मांग उठाई गई है, ताकि आमजन को राहत मिल सके।

Pratahkal Newsroom

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