केलवा। आस्था और अटूट श्रद्धा का एक विस्मयकारी स्वरूप राजस्थान के केलवा कस्बे में स्थित कचोलिया हनुमान मंदिर क्षेत्र में देखने को मिला है। चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर श्रद्धालु नैना लाल गमेती ने माताजी की आराधना हेतु ऐसी कठोर और दुर्लभ तपस्या का मार्ग चुना, जिसने जनमानस को हतप्रभ कर दिया है। नैना लाल ने अपनी अटूट भक्ति को प्रदर्शित करते हुए पूरे नौ दिनों तक निराहार रहकर अपने शरीर पर ज्वारे उगाने की दुर्गम साधना सफलतापूर्वक संपन्न की।

इस अखंड तपस्या का श्रीगणेश चैत्र नवरात्रि के प्रथम दिन विधि-विधान और माता की विशेष पूजा-अर्चना के साथ हुआ। भक्ति के इस कठिन मार्ग पर चलते हुए नैना लाल गमेती ने अपने सिर और शरीर के विभिन्न हिस्सों पर मिट्टी का लेप लगाकर उसमें ज्वारे बोए। साधना की अवधि के दौरान उन्होंने अन्न-जल का पूर्ण त्याग कर दिया और नियमित रूप से शरीर पर स्थित मिट्टी में जल अर्पित कर ज्वारों को पल्लवित किया। नौ दिनों की यह निरंतर तपस्या न केवल शारीरिक क्षमता बल्कि मानसिक दृढ़ता की भी एक मिसाल बनकर उभरी है।

इस अनूठी और विस्मयकारी साधना की सूचना मिलते ही मंदिर परिसर में प्रतिदिन भारी संख्या में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। नैना लाल के इस विस्मयकारी स्वरूप के दर्शन करने हेतु दूर-दराज से लोग पहुंच रहे हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में भक्तिमय वातावरण व्याप्त हो गया है। मंदिर का प्रांगण माताजी के जयकारों से निरंतर गुंजायमान है, जो इस आयोजन की आध्यात्मिक गहराई और जन-आस्था के प्रभाव को प्रत्यक्ष रूप से प्रमाणित करता है। यह साधना केवल एक व्यक्तिगत अनुष्ठान न रहकर क्षेत्र की सांस्कृतिक और धार्मिक चेतना का केंद्र बन गई है।

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