केलवा में 162वां मर्यादा महोत्सव: मुनिश्री संजय कुमार ने दिया आत्मानुशासन का संदेश
भिक्षु नगर में आयोजित मेवाड़ क्षेत्रीय महोत्सव में मुनिश्री प्रसन्न कुमार और अन्य संतों ने संघीय मर्यादा और अनुशासित जीवनशैली के महत्व पर प्रकाश डाला।

केलवा के भिक्षु नगर में आयोजित 162वें मेवाड़ क्षेत्रीय मर्यादा महोत्सव के दौरान उपस्थित श्रावक-श्राविकाओं के विशाल समूह को संबोधित करते मुनिश्री संजय कुमार जी और मंचस्थ संत वृंद।
मुनिश्री संजय कुमार जी का उद्बोधन
केलवा: शतावधानी मुनिश्री संजय कुमार जी ने मेवाड़ क्षेत्रीय मर्यादा महोत्सव पर अनेक क्षेत्रों से समागत श्रावक श्राविकाओं को संबोधित करते हुए कहा—
"मर्यादा का अर्थ है अपनी सीमा में रहना। नियंत्रण अनुशासन हैं। नियंत्रण उन्माद या प्रमाद में व्यक्ति खो देता हैं तब उसके कारण दण्डित होता हैं। कभी प्रकृति दण्डित कर देती हैं नहीं तो कर्म उसे दण्डित करते हैं। कुछ मर्यादाएं नेसर्गित होती हैं। पशु पक्षी भोग विलास आदि की सीमा में रहते हैं। मनुष्य जानते हुए भी अतिक्रमण करता हैं तो दण्डित होता हैं इन्द्रिय असंयम से मानसिक शारिरिक भावनात्मक बीमारियों से ग्रसित होकर असमय में परलोक चला जाता हैं।"
सुखी एवं सफल जीवन के लिए आत्मानुशासन जरूरी हैं।
मुनिश्री प्रसन्न कुमार जी का वक्तव्य
मुनिश्री प्रसन्न कुमार जी ने स्वरचित "संविधान के निर्माता श्री भिक्षु के गुण गाता हूं स्वर्णिम इतिहास बताता हूं" के गीत से अपना वक्तव्य प्रारंभ किया। उन्होंने कहा कि:
"केलवा में ही 200 वर्ष पहले स्वयं भिक्षु स्वामी ने व साथी संतों ने मिलकर शास्त्रीय व स्वयं निर्मित मर्यादा जिसे संघीय मर्यादाऐ एक गुरु परम्परा, उत्तराधिकार आदि का दृढ़ संकल्प किया। दुनिया मे अधिकतर लोग उसमें में भी नई पीढ़ी अनुशासन और मर्यादा में रहना पसंद नहीं करते। खुलेपन की जीवनशैली का आकर्षण बढ़ रहा हैं। खुलेपन में जो मज़ा हैं वह मर्यादा बंधन में रहने से नहीं मानते हैं जिस में मज़ा मानते हैं किन्तु उसके आगे क्या परिणाम होगा क्या सज़ा होगी वह नहीं जानते हैं कोई भी राष्ट्र समाज एवं परिवार व व्यक्तिगत जीवन बिना मर्यादा अनुशासन के नही चला तो बर्बादी हुई।"
खुलापन अमर्यादित जीवन शैली उन्माद प्रमाद को बढ़ाती हैं।
महोत्सव की अन्य प्रस्तुतियां एवं उपस्थिति
मुनिश्री सिद्धप्रज्ञ जी ने मर्यादा अनुशासन जीवन मे स्वीकार करने का आहवान किया। मुनिश्री प्रीत कुमार जी ने सुमधुर गीत व वक्तव्य दिया। कार्यक्रम के अन्य मुख्य विवरण निम्नानुसार हैं:
- अध्यक्षता: डॉ. बसन्ती लाल जी बाबेल।
- विशेष विचार: महिला मंडल अध्यक्षा रत्ना कोठारी।
- प्रस्तुति: महिलाओ ने गीत का संगान किया।
- सहयोग: तेरापंथ सभा एवं युवक परिषद।
- कुशल संचालन: मुनिश्री प्रकाश कुमार जी।
समागत क्षेत्र: पडासली, चारभुजा, सरदारगढ़, आमेट, रेलमगरा, रिछेड़, आत्मा, अंटालिया, मुंबई, अहमदाबाद आदि से श्रावक श्राविकाएं उपस्थित थी।

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