केलवा पंचायत क्षेत्र के आमली कुआं गांव में आयोजित श्री जोगेश्वर महादेव मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव के अंतर्गत गुरुवार प्रातः 8 बजे अभिजीत मुहूर्त में भगवान जोगेश्वर महादेव की मूर्ति की विधिवत प्राण-प्रतिष्ठा संपन्न हुई।


महोत्सव का शुभारंभ एवं अनुष्ठान

  • इससे पूर्व बुधवार को दिव्य हवन, यज्ञ अनुष्ठान एवं मंदिर शिखर ध्वज पूजन का आयोजन किया गया था।
  • संपूर्ण कार्यक्रम श्रद्धा, आस्था और उल्लास के वातावरण में संपन्न हुआ।
  • गुरुवार सुबह से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने लगी।

मुख्य विधि एवं मुहूर्त

वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक रीति-रिवाजों के बीच विद्वान पंडित उमेशचंद्र द्विवेदी (कसार) के सान्निध्य में प्राण-प्रतिष्ठा की मुख्य विधि सम्पन्न कराई गई। ठीक 8बजे अभिजीत मुहूर्त में मंत्रोच्चार के साथ मूर्ति में प्राण प्रतिष्ठित किए गए।

संतों का सानिध्य एवं उपस्थिति

इस अवसर पर निम्नलिखित संत-महात्माओं का सानिध्य रहा:

  • महामंडलेश्वर रामदास महाराज
  • महामंडलेश्वर अवधेश चैतन्य ब्रह्मचारी
  • चेतन नाथ महाराज
  • सीताराम दास महाराज
  • मनोहर दास महाराज
  • निर्मल राम महाराज
  • भगतराम महाराज

इन संतों के साथ बड़ी संख्या में ग्रामीण एवं आसपास के क्षेत्रों से आए श्रद्धालु उपस्थित रहे।

धार्मिक अनुष्ठान एवं वातावरण

प्राण-प्रतिष्ठा के दौरान भगवान शिव की विशेष पूजा-अर्चना की गई। हवन कुंड में आहुतियां अर्पित की गईं तथा मंदिर परिसर हर-हर महादेव के जयघोष से गुंजायमान हो उठा। उपस्थित श्रद्धालुओं ने परिवार की सुख-समृद्धि, गांव की खुशहाली और क्षेत्र में शांति की कामना की। महिलाओं ने मंगलगीत गाकर वातावरण को भक्तिमय बना दिया।

शिखर ध्वज एवं सजावट

इससे पूर्व महोत्सव के अंतर्गत मंदिर के शिखर पर ध्वज पूजन की विशेष विधि सम्पन्न की गई थी। शिखर ध्वज को विधिवत पूजित कर स्थापित किया गया, मंदिर परिसर को आकर्षक सजावट और रंग-बिरंगी पताकाओं से सजाया गया था, जिससे पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से ओत-प्रोत नजर आया। आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं के लिए प्रसादी एवं जलपान की व्यवस्था की गई।

सेवा कार्य एवं व्यवस्थाएं

ग्राम पंचायत के उप सरपंच रामलाल तेली के साथ युवाओं में लादूराम, भगवती लाल, शिवलाल, मांगीलाल, गोपीलाल तेली, जीवराज, धन्नालाल, भेरूलाल, माधुलाल, शांतिलाल एवं महिलाओं में मीराबाई, अगुबाई, कंकू बाई, जमुना बाई, राधाबाई, शांताबाई, ताराबाई समेत महिलाओं ने सेवा कार्यों में बढ़-चढ़कर भाग लिया। आयोजन समिति के सदस्यों ने व्यवस्थाओं को सुचारु रूप से संचालित किया, जिससे कार्यक्रम शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित ढंग से सम्पन्न हुआ।

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