केलवा: सादडा की श्री राधे गोविंद गौशाला में दिव्यांग गौवंश के मसीहा बने धर्मु भाई, निस्वार्थ सेवा की अनूठी मिसाल
राजसमंद के केलवा स्थित सादडा गांव की श्री राधे गोविंद गौशाला में धर्मु भाई दिव्यांग और बीमार गौवंश की निस्वार्थ सेवा कर मानवता की नई मिसाल पेश कर रहे हैं। 100 से अधिक दिव्यांग गायों की देखभाल, किस्तों पर एम्बुलेंस सेवा और समर्पित चिकित्सा प्रबंधन के माध्यम से वे बेसहारा गौ माता के लिए रक्षक बनकर उभरे हैं। पढ़िए सेवा और समर्पण की यह विशेष रिपोर्ट।

केलवा। सेवा परमो धर्म के सिद्धांत को धरातल पर उतारते हुए राजसमंद जिले के सादडा गांव में भक्ति और मानवता का एक ऐसा संगम देखने को मिल रहा है, जो समाज के लिए प्रेरणा का पुंज बन गया है। यहां स्थित श्री राधे गोविंद गौशाला में धर्मु भाई नामक एक व्यक्तित्व अपनी अटूट श्रद्धा और कर्मठता से उन निराश्रित और दिव्यांग गौ माताओं के घावों पर मरहम लगा रहे हैं, जिन्हें अक्सर समाज और पशुपालक बेसहारा छोड़ देते हैं। धर्मु भाई की यह तपस्या केवल गौसेवा नहीं, बल्कि जीव मात्र के प्रति संवेदनशीलता की एक मर्मस्पर्शी गाथा है।
वर्तमान में इस गौशाला में 300 से अधिक गौवंश को आश्रय प्राप्त है, जिसमें से लगभग 100 गौ माताएं गंभीर रूप से दिव्यांग, अपंग या बीमार हैं। इनमें से कई गौवंश रीढ़ की हड्डी में चोट, टूटे हुए पैर या जन्मजात विकलांगता के कारण चलने-फिरने में पूरी तरह असमर्थ हैं। धर्मु भाई के दिन की शुरुआत सूर्य की पहली किरण से पूर्व ही इन बेजुबान जीवों की सुध लेने के साथ होती है। वे स्वयं अपने हाथों से इन दिव्यांग गायों की सफाई, चारे-पानी और उनके उपचार की कमान संभालते हैं। उनकी निष्ठा का आलम यह है कि वे इन गायों को पशु नहीं, बल्कि अपने परिवार के अभिन्न सदस्य के रूप में देखते हैं।
गौसेवा के इस कठिन मार्ग में संसाधनों का अभाव भी धर्मु भाई के हौसलों को डिगा नहीं सका। शुरुआत के ढाई वर्षों तक जब भी कहीं गौवंश के दुर्घटनाग्रस्त होने की सूचना मिलती, तो वे निजी किराए के टेम्पो से उन्हें गौशाला तक लाते थे। रात्रि के समय वाहन मिलने में होने वाली असुविधा को देखते हुए उन्होंने छह माह पूर्व किस्तों पर एक एम्बुलेंस की व्यवस्था की, जो अब 24 घंटे आपातकालीन सेवाओं के लिए तत्पर रहती है। चिकित्सा के क्षेत्र में भी उन्होंने स्वावलंबन और विशेषज्ञता का अनूठा मेल बिठाया है। वे प्राथमिक उपचार स्वयं करने में सक्षम हैं, वहीं गंभीर स्थितियों के लिए उन्होंने तीन चिकित्सकों की सेवाएं सुनिश्चित कर रखी हैं। आर्थिक चुनौतियों से निपटने के लिए वे कभी मित्रों से सहयोग लेते हैं, तो कभी सोशल मीडिया के माध्यम से जनभागीदारी जुटाकर इस पुनीत कार्य को अविरल जारी रखे हुए हैं।
आज श्री राधे गोविंद गौशाला सादडा क्षेत्र के ग्रामीणों के लिए केवल एक पशु आश्रय स्थल नहीं, बल्कि अटूट आस्था और प्रेरणा का केंद्र बन चुकी है। धर्मु भाई का स्पष्ट मानना है कि गौ माता हमारी संस्कृति की आधारशिला हैं और जो बोल नहीं सकते, उनकी पीड़ा को समझना ही सच्ची ईश्वर भक्ति है। जब कोई मरणासन्न या लाचार गाय उनके उपचार और सेवा से पुनः अपने पैरों पर खड़ी होती है, वही उनके जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि होती है। धर्मु भाई का यह समर्पण समाज को यह कड़ा संदेश देता है कि मानवता की असली कसौटी विपदा में फंसे मूक प्राणियों की निस्वार्थ सेवा ही है।

Pratahkal Bureau
प्रातःकाल ब्यूरो, प्रातःकाल न्यूज़ की वह समर्पित संपादकीय टीम है, जो सटीक, सामयिक और निष्पक्ष समाचार पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा ब्यूरो राजनीति, समाज, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय मामलों में सत्यापित रिपोर्टिंग, गहन विश्लेषण और जिम्मेदार पत्रकारिता पर अपना ध्यान केंद्रित करता है।
