केलवा: शांति नगर में गूंजे नारायण के जयकारे, संत निर्मल महाराज ने जीवंत किया भगवान के 24 अवतारों का अलौकिक प्रसंग
केलवा के शांति नगर में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के दूसरे दिन संत निर्मल महाराज ने भगवान नारायण के 24 अवतारों का हृदयस्पर्शी वर्णन किया। मत्स्य, वराह और नृसिंह जैसे अवतारों के प्रसंगों से पूरा पंडाल भक्तिमय हो गया। कथा के माध्यम से जीवन में अहंकार त्याग कर भक्ति मार्ग पर चलने का संदेश दिया गया, जिसमें बड़ी संख्या में स्थानीय श्रद्धालुओं ने भाग लिया।

केलवा/शांति नगर। भक्ति, श्रद्धा और अध्यात्म की त्रिवेणी जब एक साथ प्रवाहित होती है, तो संपूर्ण परिवेश वैकुंठ के समान प्रतीत होने लगता है। कुछ ऐसा ही दृश्य राजसमंद के केलवा क्षेत्र के समीपवर्ती शांति नगर में देखने को मिल रहा है, जहाँ आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के दूसरे दिन जन-सैलाब उमड़ पड़ा। कथा व्यास रामस्नेही संप्रदाय के प्रतिष्ठित संत निर्मल महाराज की ओजस्वी वाणी ने श्रोताओं को उस युग की याद दिला दी जब अधर्म के नाश के लिए स्वयं नारायण धरा पर अवतरित हुए थे। दूसरे दिन की कथा में भगवान नारायण के 24 अवतारों का जो भावपूर्ण और विस्तारपूर्ण वर्णन हुआ, उसने भक्तों को भक्ति के सागर में सराबोर कर दिया।
संत निर्मल महाराज ने अपनी अमृतवाणी से कथा का रसपान कराते हुए कहा कि जब-जब धर्म की हानि होती है और आसुरी शक्तियाँ सिर उठाने लगती हैं, तब-तब भगवान नारायण सृष्टि की रक्षा और भक्तों के उद्धार के लिए विभिन्न रूपों में प्रकट होते हैं। उन्होंने मत्स्य अवतार से लेकर कूर्म, वराह, नृसिंह, वामन, परशुराम और मर्यादा पुरुषोत्तम राम एवं श्री कृष्ण जैसे प्रमुख अवतारों की व्याख्या करते हुए बताया कि इन सभी अवतारों का मूल उद्देश्य संसार में धर्म की पुनर्स्थापना और मानवता का कल्याण था। महाराज श्री ने जोर देकर कहा कि श्रीमद् भागवत केवल एक ग्रंथ नहीं, बल्कि साक्षात श्री कृष्ण का स्वरूप है, जिसका श्रवण मात्र ही जीव को भवसागर से पार लगाने की शक्ति रखता है।
कथा के दौरान आध्यात्मिक गहराई को स्पर्श करते हुए संत ने राजा परीक्षित के प्रसंग का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार मृत्यु के भय से घिरे राजा परीक्षित ने सात दिनों तक एकाग्र मन से भागवत श्रवण किया और अंततः मोक्ष की प्राप्ति की। यह प्रसंग इस बात का जीवंत प्रमाण है कि कलियुग में भागवत कथा जीवन का मार्गदर्शन करने वाला वह अमृत है, जो मनुष्य को अहंकार, क्रोध और लोभ जैसे विकारों से मुक्त कर प्रेम और करुणा के मार्ग पर अग्रसर करता है। जैसे-जैसे कथा आगे बढ़ी, पंडाल में मौजूद श्रद्धालु भाव-विभोर होकर प्रभु की महिमा में लीन हो गए।
इस पावन आध्यात्मिक अनुष्ठान में क्षेत्र के गणमान्य नागरिकों और श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। भक्ति की इस धारा में हेमराज सिंधल, सुखलाल तेली, नाथूलाल तेली, लक्ष्मण तेली, मोतीलाल तेली, मानाराम तेली, रामलाल तेली, प्रकाश तेली, परशुराम तेली, रतनलाल तेली, राकेश तेली, गोवर्धन राठौड़, बालूराम तेली, नारायणलाल और प्रताप तेली देवपुरा सहित बड़ी संख्या में भक्तगण शामिल हुए। आरती के पश्चात प्रसाद वितरण के साथ दूसरे दिन की कथा का विश्राम हुआ, जिसने शांति नगर के संपूर्ण वातावरण को दिव्य ऊर्जा से भर दिया है।

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