केलवा। क्षेत्र की दौलत कॉलोनी में रविवार दोपहर को उस समय हड़कंप मच गया, जब बिजली के करंट की चपेट में आने से एक बंदर गंभीर रूप से झुलसकर घायल हो गया। दर्द से तड़पते हुए मूक वन्यजीव की चीखें सुनकर स्थानीय गौभक्त तुरंत हरकत में आए और मौके पर पहुंचकर त्वरित सेवा कार्य शुरू किया। गौभक्तों ने घायल बंदर को प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराते हुए उसे सुरक्षित स्थान पर पहुँचाया।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, करंट लगने के बाद बंदर बेसुध और घायल अवस्था में सड़क किनारे पड़ा जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहा था। हादसे की भनक लगते ही गौसेवक कमलेश पालीवाल एवं कन्हैयालाल बिना समय गंवाए तत्काल घटनास्थल पर पहुंचे। उन्होंने संवेदनशीलता दिखाते हुए घायल बंदर को संभाला, उसकी प्राथमिक देखभाल की और त्वरित रूप से आगे के गहन उपचार के लिए सियाणा गौशाला भिजवाया, जहां उसका इलाज जारी है।

इस पूरे घटनाक्रम के दौरान स्थानीय वन्यजीव प्रेमियों और गौभक्तों में वन विभाग के प्रति भारी आक्रोश देखा गया। गौभक्तों का सीधा आरोप है कि हादसे की जानकारी देने और घायल बंदर के रेस्क्यू के लिए वन विभाग के अधिकारियों से लगातार संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन अधिकारियों द्वारा फोन कॉल का कोई जवाब नहीं दिया गया। विभाग की इस कथित लापरवाही और उदासीनता को लेकर स्थानीय ग्रामीणों में गहरी नाराजगी व्याप्त है। आक्रोशित लोगों ने प्रशासन से वन्यजीवों से जुड़ी आपातकालीन स्थितियों में वन विभाग की त्वरित कार्रवाई और जवाबदेही सुनिश्चित करने की पुरजोर मांग की है।

इस मानवीय और तत्परतापूर्ण रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान कमलेश पालीवाल, सुरेश सोनी, राजू पालीवाल, कन्हैयालाल मेवाड़ा तथा किशनलाल हरिजन सहित अन्य सेवाभावी कार्यकर्ता मुस्तैद रहे। इन सभी कार्यकर्ताओं की सजगता और तत्परता के चलते ही गंभीर रूप से घायल बंदर को समय पर चिकित्सा सहायता मिल सकी, जिससे उसकी जान बचाई जा सकी।

Pratahkal Newsroom

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