कपासन में प्रख्यात सूफी संत हजरत दीवाना शाह साहब र.अ. का 85वां तीन दिवसीय उर्स गुरुवार को कुल की फातिहा के साथ सम्पन्न हुआ। उर्स के अंतिम दिन बड़ी संख्या में जायरीन ने भाग लिया और अमन, सुकून एवं भाईचारे की दुआ की।

दरगाह वक्फ कमेटी के सैक्रेट्री हाजी शराफत हुसैन भाटी के अनुसार गुरुवार को बाद नमाजे फज़र देग का खाना तकसीम किया गया। इसके बाद प्रातः 08 बजे शाही महफिलखाना में महफिले मीलाद पाक स.अ. के आयोजन के बाद बारी-बारी से कव्वाल पार्टियों ने अपने-अपने अंदाज में सुफियाना कलाम पेश किए।

कार्यक्रम के अंतिम दौर में कव्वाल पार्टियों ने मिलकर हजरत महबूबे इलाही निजामुद्दीन औलिया के कलाम ‘‘आज रंग हे री माँ रंग हे री, मेरे महबूब के घर रंग हे, ऐसो पीर पायो निजामुद्दीन औलिया’’ और ‘‘मै तो ऐसो पीर और नही देखियो री’’ प्रस्तुत किए। इसके बाद कपासन शहर काजी मोहम्मद सईद, दरगाह औलिया मस्जिद के ईमाम शाकीर मोहम्मद एवं कपासन की सभी मस्जिदों के ईमामों ने कुल की फातिहा पढ़ी और देश में अमनो सुकून की दुआ की।

इस अवसर पर महफिल खाने में महमाने खुसूसी के तौर पर राजस्थान वक्फ बोर्ड के सदस्य शब्बीर मोहम्मद शैख, अजमेर से सैयद वाहीद अंगारा, सैयद मुसर्रफ चोधरी, जावद के शहर काजी सैयद आदिल रजा और रतलाम से अम्मार उल इस्लाम मौजूद रहे।

दरगाह वक्फ कमेटी के सदर सैयद ऐजाज अली ने महफिल खाने में दरगाह वक्फ कमेटी की ओर से राजस्थान सरकार, जिला प्रशासन, स्थानीय प्रशासन, पुलिस प्रशासन, नगरपालिका, बिजली, पानी, रोडवेज विभाग एवं रेलवे अधिकारियों के साथ वॉलियन्टियर्स, कर्मचारी और कार्यकर्ताओं का शुक्रिया अदा किया।

उर्स के दौरान जगह-जगह कुल के छींटों के लिए फव्वारा सिस्टम लगाया गया। वहीं 100 कार्यकर्ताओं ने कुल के छींटे लगाए। कुल के छींटों के साथ ही हर व्यक्ति यह सोचकर घर को रवाना हुआ कि बाबा हुजूर ने स्वयं विदाई दी हो।

बुधवार रात्री उर्स में राजस्थान वक्फ बोर्ड के चेयरमेन डॉ. खानू खान बुधवाली, कपासन विधायक अर्जुन लाल जीनगर और राजस्थान वक्फ बोर्ड के सदस्य सैयद साहिद हसन ने शिरकत की। डॉ. खानू खान बुधवाली ने अपने ओजस्वी सम्बोधन में हिन्दू-मुस्लिम भाईचारे और गंगा-जमुनी तहजीब को मुल्क की असली ताकत बताते हुए आपसी सौहार्द, मोहब्बत और एकता बनाए रखने का पैगाम दिया। उन्होंने समाज में शिक्षा को बढ़ावा देने और दरगाह कमेटी द्वारा किए जा रहे कार्यों की सराहना की।

शुक्रवार को फज़र की नमाज के बाद भूमिगत मुख्य मजार के पट आम जायरीन के दर्शन के लिए खोले जाएंगे। आम जायरीन के दर्शन के लिए साल में एक बार ही ये पट खोले जाते हैं।

Mubarik Ajnabi, Rajsamand

Mubarik Ajnabi, Rajsamand

नाम: मुबारिक-अजनबी

वर्तमान पद: प्रतिनिधि (प्रातःकाल, आमेट)

कार्यक्षेत्र: आमेट, जिला राजसमन्द (राजस्थान)

अनुभव: 25 वर्षों से पत्रकारिता का अनुभव

परिचय एवं कार्यक्षेत्र 

मुबारिक-अजनबी राजस्थान के राजसमन्द जिले के आमेट तहसील क्षेत्र के अनुभवी पत्रकार हैं। वर्तमान में वह 'प्रातःकाल' के प्रतिनिधि के रूप में कार्यरत हैं। वह आमेट तहसील और उसके आसपास के ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों से नियमित रूप से रिपोर्टिंग करते हैं।

बीट (मुख्य विषय)

  • विशेष कवरेज: आमेट तहसील क्षेत्र से क्राइम (अपराध) और सांस्कृतिक खबरों की विशेष रिपोर्टिंग।
  • नियमित कवरेज: स्थानीय राजनीति, प्रशासन, कानून-व्यवस्था, सरकारी विभागों की कार्यप्रणाली और जनहित से जुड़े अन्य मुद्दे।

शैक्षणिक योग्यता (Education)

एम.ए. (M.A.) - कला स्नातकोत्तर की डिग्री।

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