कैलाश नगर में भागवत कथा में उमड़ा भक्तों का सैलाब, प्रेम नारायण महाराज ने सुनाई कृष्ण लीलाएं
कैलाश नगर की श्रीमद्भागवत कथा में प्रेम नारायण महाराज ने कृष्ण की बाल लीलाएं, भक्ति और प्रेम का महत्व बताते हुए श्रद्धालुओं को भावविभोर किया।

तस्वीर में पंडाल के नीचे कथा सुन रहे श्रद्धालुओं की भीड़ दिखाई दे रही है।
कैलाश नगर में चल रही सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के पंचम सोपान में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। कथा वाचक प्रेम नारायण गेहूं खेड़ी महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का भावपूर्ण वर्णन करते हुए कहा कि कथा भगवान का प्रसाद है। भगवान अपने भक्त के भाव को देखते हैं, उसके साधन या सामर्थ्य को नहीं।
महाराज ने कहा कि सबसे ऊंची प्रेम सगाई है। भगवान से अपनापन का संबंध बना लो और उन्हें अपने माता-पिता मान लो, इससे जीवन की सारी चिंताएं समाप्त हो जाती हैं। उन्होंने कहा कि हनुमानजी के माता-पिता अंजनी और केसरी थे, लेकिन श्रीराम और जानकी को अपनी आत्मा का माता-पिता मानकर उन्होंने उनकी सेवा की।
विदुरानी के प्रेम का प्रसंग सुनाते हुए प्रेम नारायण महाराज ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने प्रेमवश केले के छिलके तक खा लिए। उन्होंने कहा कि दुनिया माया के सामने नाचती है, लेकिन माया ईश्वर के सामने नाचती है और भगवान अपने भक्तों के प्रेम में नाचते हैं।
कथा में भगवान के भक्तों के प्रति प्रेम के विभिन्न प्रसंगों का भी वर्णन किया गया। महाराज ने कहा कि भगवान ने शबरी के प्रेम से बेर खाए, कर्माबाई की खिचड़ी स्वीकार की और द्रौपदी के एक चावल के दाने से सभी को संतुष्ट कर दिया। पूतना के विष का पान करते हुए भगवान ने उसके प्राण भी खींच लिए। उन्होंने अगासुर और बकासुर जैसे राक्षसों का अंत किया तथा इंद्र के उत्पात को भी उत्सव में बदल दिया।
कथा के दौरान “तारेगा हमारे श्याम, भरोसा एक गोविंद का, भरोसा एक गिरधर का” जैसे भजनों पर श्रद्धालु भावविभोर हो गए। महाराज ने कहा कि जीवन के अंतिम समय में भगवान की कृपा ही सच्चा सहारा बनेगी। उन्होंने कहा कि यह शरीर मां के दूध से बना है, इसे भजन रूपी माखन में बदलकर आत्मा का मंगल करना चाहिए।
प्रेम नारायण महाराज ने कहा कि सौ काम छोड़कर भोजन करो, हजार काम छोड़कर स्नान करो, लेकिन करोड़ों काम छोड़कर भी भगवान के भजन की याद नहीं छोड़नी चाहिए। रावण, कंस और दुर्योधन के परिणाम से सीख लेकर मनुष्य को भगवान का भजन करना चाहिए।
उन्होंने श्रद्धालुओं से कहा कि मन में वासना का खर्च कम करो और भगवान के भजन की बचत करो। पुराने जन्मों के संस्कारों के कारण सपने आते हैं। महाराज ने कहा कि जिस घर में गौ माता जुगाली करती है, वहां की विपदाएं दूर होती हैं। गौ माता की सेवा और गृहस्थ जीवन में भगवान का स्मरण भी भक्ति का मार्ग है।

Bharat Kumar Rajak, Rajsamand
नाम: भरत कुमार रजक
वर्तमान पद: संवाददाता (प्रातः काल)
कार्यक्षेत्र: केलवा (राजसमंद, राजस्थान)
बीट (मुख्य विषय): शिक्षा, सोशल एक्टिविटी (सामाजिक गतिविधियां) और एजुकेशन
अनुभव: 12 वर्ष
परिचय
भरत कुमार रजक 'प्रातः काल' समाचार पत्र में संवाददाता के रूप में कार्यरत हैं। उनका मुख्य कार्यक्षेत्र केलवा है। वह नियमित रूप से शिक्षा (एजुकेशन), शैक्षणिक व्यवस्थाओं, स्कूलों, कॉलेजों और सामाजिक गतिविधियों (सोशल एक्टिविटी) से जुड़े विषयों पर रिपोर्टिंग करते हैं।
पत्रकारिता का अनुभव (Work Experience)
भरत कुमार रजक को मीडिया और ग्राउंड रिपोर्टिंग के क्षेत्र में 12 वर्षों का लंबा अनुभव है। पिछले एक दशक से अधिक समय से वह क्षेत्र की खबरों और जनहित के मुद्दों को लगातार कवर कर रहे हैं।
