घायल पैंथर का तांडव: रेस्क्यू के दौरान वनकर्मियों पर हमला, जंगल में गिरकर मौत
राजसमंद–उदयपुर फोरलेन पर घायल पैंथर ने रेस्क्यू के दौरान चार वनकर्मियों पर हमला कर दिया। गंभीर रूप से घायल पैंथर कुछ देर बाद जंगल में गिरकर मर गया। घटना से वन विभाग में हड़कंप, पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार।

राजसमंद जिले से गुजरने वाले राजसमंद–उदयपुर फोरलेन पर शुक्रवार को उस वक्त हड़कंप मच गया, जब एक घायल पैंथर ने रेस्क्यू अभियान के दौरान वन विभाग के कर्मचारियों पर अचानक हमला कर दिया। इस हमले में चार वनकर्मी गंभीर रूप से घायल हो गए, जबकि कुछ ही देर बाद पैंथर भी जंगल में गिरकर दम तोड़ बैठा। पैंथर के हमले और उसकी रहस्यमयी मौत ने वन विभाग सहित पूरे क्षेत्र को स्तब्ध कर दिया है।
नाथद्वारा वन विभाग के रेंजर इस्माइल शेख ने बताया कि गुरुवार रात किसी अज्ञात वाहन की टक्कर से पैंथर गंभीर रूप से घायल हो गया था। घायल अवस्था में वह देर रात तक फोरलेन पर भटकता रहा और बाद में हाईवे किनारे खेतों की ओर चला गया। शुक्रवार सुबह से वन विभाग की टीम उसकी तलाश में जुटी हुई थी। दोपहर के समय खेत के किनारे पैंथर घायल अवस्था में दिखाई दिया, जिसके बाद उसे सुरक्षित रेस्क्यू करने का प्रयास शुरू किया गया।
इसी दौरान पैंथर अचानक आक्रामक हो गया और रेस्क्यू दल के सदस्य पन्नालाल कुमावत पर झपट पड़ा। बचाव के लिए आगे आए हरीश लौहार, घनश्याम पूर्बिया और गिरधारीलाल पर भी पैंथर ने हमला कर दिया, जिससे चारों वनकर्मी घायल हो गए। शोर सुनकर महेंद्र सिंह और सुरेंद्र सिंह सहित आसपास के लोग मौके पर पहुंचे, तब पैंथर जंगल की ओर भाग निकला।
घटना के तुरंत बाद घायल वनकर्मियों को कालीवास स्थित अनंता मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल पहुंचाया गया, जहां उनका उपचार जारी है। इधर, नाथद्वारा और राजसमंद से पहुंचे वन विभाग के रेस्क्यू दल ने पैंथर का पीछा जारी रखा। कुछ ही दूरी पर पैंथर अचानक लड़खड़ाकर जंगल में गिर पड़ा और उसकी मौत हो गई।
पैंथर के शव को देलवाड़ा स्थित नर्सरी में सुरक्षित रखवाया गया है, जहां पोस्टमार्टम के बाद अंतिम संस्कार की प्रक्रिया की जाएगी। रेंजर इस्माइल शेख ने बताया कि पैंथर पहले से घायल था और अत्यधिक तनाव के चलते संभवतः उसे हृदयाघात हुआ हो सकता है, हालांकि मौत के वास्तविक कारणों की पुष्टि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगी।
घटना की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में स्थानीय लोग पैंथर को देखने के लिए मौके पर पहुंच गए। कानून एवं शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए देलवाड़ा थाना पुलिस का जाब्ता भी तैनात रहा। यह घटना वन्यजीव संरक्षण, सड़क सुरक्षा और रेस्क्यू अभियानों के दौरान सुरक्षा उपायों की गंभीरता को एक बार फिर रेखांकित करती है।
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Pratahkal Bureau
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